यह घटना जिला मुख्यालय संत कबीर नगर से 12 किमी दूर की है. होली के दिन 14 मार्च को सामंती दबंगों द्वारा कर्री गांव के गरीब राजभर परिवार के 21 घरों को आग के हवाले कर दिया था और शारीरिक हमले किये थे, जिसमें घायल दो लोग अभी भी गोरखपुर मेडिकल कालेज में जीवन-मरण से जूझ रहे हैं.
इस घटना के बाद भाकपा(माले) के छह सदस्यीय जांच दल ने संत कबीर नगर के कर्री गांव का दौरा किया. जांच दल का नेतृत्व पार्टी की राज्य समिति के सदस्य राजेश साहनी ने किया. महुली थाना क्षेत्र के कर्री गांव में मंगलवार (18 मार्च) को जांच दल के पहुंचते ही पूरी बस्ती की महिला, पुरुष एवं बच्चे एक जगह जुट गए और दल के सदस्यों को सिलसिलेवार बातें बताईं. निर्मला, रेशमा, रिंकी, प्रियंका, चंद्रभान, विवेक व पवन ने जांच दल को बताया कि होली के दिन राजभर बस्ती के लड़के डीजे बजा रहे थे. उसी समय गांव के पूजन राय, गोपाल राय सहित पंद्रह-बीस की संख्या में भूमिहार बिरादरी के नशे में धुत्त लोग आए और अश्लील गीत बजाने के लिए लड़कों पर जबरन दबाव बनाने लगे. राजभर लड़कों ने डीजे बंद कर दिया और अश्लील गीत बजाने से इंकार कर दिया. इससे गुस्साए इन लोगों ने डंडों-लाठियों से मारना-पीटना शुरू कर दिया और घरों में घुसकर गाली गलौज करने लगे. जब महिलाओं ने इसका विरोध किया तो वे उग्र हो गए. ये हमलावर बस्ती से बिल्कुल सटे जय प्रकाश यादव की छत पर चढ़कर राजभर लोगों के घरों पर ईंट-पत्थर चलाने लगे. पीड़ित लोगों ने बताया कि जय प्रकाश यादव, जो खुद खलिहान की जमीन पर कब्जा कर पक्का घर बना लिए हैं, राजभर बस्ती से खुन्नस रखते हैं. उन्होंने ही हमलावरों को डीजल व माचिस उपलब्ध कराई. हमले में महिलाओं, बच्चों सहित दर्जन भर लोग घायल हुए. संतराम (50, पुत्र स्व. चौथी) और अनिल (50, पुत्र स्व. काशी) मरणासन्न होकर मेडिकल कॉलेज अस्पताल में भर्ती हैं.
कौसूर व विवेक राजभर ने बताया कि लगभग 60 डिसमिल घुरगड्ढा की जमीन है, जो भूमिहार टोला के उत्तर सड़क के किनारे स्थित है. उस पर 21 राजभर परिवार 50 वर्षों से बसे हुए हैं. 15-20 वर्ष पूर्व तत्कालीन ग्राम प्रधान रामरेखा चौधरी ने डेढ़-डेढ़ कठ्ठा नाप कर प्रति परिवार को जमीन दी थी. जिन्हें जमीन मिली, उनमें राजभरों के अलावा प्रजापति, गौण व सुनार बिरादरी के एक-एक परिवार भी हैं. यह बात भूमिहार लोगों को रास नहीं आई. उन लोगों ने एसडीएम कोर्ट में इन बसे हुए परिवारों को हटाने के लिए मुकदमा कर दिया. परिवारों पर जुर्माना लगा और इन परिवारों ने जुर्माना जमा भी किया. इसकी रसीद अभी भी 5-7 लोगों के पास मौजूद है. जबकि राजभर बस्ती से सटे पूरब की तरफ एक बीघा कीमती बंजर भूमि पर दबंग भूमिहार लोग खुद कब्जा जमाये हुए हैं.
पीड़ितों ने बताया कि हमले के दिन दो-ढाई बजे मारपीट व आगजनी की सूचना देने के बाद भी 12 किलोमीटर दूर जिला मुख्यालय से एंबुलेंस, फायर ब्रिगेड व पुलिस की गाड़ी तब पहुंची, जब पूरी बस्ती जलकर राख हो गई. हमलावरों में से चार-पांच लोगों की गिरफ्तारी की बात बताई जा रही है, जिसकी पुष्टि नहीं हुई है. डीएम और एसपी अभी तक गांव में नहीं पहुंचे हैं. जिला प्रशासन की ओर से अभी तक कोई राहत सामग्री, खाद्यान्न, कपड़ा व दवा-इलाज के लिए पैसा नहीं दिया गया है. सरकार के मंत्री ओमप्रकाश राजभर ने कोरा आश्वासन व इलाज के लिए नाममात्र की राशि दी.
