संस्थाबद्ध क्रूरता : जम्मू-कश्मीर में उत्पीड़न

“कोई इंसान कितनी बार मुंह फेर सकता है
और कितनी बार बहाना करेगा कि
उसने कुछ देखा ही नहीं?”

हम भारतीय कितनी कितनी बार अपना मुंह फेरें और बहाना करें कि हम कश्मीरी अवाम पर ढाए जा रहे भयावह उत्पीड़न को नहीं देख रहे हैं ?

इंसेफ्लाइटिस का बिहार में कहर : स्वास्थ्य मंत्रो के इस्तीफे की मांग पर माले-आइसा-आरवाईए-ऐपवा का बिहार में प्रतिवाद

इंत्जिनाइटिस जिसे मुजफ्फरपुर वो स्थानीय लोग ‘चमकी बुखार’ है कहते हैं, ने एक वार फिर से कहर ढाया है.  यह अजीब संयोग है कि 2014 में जब केंद्र में पहली बार नरेन्द्र मोदी की सरकार आई थी, इस बीमारी से 300 से अधिक बच्चों की मौतें हुई थी. इस बार फिर से जब मोदी सत्ता में दुबारा लौटे हैं, तो मौतों की संख्या अब तक 150 के पार कर गई है. अपना शपथ ग्रहण के बाद मोदी ने सबका साथ-सबका विकास और सबका विश्वास का नारा दिया था, लेकिन मुजफ्फरपुर की घटना ने केंद्र व राज्य सरकार के इस दावे की पोल खोल कर रख दी है. अव्वल दर्जे की सुस्ती व घोर लापरवाही बतलाती है कि भाजपा-जदयू के नेता सत्ता के मद में चूर हैं.

आजाद भारत में भूमि सुधार और वर्तमान स्थिति

आजादी को लड़ाई वो अंतिम दौर में तेलंगाना किसान विद्रोह के जरिये देश में मुकम्मल भूमि सुधार की चुनौती कम्युनिस्टों ने पेश कर दी थी. आजादी के बाद भारत में उत्तर प्रदेश, मध्य प्रदेश, बिहार, मद्रास, असम एवं बाम्बे राज्य सबसे पहले अपने यहां 1949 में जमींदारी उम्मूलन बिल लाए. इन सब ने गोविन्द वल्लभ पन्त के नेतृत्व वाली उत्तर प्रदेश जमींदारी उम्मूलन समिति की रिपोर्ट को अपने बिल का आधार बनाया. 1950 में भारत सरकार भी जमींदारी उम्मूलन कानून ले आई.

टिहरी-नैनबाग प्रकरण : बलात्कार और दलित उत्पीड़न की हकीकत

गत 30 मई 2019 को उत्तराखंड के टिहरी जिले के नैनवाग क्षेत्र में 9 वर्षीय बालिका के साथ गांव के ही एक व्यक्ति द्वारा बलात्कार किए जाने का घटना सामने आई. इस मामले में पुलिस और अस्पताल का पीड़िता के प्रति उपेक्षापूर्ण रवैया भी चर्चा का विषय बना. सवर्ण पुरुष द्वारा दलित बालिका के साथ दुष्कर्म के आरोप ने इस मामले को और संवेदनशील बना दिया. इस मामले में भाकपा(माले) की ओर से देहारादून के सरकारी अस्पताल में पीड़िता और उसकी मां से मैंने तथा वर्गीश बमोला ने मुलाकात की.

लोकसभा चुनाव 2019 में उत्तर प्रदेश में हमारा प्रदर्शन

उत्तर प्रदेश में भाकपा(माले)-लिबरेशन ने 2019 के लोकसभा चुनाव में राज्य की तीन सीटों पर अपने प्रत्याशी उतारे थे. यहां प्रस्तुत है हर सीट का चुनावी हाल :

सूचना प्रौद्योगिकी क्षेत्र में बड़े पैमाने की छंटनी

दिसंबर 2014 में चेन्नै स्थित सूचना प्रौद्योगिकी (आइटी) उद्योग के कर्मचारियों ने बड़े पैमाने की छंटनी के फैसले को चुनौती दी. उन लोगों ने प्रदर्शन किया और प्रबंधन तथा कर्मचारियों के बीच समझौता वार्ता कराने के लिए श्रमायुक्त को याचिका सौंपी. इस प्रतिवाद ने इस मिथक को तोड़ दिया कि अपेक्षाकृत ऊंची तनख्वाह पाने वाले आइटी कर्मियों को यूनियन में संगठित नहीं किया जा सकता है. यह पहलकदमी शीघ्र ही अन्य शहरों - पुणे, बंगलोर, मुंबई, कोलकाता, हैदराबाद और भुवनेश्वर - में भी फैल गई.

एनआरसी और ‘विदेशियों के लिए ट्रिब्यूनल’ के नाम पर असम में उत्पीड़न और मानवाधिकार उल्लंघन

असम में राष्ट्रीय नागरिक पंजीकरण (एनआरसी) की प्रक्रिया में ऐसे अनेक उदाहरण मिले हैं जिनमें लोगों को उन व्यक्तियों के खिलाफ ‘आपत्ति आवेदन’ देने के लिए बाध्य किया जा रहा है जिनके नाम एनआरसी में दर्ज पाए जा रहे हैं.

सीजेपी (मुख्य न्यायिक अभियोजक) के पास असम के कोकराझाड़ जिले से कुछ लेागों ने शिकायतें भेजी हैं, जो दावा कर रहे हैं कि ऑल बोडो स्टूडेंट्स यूनियन (एबीएसयू) के कुछ सदस्यों ने ऐसे दस ‘आपत्ति आवेदनों’ पर उनसे जबरन दस्तखत करवाए हैं.