राज्यसभा में केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह द्वारा डॉ. बीआर अंबेडकर पर की गई अपमानजनक टिप्पणियों के खिलाफ देश भर में व्यापक गुस्सा है. जगह-जगह विरोध हो रहे हैं. लेकिन न तो अमित शाह और न ही प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी किसी प्रकार की जिम्मेदारी लेने और उपचारात्मक कार्रवाई करने को तैयार हैं. इसलिए वाम दलों ने अमित शाह के इस्तीफे की मांग पर 30 दिसंबर को देशव्यापी विरोध-प्रदर्शन का निर्णय किया है.
बिहार में भाकपा(माले) के राज्य सचिव कुणाल, सीपीआई के राज्य सचिव रामनरेश पांडेय, सीपीएम के राज्य सचिव ललन चौधरी और एआइएफबी व आरएसपी के नेताओं ने 27 दिसंबर को प्रेस बयान जारी कर 30 दिसंबर को राज्य के सभी जिला मुख्यालयों पर संयुक्त रूप से विरोध कार्यक्रम आयोजित करने की घोषणा की है.
नेताओं ने कहा कि अमित शाह की टिप्पणी संविधान और बाबा साहब के प्रति भाजपा व आरएसएस की घृणा का प्रदर्शन है. मनुस्मृति को देश का संविधान बना देने की उनकी बेचौनी साफ तौर पर जाहिर हो रही है. लेकिन देश की जनता संविधान और बाबा साहब पर हो रहे हर हमले का जोरदार प्रतिवाद जारी रखेगी.
झारखंड में भी भाकपा(माले) राज्य सचिव का. मनोज भक्त, भाकपा राज्य सचिव महेन्द्र पाठक और माकपा राज्य सचिव प्रकाश विप्लव ने एक संयुक्त बयान जारी कर राज्य के प्रगतिशील-लोकतांत्रिक शक्तियों से अपील करती हैं कि संविधान निर्माता बाबा साहेब अंबेडकर के खिलाफ अमित शाह के जरिए अपमानजनक वक्तव्य के खिलाफ एकजुट होकर सड़कों पर निकलें.