महिलाओं ने जांच दल से आशंका जताई कि अभी भी हमलावरों की ओर से दोबारा हमला हो सकता है. इस तरह की धमकियां दी जा रही हैं. भाकपा(माले) जांच दल ने मांग की है कि तत्काल जले हुए घरों को प्रधानमंत्री आवास देकर बनवाया जाए. उक्त जमीन पर बसे गरीब राजभर परिवारों को पट्टा देकर उसका कागज दिया जाए. प्रत्येक परिवार को पांच-पांच लाख रुपये मुआवजा दिया जाए. घायलों का निःशुल्क इलाज कराया जाए. सभी हमलावरों को गिरफ्तार कर सख्त सजा दी जाए. डीएम व एसपी को त्वरित कार्रवाई न करने व संवेदनहीनता के लिए दंडित किया जाए. प्रत्येक परिवार को छह माह के लिए राशन, कपड़ा सहित जीवनोपयोगी आवश्यक वस्तुएं मुफ्त दी जाएं.
जांच दल ने कहा कि कि विवाद के पीछे भूमिहार जाति के दबंगों द्वारा होली के दिन डीजे बजाने की फरमाईश तो एक बहाना था. घरों में आग लगाने का मकसद गरीबों को उजाड़कर जमीन कब्जाना है.
पीड़ितों ने बताया कि लगभग 50 बर्ष पहले उन लोगों (21 परिवारों) को तत्कालीन ग्राम प्रधान रामरेखा चौधरी ने नाप कर घुरगड्ढा की जमीन पर बसाया था. जिस पर गांव के भूमिहार बिरादरी के दबंगों की नजर थी,जो आज मनमाफिक भाजपा सरकार में पुनः बलवती हो गयी है.
पीड़ित और घायल महिलाओं ने बताया कि सभी राजभर परिवार भूमिहीन हैं, ज्यादातर लोग मजदूर हैं और आज भी हाईस्कूल से ऊपर पढ़ने वाला कोई नहीं है. पीड़ितों को आज भी उन्हीं लोगों के यहां मजदूरी करनी पड़ती है, जो उन्हें उजाड़ने में लगे हुए हैं.
जांच दल में भाकपा(माले) राज्य समिति के सदस्य राकेश सिंह (गोरखपुर जिला सचिव), रामलौट (बस्ती जिला प्रभारी), जिला टीम के सदस्य दीनदयाल यादव, नंदकुमार नाग व मोहम्मद रफीक भी शामिल थे.
उन्नाव में सदर कोतवाली क्षेत्र के कासिम नगर निवासी मोहम्मद शरीफ (उम्र करीब 48 वर्ष) सऊदी अरब में ड्राइविंग का काम करते थे और अभी रमजान की छुट्टी में घर आए थे. वे होली के दिन (14 मार्च 2025 को) स्थानीय रब्बानी मस्जिद से जुम्मे की नमाज पढ़ कर ऑटो से वापस आ रहे थे. वहां पर उपस्थित होली खेल रहे लोग जब ऑटो पर रंग डालने लगे, तो उन्होंने मना किया. वे लोग गाली-गलौज करने लगे और उनको ऑटो से उतारकर बीच सड़क पर लात-घूंसो से मारने लगे जिससे उनकी मृत्यु हो गई. कुछ नामजद और अन्य अज्ञात के खिलाफ रिपोर्ट दर्ज है, किंतु किसी गिरफ्तारी की सूचना नहीं है. परिजन दोषियों की गिरफ्तारी और सजा की मांग कर रहे हैं, जबकि पुलिस कह रही है कि पोस्टमार्टम रिपोर्ट के अनुसार मो. शरीफ की मौत हार्ट अटैक से हुई है. घर वाले पुलिस के.वक्तव्य का कड़ा विरोध कर रहे हैं. उनका कहना है कि पुलिस झूठ बोल रही है.
