मोदी-ट्रंप मुलाकात : साझेदारी कम, आत्मसमर्पण ज्यादा

ट्रंप और मोदी के बीच उनकी चुनावी जीत के बाद पहली मुलाकात हो चुकी है. मोदी सरकार और गोदी मीडिया दो “महान दोस्तों” की दोस्ती का ढिंढोरा पीट रहे हैं, लेकिन बाकी दुनिया असल बात समझ रही है – जो ट्रंप प्रशासन के अलग-अलग ऐलानों, संयुक्त प्रेस कान्फ्रेंस और बैठक के बाद जारी बयान से मिल रहे हैं.

दिल्ली में भाजपा की सत्ता में वापसी और बिहार के लिए उभरती चुनौतियां

2015 और 2020 में लगातार भारी बहुमत हासिल करने वाली ‘आम आदमी पार्टी’ (आप) को 2025 के विधानसभा चुनावों में करारा झटका लगा है. वोट शेयर में करीब दस प्रतिशत की गिरावट (53% से 43%) के कारण ‘आप’ की सीटें घटकर सिर्फ 22 तक सिमट गई है. वहीं, भाजपा का वोट शेयर सात प्रतिशत बढ़कर 38% से 45% हो गया, जिससे उसकी सीटें छह गुना बढ़कर 8 से 48 हो गईं. साथ ही, यह 27 साल बाद दिल्ली में भाजपा की सत्ता में वापसी और 2024 लोकसभा चुनाव में बहुमत खोने के बाद एनडीए की तीसरी विधानसभा चुनाव जीत है.

आरएसएस की ‘सच्ची आजादी’ का दावा : संविधान और स्वतंत्रता आंदोलन की विरासत पर हमला

मोहन भागवत का यह बयान कि विध्वंस की गई बाबरी मस्जिद की जगह पर सरकार प्रायोजित राम मंदिर का निर्माण भारत की ‘सच्ची आजादी’ का निर्णायक पल है, एक बार फिर यह याद दिलाता है कि आरएसएस का राष्ट्रवाद और आजादी का नजरिया भारत के स्वतंत्रता संग्राम के वास्तविक इतिहास और उसकी आकांक्षाओं के बिल्कुल विपरीत है. आरएसएस के इतिहास और विचारधारा को देखते हुए, संगठन के प्रमुख का ऐसा बयान अप्रत्याशित नहीं है.

आरएसएस की 'सच्ची आजादी' का दावा: संविधान और स्वतंत्रता आंदोलन की विरासत पर हमला

मोहन भागवत का यह बयान कि विध्वंस की गई बाबरी मस्जिद की जगह पर सरकार प्रायोजित राम मंदिर का निर्माण भारत की 'सच्ची आजादी' का निर्णायक पल है, एक बार फिर यह याद दिलाता है कि आरएसएस का राष्ट्रवाद और आजादी का नजरिया भारत के स्वतंत्रता संग्राम के वास्तविक इतिहास और उसकी आकांक्षाओं के बिल्कुल विपरीत है. आरएसएस के इतिहास और विचारधारा को देखते हुए, संगठन के प्रमुख का ऐसा बयान अप्रत्याशित नहीं है.

2025 को फासीवादी हमले पर बड़ी जीतों का साल बनाएं !

2024 कई देशों के लिए नेतृत्व परिवर्तन का साल रहा, जबकि गाजा में इजराइल द्वारा फिलिस्तीनियों का नरसंहार बिना रुके जारी रहा. हमारे इलाके में, श्रीलंका ने इतिहास में पहली बार एक वामपंथी सरकार चुनी. बांग्लादेश में एक जनआंदोलन ने पूर्व प्रधानमंत्री शेख हसीना को देश छोड़ने और भारत में शरण लेने पर मजबूर किया, लेकिन लोकतंत्र की बहाली की संभावना अब भी अनिश्चित दिख रही है क्योंकि कट्टरपंथी जमात समर्थक ताकतें मजबूत हो रही हैं.

