आज के भारत में भगत सिंह की अनुगूंज

भगत सिंह और उनके साथी सुखदेव व राजगुरु को लाहौर जेल में फांसी दिए 94 साल हो चुके हैं. उन्हें तय समय से एक दिन पहले ही फांसी दे दी गई थी. तब से उन्हें उर्दू में शहीदों के सरताज, ‘शहीद-ए-आजम’ के नाम से जाना जाता है. उर्दू  में ‘इंकलाब जिंदाबाद’ का मशहूर नारा, जिसे भगत सिंह ने अमर कर दिया, आज भी पूरे भारत में बदलाव और न्याय की सामूहिक पुकार के रूप में गूंजता है.

कौन खेल रहा यह खून की होली ?

संत कबीर नगर (जिला - खलीलाबाद, उत्तर प्रदेश)

यह घटना जिला मुख्यालय संत कबीर नगर से 12 किमी दूर की है. होली के दिन 14 मार्च को सामंती दबंगों द्वारा कर्री गांव के गरीब राजभर परिवार के 21 घरों को आग के हवाले कर दिया था और शारीरिक हमले किये थे, जिसमें घायल दो लोग अभी भी गोरखपुर मेडिकल कालेज में जीवन-मरण से जूझ रहे हैं.

स्वतंत्र और निष्पक्ष चुनाव के लिए जरूरी है तटस्थ और स्वतंत्र चुनाव आयोग!

18 फरवरी को, सुप्रीम कोर्ट की एक याचिका पर सुनवाई से ठीक एक दिन पहले, जिसमें मोदी सरकार द्वारा पारित 2023 के कानून को चुनौती दी गई थी (जो मुख्य चुनाव आयुक्त और अन्य चुनाव आयुक्तों की नियुक्ति से संबंधित है), मोदी सरकार ने उसी कानून का इस्तेमाल करते हुए सेवानिवृत्त हो रहे मुख्य चुनाव आयुक्त राजीव कुमार के उत्तराधिकारी को चुना और चुनाव आयोग के तीसरे सदस्य की नियुक्ति की. 2023 का यह कानून प्रधानमंत्री की अध्यक्षता वाली तीन सदस्यीय पैनल को मुख्य चुनाव आयुक्त और अन्य चुनाव आयुक्तों की नियुक्ति करने का अधिकार देता है.

छत्तीसगढ़ हाई कोर्ट द्वारा वैवाहिक बलात्कार को मान्यता न देना निंदनीय है

अखिल भारतीय प्रगतिशील महिला एसोसिएशन

हम 10 फरवरी 2025 को छत्तीसगढ़ हाई कोर्ट के फैसले से स्तब्ध हैं, जिसमें कोर्ट ने गोरखनाथ शर्मा बनाम छत्तीसगढ़ राज्य के मामले में वैवाहिक बलात्कार के मुद्दे को न तो स्वीकार किया और न ही उसके समाधान के लिए कोई कदम उठाया. इस मामले में आरोपी पति ने भारतीय दंड संहिता, 1860 की धारा 377 (अप्राकृतिक अपराध), धारा 376 (बलात्कार की सजा) और धारा 304 (हत्या न होने वाले आपराधिक मानव वध की सजा) के तहत अपनी सजा के खिलाफ अपील दायर की थी.

भारत के साम्राज्यवाद-विरोधी राष्ट्रवाद के जज्बे को फिर से जीवंत करें

फरवरी के पिछले कुछ हफ्तों में, 300 से अधिक भारतीय नागरिकों को अमेरिकी सैन्य विमानों से बेड़ियों में जकड़कर भारत भेजा जा चुका है. बताया जा रहा है कि 18,000 भारतीयों की सूची पहले ही मोदी सरकार को सौंपी जा चुकी है, जिन्हें आने वाले दिनों में निर्वासित किया जा सकता है. निजी आकलनों के मुताबिक, अमेरिका में सात लाख से अधिक भारतीयों पर निर्वासन का खतरा मंडरा रहा है. भारत के विदेश मंत्री ने संसद में अमेरिकी कार्रवाई का बचाव किया है. प्रधानमंत्री मोदी ने डोनाल्ड ट्रंप के साथ संयुक्त प्रेस कॉन्फ्रेंस में भी यही रुख दोहराया.