राज्यव्यापी प्रतिवाद : भाकपा(माले) के राज्य सचिव सुधाकर यादव ने 19 मार्च, बुधवार को लखनऊ में इस घटना की जांच रिपोर्ट को जारी करते हुए कहा कि संत कबीर नगर और उन्नाव में घटित घटनओं के खिलाफ भाकपा(माले) 21 मार्च को राज्यव्यापी प्रतिवाद दिवस मनाने की घोषणा की.
उन्होंने कहा – योगी सरकार में दबंगों को खुली छूट है. कानून के राज की जगह सामंतों व दबंगों का राज चल रहा है. सत्ता संरक्षण से हौसला पाकर प्रभावशाली जाति के मनबढू़ दबंगों के जुल्म का शिकार होकर बीस परिवार सड़क पर आ गए, जिनका सब कुछ स्वाहा हो गया और न छत बची है, न अन्न का दाना. घायलों के इलाज कराने के भी पैसे नहीं हैं.’
‘...यह विडंबना ही है कि जिस जिले में होली के दिन इतनी बड़ी घटना हुई, उस जिले के डीएम व एसपी कानून व्यवस्था की सलामती पर होली के अगले दिन संगीत की धुन पर नृत्य करते पाये जाते हैं. बगल के जिले गोरखपुर में सूबे के मुखिया मुख्यमंत्री यूपी में उपद्रवविहीन होली बताकर खुद की पीठ थपथपाते हुए पश्चिम बंगाल की मुख्यमंत्री पर ऐसा न होने का तोहमत मढ़ते हैं. सरकार के बड़बोले मंत्री संत कबीर नगर में घटना स्थल का दौरा कर पीड़ितों को न्याय दिलाने के बजाय मामले पर लीपापोती करने, सरकार का बचाव करने और विपक्ष पर हमला करने में अधिक रुचि दिखाते हैं. वहीं पुलिस के मुखिया (डीजीपी) योगी सरकार में कानून व्यवस्था की भूरि-भूरि प्रशंसा करते हैं.’
मांगें : जन परिवारों के घर जले हैं, उनका अविलंब पुनर्वास किया जाए और उन्हें सुरक्षा मुहैया कराई जाए. उन्हें पक्के घर बनाकर दिए जाएं और उनके नुकसान की भरपाई की जाए. घायलों का समुचित व मुफ्त इलाज हो और हमलावरों को कठोर सजा दी जाए. लापरवाही के लिए डीएम, एसपी के खिलाफ कार्रवाई हो. दबंगई पर कड़ाई से रोक लगे और नागरिकों के लिए सुरक्षित माहौल बनाया जाए. उन्नाव मामले की उच्च स्तरीय न्यायिक जांच कराई जाए. परिजनों के आरोप व पुलिस के वक्तव्य में भारी अंतर होने के कारण उनके शव का डॉक्टरों के पैनल से दोबारा पोस्टमार्टम कराया जाए और उसकी वीडियोग्राफी की जाए. दोषियों को गिरफ्तार कर कड़ी से कड़ी सजा दी जाए. शोकाकुल परिवार को न्याय, मुआवजा व एक सदस्य को सरकारी नौकरी दी जाए.
राज्यव्यापी प्रतिवाद दिवस का पालन करते हुए राजधानी लखनऊ में परिवर्तन चौकसे जिलाधिकारी कार्यालय तक प्रदर्शन हुआ. अशेध्या, बलिया, चंदौली, वाराणसी, मिर्जापुर, मऊ, जालौन और प्रयागराज में भी विरोध प्रदर्शन आयोजित हुए. इन प्रदर्शनों में सौकड़ो लोग शामिल रहे.
13 मार्च 2025 (होलिका दहन का दिन) को सवर्ण सामंती ताकतों ने वर्चस्व कायम रखने के उद्देश्य से पिछड़े समुदाय के ऑटो चालक लालन यादव, प्रेम कुमार यादव और प्रेमजीत यादव पर अंधाधुंध गोलियां चलाईं. यह घटना प्रशासन की मौजूदगी में घटी, जिसमें लालन यादव की मौके पर ही मौत हो गई, जबकि प्रेम कुमार और प्रेमजीत गंभीर रूप से घायल हो गए.
घायलों को तत्काल पटना एम्स में भर्ती कराया गया, जहां इलाज के बाद वे स्वस्थ होकर आज अपने घर लौटे. हालांकि, घटना के कई दिन बीत जाने के बावजूद, सामंती अपराधी अब भी पुलिस की गिरफ्त से बाहर हैं, जिससे गांव में भय और तनाव का माहौल बना हुआ है.