‘एक राष्ट्र, एक चुनाव’ विधेयक लोकतंत्र और संघवाद की मूल भावना को कमजोर करने वाला

17 दिसंबर, 2024 को मोदी सरकार ने एक साथ चुनाव कराने के अलोकतांत्रिक और असंवैधानिक विचार को आगे बढ़ाने के लिए दो विधेयक लाए गए. इनमें संविधान (129वां संशोधन) विधेयक 2024 और संघ क्षेत्रों के कानून संशोधन विधेयक 2024 शामिल हैं, जो लोकसभा में पेश किए गए.

फासीवादी शासन बनाम संघर्षशील जनता : संसद की लोकतांत्रिक कार्यप्रणाली, न्यायिक जवाबदेही और चुनावी पारदर्शिता के लिए

भारत के संविधान को अपनाए जाने की 75वीं वर्षगांठ की पूर्व संध्या पर, सुप्रीम कोर्ट ने भाजपा नेता सुब्रमण्यम स्वामी द्वारा दायर उस याचिका को खारिज कर दिया, जिसमें 1976 के संशोधन के तहत प्रस्तावना में जोड़े गए ‘धर्मनिरपेक्ष’ और ‘समाजवादी’ शब्दों को हटाने की मांग की गई थी. सामान्य परिस्थितियों में, शीर्ष अदालत के इस स्पष्ट फैसले से संविधान के खिलाफ चल रहे अभियान पर विराम लग जाना चाहिए था. लेकिन, कुछ ही दिनों बाद, इलाहाबाद हाई कोर्ट के एक मौजूदा न्यायाधीश की ओर से अत्यंत कट्टरपंथी और असंवैधानिक बहुसंख्यकवादी बयान सामने आया.

अयोध्या 1992 से संभल 2024 तक : भारत के संविधान पर बढ़ता संघी हमला

6 दिसंबर, 2024 को बाबरी मस्जिद को हिंदुत्व भीड़ द्वारा गिराए जाने की 32वीं वर्षगांठ है, जिसे भाजपा के बड़े नेताओं ने खुलेआम समर्थन दिया था. यह देश में सांप्रदायिक फासीवाद का एक महत्वपूर्ण मोड़ बन गया. यह विध्वंस उस समय के उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री कल्याण सिंह द्वारा राष्ट्रीय एकता परिषद से किए गए वादे के बावजूद हुआ कि उनकी सरकार बाबरी मस्जिद की सुरक्षा के लिए पूरी तरह जिम्मेदार होगी.

ट्रम्प की चुनावी वापसी : सबक और चुनौतियां

चार साल पहले चुनावी हार और तख्तापलट की असफल कोशिश के बाद, डोनाल्ड ट्रम्प ने अब अमेरिकी राष्ट्रपति चुनाव में पिछले दो दशकों की सबसे बड़ी रिपब्लिकन जीत के साथ नाटकीय वापसी की है. वे लोकमत से जीतने वाले पहले रिपब्लिकन राष्ट्रपति भी बन गए हैं. सीनेट और कांग्रेस पर रिपब्लिकन पार्टी का नियंत्रण होने सेए ट्रम्प 2.0 ट्रम्प 1.0 की तुलना में कहीं अधिक मजबूत स्थिति में होंगे और उन्हें अपने उग्र नस्लवादी और साम्राज्यवादी दक्षिणपंथी एजेंडे को आक्रामक रूप से आगे बढ़ाने का अवसर मिलेगा.

लोकतंत्र के हाथों शहीद एक सच्चे लोकतंत्रवादी : जीएन साईबाबा

प्रोफेसर जीएन साईबाबा ने 12 अक्टूबर 2024 को शाम आठ बजकर छत्तीस मिनट पर अंतिम सांस ली. उनका दिल काम करना बंद कर चुका था और डॉक्टर उन्हें बचाने की पूरी कोशिश कर रहे थे, लेकिन ऐसा नहीं हो सका. साईबाबा 57 साल के थे. उनका निधन पित्ताशय की पथरी निकालने के बाद पैदा हुई जटिलताओं के कारण हुई – एक प्रक्रिया जो शायद ही कभी जानलेवा होती है. लेकिन साईबाबा सामान्य परिस्थितियों में ऑपरेशन थिएटर में नहीं गए थे.