कामरेड सीताराम येचुरी

कामरेड सीताराम येचुरी के निधन की खबर से गहरा सदमा पहुंचा है. इस महत्वपूर्ण मोड़ पर उनका निधन लोकतंत्र, संघीय ढांचे और बहुलतावादी सांस्कृतिक ताने-बाने की रक्षा के लिए लड़ रहे हर भारतीय के लिए एक बड़ा नुकसान है. उनके परिवार और सीपीएम के साथियों को गहरी संवेदनाएं.

कामरेड रवीन्द्र कुमार सिन्हा अमर रहें !

लखनऊ में भाकपा(माले) के वरिष्ठ सदस्य, मार्क्सवादी चिन्तक, जन संस्कृति मंच के राज्य पार्षद तथा लखनऊ इकाई के उपाध्यक्ष रवीन्द्र कुमार सिन्हा (आरके सिन्हा, 75 वर्ष) का विगत 27 अगस्त को मुजफ्फरपुर (बिहार) में उनके पैतृक आवास पर दिल का दौरा पड़ने से आकस्मिक निधन हो गया. पेशे से वे सिंचाई विभाग के वरिष्ठ अधिकारी पद से सेवानिवृत्त हुए थे. जीवन के प्रारंभिक दिनों से ही वामपंथ की ओर उनका झुकाव हो गया था. इससे वे मार्क्सवाद के गहरे अध्ययन की ओर उन्मुख हुए. इसी प्रक्रिया में वे भाकपा(माले) से जुड़े तथा नौजवानों और मजदूरों के बीच लगातार शिक्षण-प्रशिक्षण का काम किया.

पहली बरसी पर का. राजाराम की स्मृति में सभा आयोजित

जनता के तमाम मुद्दों पर जन पहलकदमी तेज करते हुए भाकपा(माले) को मजबूत बनाने और सांप्रदायिक फासीवादी व कारपोरेट परस्त भाजपा को शिकस्त देने का के संकल्प के साथ 1 सितम्बर 2024 को फतुहा (पटना जिला) में भाकपा(माले) के वरिष्ठ नेता और आइपीएफ के संस्थापक महासचिव कामरेड राजाराम को उनकी पहली बरसी पर याद किया गया.

श्रद्धांजलि: कामरेड प्रफुल्ल को लाल सलाम!

अखिल भारतीय किसान महासभा के बिहार राज्य पार्षद का. प्रफुल्ल पटेल (उम्र 65 वर्ष) का 31 अगस्त 2024 की सुबह 6 बजे असामयिक निधन हो गया.

नवादा जिले के काशीचक प्रखंड के हनुमान बिगहा गांव निवासी का. प्रफुल्ल का राजनीतिक जीवन अस्सी के दशक में शुरू हुआ. वे पटना के आशियाना नगर में रहते हुए भाकपा(माले) से जुड़े और कुछ ही दिनों बाद नालंदा जिले में एक पूर्णकालिक कार्यकर्ता के बतौर काम करने लगे. इस दौरान उन्होंने बिहार शरीफ पवार ग्रिड के खिलाफ किसानों के आंदोलन समेत कई बड़े आंदोलनों का नेतृत्व किया और उन्हें जीत की मंजिल तक पहुंचाया.

उत्तर प्रदेश : 52वें शहादत दिवस पर याद किये गए का. चारु मजूमदार

28 जुलाई 2024 को उत्तर प्रदेश के विभिन्न जिलों में कमेटियों व ब्रांच स्तरों पर ध्वजारोहण कर पार्टी के संस्थापक महासचिव कामरेड चारु मजूमदार को श्रद्धांजलि दी गई और भाकपा(माले) के पुनर्गठन की 50वीं वर्षगांठ मनाई गई. इस अवसर पर केन्द्रीय कमेटी के आह्वान पत्र को पढ़कर उस पर अमल करने का संकल्प लिया गया.

का. डीपी बक्शी का स्मृति दिवस मनाया गया

26 जुलाई 2024 को बिहार और झारखंड में कई जगहों पर भाकपा(माले) के पूर्व पोलित ब्यूरो सदस्य और पार्टी के पुनर्गठन के दौर के नेतृत्वकारी नेताओं में शुमार का. डीपी बक्शी का स्मृति दिवस मनाया गया.

कामरेड गोपाल सिंह का पहला स्मृति दिवस मनाया गया

‘फासीवादी निजाम को निर्णायक शिकस्त देने के लिए भाकपा(माले) का विस्तार करो’ के नारे के साथ 13 जुलाई 2024 को बिहटा (पटना) में कामरेड गोपाल सिंह के पहले स्मृति दिवस पर श्रद्धांजलि सभा आयोजित हुई.

भाकपा(माले) के बिहटा प्रखंड सचिव सुरेंद्र प्रसाद यादव की अध्यक्षता औी फुलवारी के विधायक गोपाल रविदास के संचालन मं संपन्न हुई सभा की शुरुआत नेताओं द्वारा कामरेड गोपाल सिंह के तैल चित्र पर पुष्पांजलि अर्पित करने और उनकी याद में 2 मिनट का मौन रखकर शोक श्रद्धांजलि देने के साथ हुई.

कामरेड शिवानी वर्मा को लाल सलाम!

14 फरवरी 2024 को कानपुर के मधुराज नर्सिंग होम में कामरेड शिवानी वर्मा का निधन हो गया। 29 जनवरी 2024 को वह निमोनिया से बीमार हुईं और उन्हें मधुराज नर्सिंग होम में भर्ती कराया गया, परंतु निरंतर उनकी तबीयत बिगड़ती गई. तमाम उपचार के बाद भी उनकी तबीयत में सुधार नहीं हुआ और उनके गुर्दे आदि ने भी काम करना बंद कर दिया। 14 पफरवरी को दिन में लगभग 3 बजे उन्होंने अस्पताल में ही अंतिम सांस ली।

श्रद्धांजलि: कामरेड बृजलाल को लाल सलाम

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गोरखपुर में जिनके घर से पार्टी की शुरुआत हुई, वे का.बृजलाल जी अब नहीं रहे. 16 सितंबर 2023 को 85 वर्ष की उम्र में उन्होंने अंतिम सांस ली. जब तक रहे, नराइचपार और आसपास छोटे बड़े हर संघर्ष/कार्यक्रम में जरुर शामिल रहते और क्रांतिकारी गीत सुनाते. एक तरह से कार्यक्रम की शुरुआत ही उनके गीत से होती.

का. राजाराम की स्मृति में श्रद्धांजलि सभा: जुटे महागठबंधन के सभी घटक

राजाराम के संघर्षों से संकल्प लेने का वक्त, मिलकर हरायेंगे फासीवाद को

भाकपा(माले) के वरिष्ठ नेता, आईपीएफ के संस्थापक महासचिव व पीयूसीएल की बिहार राज्य कार्यकारिणी के सदस्य का. राजाराम की स्मृति में 14 सितंबर 2023 को पटना स्थित जगजीवन संस्थान में आयोजित संकल्प सभा में महागठबंधन के सभी घटक दलों के प्रतिनिधियों सहित नागरिक आंदोलनों की प्रमुख हस्तियों और आईपीएफ के जमाने में राजाराम जी के कई सहयोगियों ने भागीदारी की और उनके संघर्षों को याद करते हुए फासीवाद की मुकम्मल हार सुनिश्चित करने का संकल्प लिया.