वर्ष - 28
अंक - 49
23-11-2019

भाकपा(माले) का 12वां भोजपुर जिला सम्मेलन पीरो (का. रामनरेश राम नगर) में नगर भवन (का. फागू सिंह सभागार) में 14-15 नवम्बर 2019 को सम्पन्न हुआ. प्रतिनिधि सम्मेलन में सम्मेलन में पूरे जिले से 475 प्रतिनिधियों ने भाग लिया. निवर्तमान जिला सचिव का. जवाहरलाल सिंह ने पिछले दो वर्षों के कामकाज की रिपोर्ट पेश की, जिस पर 30 प्रतिनिधियों ने जमकर बहस की. रिपोर्ट में भोजपुर में किसान-मजदूर, छात्र-नौजवानों, गरीब-दलित, अतिपिछड़ा, अल्पसंख्यकों की एक मजबूत एकता पर आधारित पार्टी बनाने के लिए संघर्ष करने और ‘एकजुट रहो, मुकाबला करो’ नारे के तहत पार्टी को और आगे बढ़ाने पर बात हुई. रिपोर्ट पारित होने के बाद सम्मेलन से 53 सदस्यों की जिला कमेटी का चुनाव हुआ जिसने कामरेड जवाहर लाल सिंह को पुनः भोजपुर भाकपा(माले) का जिला सचिव चुना.

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सम्मेलन में मुख्य अतिथि के बतौर बोलते हुए पार्टी महासचिव का. दीपंकर भट्टाचार्य ने कहा कि भारत में सबसे प्रमुख सवाल आर्थिक मंदी है. अब तक 45 वर्षों का बेरोजगारी का रिकार्ड टूटा था. अब 40 वर्षों में पहली बार खर्च इतना गिर गसा है. महंगाई बढ़ने के बाद क्रय शक्ति घटी. इस अर्थव्यवस्था में महंगाई का हल करने के लिए हमने मांग की है कि 1.76 लाख करोड़ रुपया जो आरबीआई से लिया गया है उसे कारपोरेटों को देने के बजाय आम लोगों की पेंशन बढ़ाने, छात्र-नौजवानों को रोजगार देने के लिए दिया जाए. पेंशन जो पहले 500 रु. थी उसे कम से कम 3000 रु. किया जाए। चुनाव के पहले मोदी सरकार किसानों से वादा किया था कि उन्हें 6000 रु. देंगे, उसे भी बढ़ाकर 10000 रु. किया जाए. मनरेगा में कम से कम 200 दिनों का और 500 रु. प्रतिदिन मजदूरी किया जाए. लोगों की मजदूरी बढ़ेगी तभी क्रय शक्ति बढ़ेगी.

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अयोध्या फैसले पर उन्होंने कहा कि जो तथ्य और तर्क का आधार है 1949 में मूर्ति रखना, और 1992 में मस्जिद गिराना, दोनों के आधार पर फैसला सही नहीं हुआ। अगर 27 वर्ष के बाद भी बाबरी मस्जिद गिराने के अपराधियों को कठोर सजा नहीं दी गई तो इन विध्वंसकारियों का मनोबल और बढ़ेगा. उन्होंने कहा कि भोजपुर में सामंती-अपराधी ताकतों का मनोबल बढ़ा है. हमारे कार्यकर्ताओं की हत्या हो रही हैं. बिहार में दंगा भी हो रहा है. मुख्यमंत्री नीतीश खुद को दलितों-अल्पसंख्यकों का हिमायती बताते हैं लेकिन भाजपा के दबाव में कारवाई से बच रहे हैं. उन्होंने कदवंन जलाशय के निर्माण की मांग की और सासाराम में छात्र-नौजवानों पर हुई पुलिसिया कार्रवाई की निंदा की.

सम्मेलन के अंत में 9-सूत्री राजनीतिक संकल्प लिया गया और कारपोरेट परस्त आर्थिक नीतियों के खिलाफ 10 ट्रेड यूनियनों की 8 जनवरी की हड़ताल को सफल बनाने की अपील की गई. के सम्मेलन मंच को का. भुअर-हरेंद्र-उदय मंच का नाम दिया गया था.

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– चंदन कुमार