आजादी के 75 साल पर बिहार में जन अभियान


भारत की आजादी के लिए चला आंदोलन विश्व इतिहास में अपने ढंग का एक बड़ा और कई महत्वपूर्ण बदलावों वाला आंदोलन था. औपनिवेशिक शोषण व्यवस्था के खिलाफ लगभग 200 वर्षों तक जनता के विभिन्न हिस्सों का चलने वाले इस अनवरत संषर्ष के केन्द्र में एक नए व आधुनिक भारत के निर्माण का सपना था. 1857 के पहले स्वतंत्रता संग्राम से लेकर 1942 के आंदोलन के दरम्यानी समय में करोड़ों-करोड़ जनता आंदोलित हुई. आंदोलन के दौरान लाखों गिरफ्तारियां व हजारों शहादतें हुईं लेकिन लोग लड़ते रहे – यह हमारे इतिहास का स्वर्णिम पक्ष है.

किसानों के जघन्य हत्याकांड के दोषी केंद्रीय गृह राज्य मंत्री की बर्खास्तगी की मांग के साथ उत्तर प्रदेश में भाकपा(माले) का जन अभियान

भाकपा(माले) व अखिल भारतीय किसान महासभा ने लखीमपुर में किसानों के जघन्य हत्याकांड के दोषी केंद्रीय गृह राज्य मंत्री की बर्खास्तगी की मांग के साथ 7 से 13 अक्टूबर तक सप्ताह भर सघन जन अभियान चलाया. इस अभियान के तहत गांवों व हाट-बाजारों में पर्चा वितरण, प्रतिवाद मार्च, नुक्कड़ सभाएं व मोदी-योगी सरकार के पुतला दहन के कार्यक्रम आयोजित किए गए. 12 अक्टूबर को श्रद्धांजलि सभा एवं 13अक्टूबर को गृह राज्य मंत्री पर एफआईआर दर्ज करने, मंत्रिमंडल से बर्खास्त करने व निष्पक्ष जांच सुनिश्चित कराने के लिए अबिलंब गिरफ्तार करने की मांग करते हुए राष्ट्रपति को संबोधित ज्ञापन भेजे गए.

बिहार के राज्यपाल की ओर से आयोजित सर्वदलीय बैठक में भाकपा(माले) द्वारा दिए गए सुझाव

 

1. बिहार के मुख्यमंत्री इस बात की गारंटी करें कि समय-समय पर इस तरह की सर्वदलीय बैठकें राज्य से लेकर जिला स्तर पर आयोजित की जाएं. कोरोना से निपटने में जिला स्तर पर इस तरह की आपसी समझदारी काफी मददगार साबित हो सकती है. भाकपा(माले) कोरोना व लाॅकडाउन के पहले दौर से ही इस प्रकार की बैठकों की मांग करते रही है.

कोरोना कहर में पीड़ितों की सेवा के संकल्प का नाम है -- भाकपा(माले)

 

बिहार में उल्टा चल रहा है. इस संकट के समय में विपक्ष ख़ासकर वामपंथी सड़क पर हैं. अस्पताल-अस्पताल जाकर कोरोना पीड़ितों की मदद में जुटे हैं और सत्ताधारी ‘ऑल इज वेल’ कहते हुए विपक्षियों को कोसने में मगन हैं.

छुपाने के हर जतन के बावजूद ये बात अब छिप नहीं रही है कि अबकी बार कोरोना महामारी संक्रमण की त्रासद आपदा ने जहां देशहित का नारा लगाने वाली सरकारों की देश के नागरिक स्वास्थ्य से जुड़े हर मामले की ऐसी पोल खोली है कि कोई बहाना-जुमला लोगों को रास नहीं आ रहा.

का. दीपंकर भट्टाचार्य ने पिछले दिनों असम के बेहाली विधानसभा क्षेत्र में

 

भाकपा(माले) महासचिव का. दीपंकर भट्टाचार्य ने पिछले दिनों असम के बेहाली विधानसभा क्षेत्र में, जहां पार्टी की केन्द्रीय कमेटी सदस्य का. बिबेक दास हमारे प्रत्याशी हैं, चुनाव प्रचार अभियान में हिस्सा लिया. कई जन सभाओं को संबोधित किया. पार्टी केन्द्रीय कमेटी सदस्य का. मो. सलीम ने भी वहां कई चुनाव सभाओं को संबोधित किया.

 

प. बंगाल में भाजपा को सत्ता में आने से रोकने के लिए एक मजबूत विपक्ष का होना जरूरी है

 

– सुमंती एक्का, फांसीदेवा विधान सभा क्षेत्र से भाकपा(माले) प्रत्याशी

सुमंती एक्का महसूस करती हैं कि सरकार चाय मजदूरों की दुर्दशा के प्रति असंवेदनशील बनी रही है और उसने चाय बागान में न्यनतम मजदूरी कानून लागू करने की कभी कोशिश नहीं की. उन्होंने रोजगार के नुकसान, कृषि संकट, मूल्य वृद्धि और श्रम अधिकारों के क्षरण का हवाला दिया और भाजपा के खिलाफ ‘मजबूत एकताबद्ध प्रतिरोध’ का आह्वाव किया.

बिहार में निकली किसान संघर्ष यात्राएं

 

किसान नेता स्वामी सहजानंद सरस्वती के जन्म दिवस (महाशिवरात्रि, 11 मार्च 2021) को अखिल भारतीय किसान महासभा तथा भाकपा(माले) की ओर से किसान दिवस के रूप में मनाते हुए बिहार के दर्जनों जिला मुख्यालयों पर किसान मार्च निकाला गया. उस दिन पटना जिले के बिहटा में जहां सहजानंद सरस्वती का ‘सीताराम आश्रम’ अवस्थित है, एक किसान-मजदूर महापंचायत आयोजित हुई जिसे भाकपा(माले) महासचिव का. दीपंकर भट्टाचार्य के साथ ही अखिल भारतीय किसान महासभा व खेग्रामस नेताओं ने कई वरिष्ठ नेताओं ने भी संबोधित किया.