कुंभ त्रासदी के गुनहगार : मोदी-शाह-योगी सरकार

इलाहाबाद, जिसे अब प्रयागराज नाम दिया गया है, या हरिद्वार, उज्जैन जैसे अन्य स्थलों पर गंगा-यमुना के संगम तट पर साधुओं और आम हिंदू श्रद्धालुओं का कुंभ मेले में जुटना हिंदू परंपरा का एक प्राचीन हिस्सा रहा है. शुरुआती दौर में कुंभ मुख्य रूप से धार्मिक ग्रंथों पर चर्चा और दार्शनिक चर्चाओं का मंच था, लेकिन समय के साथ यह एक विशाल नदी तटीय धार्मिक मेले में बदल गया.

मेहनतकशों की उपेक्षा बनी दिल्ली में आप की हार का कारण

आम आदमी पार्टी की हार और 27 साल बाद दिल्ली की सत्ता में भाजपा की वापसी कराने वाले दिल्ली विधान सभा चुनाव के नतीजे ज्यादा चौंकाने वाले नहीं हैं. दिल्ली की राजनीति पर बारीक नजर रखने वाले लोगों को पहले से ही यह आभास था कि इस बार आम आदमी पार्टी के वोटों में काफी गिरावट आएगी और उसका फायदा सीधे भाजपा को होगा. हालांकि तब भी लोग अनुमान लगा रहे थे कि शायद आम आदमी पार्टी किसी तरह अपनी सरकार बना लेगी. पर न सिर्फ आम आदमी पार्टी सरकार बनाने से काफी दूर रह गयी बल्कि आतिशी सिंह और गोपाल राय को छोड़ दें, तो अरविन्द केजरीवाल सहित उसके बाकी सभी प्रमुख चेहरे चुनाव हार गए.

गाजा युद्धविराम : मेरे बचे हुए परिवार के लिए इसका क्या मतलब है

(इजराइल के जनसंहार ने मेरे कई रिश्तेदारों की जान ले ली, लेकिन जो जिंदा बचे, वे मलबे से फिलीस्तीन का पुनर्निर्माण करने के लिए दृढ़ संकल्पित हैं.)

– शहद अबूसलामा

15 महीनों तक बाइडेन प्रशासन ने इजराइल के गाजा में जनसंहारक युद्ध को हथियारों से समर्थन दिया. अब, ट्रंप के शपथ ग्रहण से एक दिन पहले, उन्हें जो चाहिए था, वह मिल गया – युद्धविराम.

बजट 2025-26 की ओर : बढ़ता आर्थिक संकट और राजनीतिक प्राथमिकताएं

मोदी सरकार की दस सालों की कारपोरेट-परस्ती और आर्थिक कुप्रबंधन ने भारत को गहरे आर्थिक संकट में झोंक दिया है. गिरती आर्थिक विकास दर, अमेरिकी डॉलर के मुकाबले रुपये का लगातार कमजोर होना, बढ़ता आयात बिल और रोजमर्रा की जरूरी चीजों की आसमान छूती कीमतें – हर संकेतक भारत के बिगड़ते आर्थिक हालात की तरफ साफ इशारा करता है. इन खतरनाक हालात से ध्यान भटकाने के लिए सरकार ने लक्ष्य को 2047 तक टाल दिया है, यानी भारत की आजादी के सौ साल पूरे होने तक देश को विकसित बनाने का सपना दिखाया जा रहा है!

देश की न्यायपालिका पर मंडराता फासीवादी खतरा

सुप्रीम कोर्ट के वरिष्ठ अधिवक्ता कॉलिन गोंजाल्वेस ने मौजूदा दौर में न्यायपालिका में फासिस्ट घुसपैठ और लोकतंत्र पर हमले के बारे में बेहद विचारोत्तेजक और आंखें खोलने वाला वक्तव्य दिया.

फासीवाद पर हैदराबाद में 29 दिसंबर 2024 से 2 जनवरी 2025 तक चलने वाली संगोष्ठी के दूसरे दिन अपने लगभग डेढ़ घंटे के वक्तव्य में कॉलिन ने अनेक तथ्यों और घटनाओं के जरिये पुरजोर ढंग से इस बात को रखा कि मोदी सरकार ने न्यायपालिका को पूरी तरह से बर्बाद कर दिया है और लोकतंत्र को अंदर से खत्म कर दिया है. तमाम लोकतांत्रिक संस्थाओं का बस ढांचा बचा रह गया है.