19 मार्च 2025 को भाकपा(माले) की 5 सदस्यीय जांच टीम ने छोटी टंगरैला गांव का दौरा किया और इस घटना की विस्तृत जानकारी प्राप्त की. जांच टीम का नेतृत्व फुलवारी विधायक गोपाल रविदास, पालीगंज विधायक संदीप सौरभ और अन्य नेताओं ने की.
जांच दल से मुलाकात के दौरान पीड़ित परिवारों ने न्याय की गुहार लगाई. भाकपा(माले) की जांच टीम ने इस घटना की घोर निंदा करते हुए मांग की है कि मृतक ललन यादव के परिवार को 10 लाख रुपये का मुआवजा दिया जाए, उनके छोटे-छोटे बच्चों की शिक्षा और भरण-पोषण की जिम्मेदारी सरकार उठाए, घायलों को उचित मुआवजा देने और समुचित इलाज की गारंटी दी जाए और अपराधियों को जल्द से जल्द गिरफ्तार किया जाए.
विधायक गोपाल रविदास ने कहा कि बिहार में सामंती ताकतों को भाजपा सरकार से संरक्षण मिल रहा है, जिसके कारण वे बेखौफ होकर ऐसी घटनाओं को अंजाम दे रहे हैं. ‘डबल इंजन’ की सरकार सामंती ताकतों पर लगाम लगाने में पूरी तरह विफल साबित हुई है.
संदीप सौरभ ने नौबतपुर के छोटी टंगरैला, संपतचक के भीलवाड़ा, दुल्हिन बाजार के सीरी और औरंगाबाद जिले जैसी घटनाओं का जिक्र करते हुए कहा कि यह बिहार में बढ़ते सामंती आतंक का प्रमाण है. भाकपा(माले) इस अन्याय के खिलाफ निर्णायक लड़ाई लड़ेगी और पीड़ितों को न्याय दिलाने के लिए हर संभव कदम उठाएगी.
होलिका दहन के दिन ही औरंगाबाद नगर थाना के पासवान टोली में लोजपा(आर) के पूर्व जिलाध्यक्ष और रफीगंज विधानसभा क्षेत्र से प्रत्याशी मनोज सिंह और उनके परिजनों ने जानबूझकर अपनी गाड़ी से तेरह वर्षीय कोमल कुमारी (पिता-विनय पासवान) की कुचलकर मार डाला.
घटना 14 मार्च 2025 की करीब 2-3 बजे दिन की है. कोमल और उसकी बड़ी बहन स्वीटी कुमारी (22 वर्ष, ग्रेजुएट की छात्रा) होली की छुट्टियों में अपनी नानी घर आई थीं और घर के पास होली खेल रही थीं. मनोज सिंह का घर बिल्कुल सामने पड़ता है. उसके घर का पीछे का गेट मृतक की नानी के घर की ओर खुलता है. उसी दौरान मनोज सिंह और उसके बेटे रंजय कुमार ऊर्फ सन्नी और भाई विनोद सिंह ने उन लड़कियों को जातिसूचक गालियां देना शुरू किया और फिर अपनी गाड़ी निकालकर सामने नहा रही लड़कियों पर चढ़ा दी. इसमें कोमल की मौत हो गई और स्वीटी कुमारी समेत दो अन्य लड़कियां घायल हो गईं.
इस घटना में प्राथमिकी दर्ज होने के बाद भी 19 मार्च तक एक भी गिरफ्तारी नहीं हुई थी. भाकपा(माले) के एक प्रतिनिधिमंडल ने 19 मार्च को घटना स्थल का दौरा किया और मामले की जानकारी ली. जांच टीम में भाकपा(माले) की विधान पार्षद शशि यादव, घोषी के विधायक रामबली सिंह यादव, गया जिला सचिव निरंजन कुमार, औरंगाबाद जिला सचिव मुनारिक राम तथा अन्य साथी शामिल थे.भाकपा(माले) की जांच टीम ने इस घटना को लेकर सामंती मानसिकता और सत्ता के दबदबे को जिम्मेदार ठहराया है. पुलिस प्रशासन ने घटना को दुर्घटना बताकर उसे दबाने की कोशिश शुरू कर दी थी.
