वर्ष - 32
अंक - 24
10-06-2023

सोन नहरी क्षेत्रों के आठ जिलों के किसान महासभा राज्य पार्षदों की एकदिवसीय बैठक विगत 6 जून 2023 को अरवल जिला मुख्यालय स्थित सांस्कृतिक भवन में आयोजित हुई. बैठक में मुख्यतः सोन नदी पर कदवन डैम निर्माण करने और सोन नहरों के आधुनिकीकरण की मांग पर जोरदार आंदोलन छेड़ने पर चर्चा की गई. बैठक में किसान महासभा के महासचिव राजाराम सिंह, राज्य सचिव रामाधार सिंह, अरवल विधायक महानंद सिंह, किसान महासभा के भोजपुर जिला सचिव व पूर्व विधायक चंद्रदीप सिंह, एआइपीएफ के संयोजक कमलेश शर्मा, कृपानारायण सिंह, विनोद कुशवाहा सहित क्षेत्रा के सभी राज्य पार्षद उपस्थित रहे.

बैठक की शुरूआत से पहले पार्टी के वरिष्ठ नेता व पूर्व राज्य सचिव का. रामजतन शर्मा के दूसरी बरसी पर उन्हें याद किया गया और उनकी तस्वीर पर माल्यार्पण कर श्रद्धांजलि दी गई साथ ही उड़ीसा के बालासोर में हुए ट्रेन हादसे में मृतकों के प्रति भी शोक जताया गया. उपस्थित सभी सदस्यों ने कदवन डैम निर्माण के आंदोलन की रूपरेखा पर विस्तृत चर्चा की. सदस्यों ने कहा कि सोन नदी मात्र बरसाती नदी बनकर रह गई है. वर्षा का पानी का उपयोग नही होता है और पानी बह जाता है. क्षेत्र में डैम निर्माण के लिए किसानों की बड़ी गोलबंदी की संभावना दिख रही है. लोगो में नहरों के प्रति भरोसा टूट रहा है क्योंकि बहुत बड़े इलाके को पानी नहीं मिल पाता है.

बैठक को संबोधित करते हुए किसान महासभा महासचिव का. राजाराम सिंह ने कहा कि अब डैम निर्माण की लड़ाई आर-पार की होगी. सभी सदस्य गांवों में बड़ी गोलबंदी की तरफ बढ़ें. सोन नदी क्षेत्रों के सभी सांसदों और विधायकों से इस सवाल पर घेराबंदी की जाए. लोगो से यह अपील हो कि कोइ भी जन प्रतिनिधि हों, जो इस सवाल की अनदेखी करेगा, उसे जनता बर्दाश्त नही करेगी. इस इलाके में 1860 के दशक में अग्रेजों ने नहरें बनाकर हरा-भरा बनाया था लेकिन किसानो के हितों के प्रति सरकारें आज गंभीर नहीं है. उन्होंने कहा कि जल संसाधन मंत्रालय की जगह पर जो जल शक्ति मंत्रालय बनाया गया है, वह शक्तिहीन है. सरकार की मंशा साफ झलक रही है कि वह सिंचाई क्षेत्र को अब कारपोरेट घरानों को सौंपना चाह रही है.

राज्य सचिव रामाधार सिंह ने कहा कि डैम निर्माण के सवाल पर राज्य और केंद्र सरकार मौन धारण कर चुकी है. किसी भी स्तर पर कोई बातचीत नहीं हो रही है. केंद्रीय जल आयोग भी मौन साधे हुए है. हमें राज्य सरकार पर दबाव बनाना चाहिए कि केंद्र सरकार से बातचीत करे. जब उत्तर प्रदेश व झारखंड की आपत्तियों के मद्देनजर केंद्र सरकार क्षतिपूर्ति करे ताकि डैम निर्माण में कोई अड़चन न आये. गढ़वा जिले (झारखंड) के जिन 2800 परिवारों के बेघर हो जाने का खतरा है उनको केंद्र सरकार पुनर्वास, रोजगार या अन्य सहायता देकर क्षतिपूर्ति कर सकती है और इस बड़े मांग को पूरा किया जा सकता है.

– बिनोद कुशवाहा