मोदी सरकार ने अपनी पहली पारी के दौरान आर्थिक मोर्चे पर अपनी यात्रा की शुरूआत योजना आयोग को भंग करके की थी. विध्वंस और तोड़-फोड़ के इसी अभियान को लगातार जारी रखते हुए मोदी सरकार ने नोटबंदी जैसा कदम उठाया, जिसने अपनी कीमत आर्थिक तबाही के रूप में वसूल ली. इसी क्रम में रिजर्व बैंक ऑफ इंडिया से उसकी स्वायत्तता छीन ली गई, सरकार ने मनमाने ढंग से एक अधकचरा,....
लगातार दूसरी बार जीतकर सत्ता में आने के बाद लगता है कि मोदी सरकार अपने कुछेक पसंदीदा खयालात को अमली जामा पहनाने में हड़बड़ी से जुट गई है. अगर आर्थिक एजेन्डा में उनकी सर्वोच्च प्राथमिकता है निजीकरण और श्रम-कानूनों में संशोधन, तो मौजूदा घड़ी पर उनको जो सर्वप्रमुख राजनीतिक सनक चढ़ी है वह है “एक राष्ट्र-एक चुनाव”. मोदी सरकार ने अपने पहले कार्यकाल में भी इस विचार को थोपने की....
रांची में विगत 9 जुलाई को वाम दलों ने विभिन्न जनमुद्दों को लेकर शहीद चैक से राजभवन तक प्रतिवाद मार्च निकाला. झमाझम हो रही बारिश के बीच सैकड़ों लोग शहीद चैक पर जमा हुए और...
निरसा-जुनकुदर-झारखंड जेनरल मजदूर युनियन के बैनर तले 8 जुलाई को 6-सूत्री मांगों के साथ बीसीसीएल एरिया-12 के लायकडीह कैम्प कार्यालय पर एकदिवसीय धरना-प्रदर्शन किया गया. बीसीसीएल एरिया-12 के प्रबंधक, कोलवाशरी प्रबंधक व सद्भाव आउटसोर्सिंग प्रबंधक...
सीतापुर जिले में सदर तहसील के नगर पंचायत हरगांव में हरगांव चीनी मिल प्रबंधन ने चार गरीब परिवारों की जमीन पर अवैध रूप से कब्जा जमा लिया था. इसे हटवाने के लिए विगत 5 जून...
‘चारु मजुमदार भारतीय कम्युनिस्ट आंदोलन के समूचे इतिहास में पहले और एकमात्र कम्युनिस्ट नेता थे, जिन्होंने भारतीय क्रांति की सजीव तस्वीर पेश की थी, और इस महानायक के पीछे जैसे जादू के जोर से खींची...