इस मामले को लेकर विधानसभा में भी जोरदार विरोध दर्ज किया गया. भाकपा(माले) की पहलकदमी के बाद आये सरकारी बयान के मुताबिक हत्याकांड का एक आरोपी सन्नी सिंह को गिरफ्तार किया गया है, लेकिन अभी भी मुख्य अभियुक्त मनोज सिंह गिरफ्तारी नहीं हुआ है. सरकार या तो अपराधियों को संरक्षण दे रही है अथवा कार्रवाई में घोर लापरवाही बरत रही है. उन्होंने कहा कि यह घटना साबित करती है कि भाजपा और पूरा एनडीए गठबंधन दलितों व महिलाओं का घोर विरोधी है. ऐसा लगता है कि राज्य में सरकार नाम की कोई चीज नहीं रह गई है.
17 मार्च 2025, सोमवार को शिवाजी जयंती के अवसर पर विश्व हिंदू परिषद और वजरंग दल समर्थकों ने नागपुर में हिंसा की वारदात को अंजाम दिया. ये दंगाई औरंगाबाद के खुलताबाद में मौजूद मुगल सम्राट औरंगजेब की कब्र को हटाने की मांग कर रहे थे. लेकर हिंसा की ये घटनायें नागपुर स्थित आरएसएस मुख्यालय से दो किमी दूरी पर स्थित महाल गेट, शिवाजी मूर्ति चौक के पड़ोस के इलाकों हंसापुरी व मालदारपुरा में घटित हुई, जहां कई मुस्लिम बस्तियां हैं. औरंगाबाद में भी हिंसा व दंगा की वारदातों को अंजाम देनेकी कोशिश हुई, किंतु लोगों ने इसे नकार दिया.
नागपूर एक शांत शहर है. यहां दलितों और मुसलमानों की बडी आबादी है जो आपस में भाईचारा रखती हैं. हिन्दुत्ववादियों के लिए उन दोनों को आपस में लड़ाना संभव नही है. दलितों को सबक सिखाने के उद्देश्य से कुछ समय पहले परभणी में पुलिस ने काम्बिंग ऑपरेशन चलाया था जिसमें सोमनाथ सूर्यवंशी नाम के एक दलित को पुलिस कस्टडी में ही मार डाला गया था तथा दलितों और महिलाओं को बुरी तरह पीटा गया था. इसलिए हिंदुत्ववादी ताकतें हर वक्त दो समुदायों, मराठों और मुस्लिमों के बीच नफरत को मजबूत करने और उनको आपस में लड़ाने में लगी रहती हैं.
स्थानीय लोगों ने बताया कि इन हिंसक घटनाओं के दौरान इस्लाम धर्म के पवित्र कलमा को जलाया गया. मुस्लिम समुदाय के लोगों ने विरोध जताते हुए स्थानीय पुलिस स्टेशन से इस मामले में हस्तक्षेप करने और इसे रोकने की मांग की लेकिन पुलिस कोई कार्रवाई नहीं की.
सरकारी संरक्षण में विश्व हिंदू परिषद और वजरंग दल ने उन बस्तियों को अपना निशाना बनाया और बेरोकटोक हिंसा का तांडव रचा. इन दंगों से बडे पैमाने पर संपत्तियों का नुकसान हुआ है. इन घटनाओं के बाद 150 से ज्यादा लोगो को गिरफ्तार किया गया है.
महाराष्ट्र के मुख्यमंत्री ने इस दंगे को रोकने और दोनों समुदायों से अमन-चैन व शांति के साथ रहने की अपील करने के बजाय यह कहकर आग में घी डालने का ही काम किया क यह दुर्भाग्यपूर्ण है कि सरकार को औरंगजेब के मकबरे की सुरक्षा की जिम्मेदारी लेनी पड़ रही है, एक तरफ जहां महाराष्ट्र का युवा वर्ग बेकारी और मंहंगाई की मार से परेशान है वहीं दूसरी तरफ सरकार उन्हें रोजगार देने के बजाय नफरत की दीवारें खड़ी कर रही है.
भाकपा(माले) ने गिरफ्तार किये गये निर्दोष लोगों को तुरंत रिहा करने और घटना की जांच के लिए विपक्षी पार्टियों की भागीदारी वाली निष्पक्ष जांच कमिटी गठित करने की मांग की है. पार्टी ने मांग की है कि सरकार दंगा के शिकार लोगों के नुकसान की भरपाई करे और पूरे महाराष्ट्र में अमन-चैन स्थापित करने की गारंटी करे.