वर्ष - 34
अंक - 7
04-04-2025

24 मार्च 2025 को चास-वास जीवन बचाओ बागमती संघर्ष मोर्चा ने पटना के गर्दनीबाग धरनास्थल पर जोरदार प्रदर्शन किया, जिसमें बड़ी संख्या में लोग शामिल हुए. इस प्रदर्शन में मोर्चा के नेता और स्थानीय लोग बागमती तटबंध निर्माण के खिलाफ आवाज उठा रहे थे. उनका कहना था कि रिव्यू कमिटी की रिपोर्ट आने से पहले इस निर्माण कार्य को फिर से शुरू करना जनता के साथ धोखा है.

बागमती तटबंध परियोजना, जो 50 साल से भी पुरानी है, पर कई बार सवाल उठ चुके हैं. जन आंदोलनों के दबाव में बिहार सरकार ने 2018 में एक रिव्यू कमिटी का गठन किया था, जिसका उद्देश्य तटबंध के औचित्य का पुनः मूल्यांकन करना था. रिव्यू कमिटी को एक महीने के भीतर अपनी रिपोर्ट देने का निर्देश था, लेकिन आज तक उसकी कोई बैठक नहीं हुई और न ही रिपोर्ट जारी हो पाई. इसके बावजूद बागमती तटबंध निर्माण के काम को फिर से शुरू कर दिया गया है.

प्रदर्शन में मोर्चा के संयोजक जितेंद्र यादव के नेतृत्व में भाकपा(माले) नेताओं – का. धीरेंद्र झा, मीना तिवारी, सिकटा विधायक वीरेंद्र गुप्ता, सूरज कुमार सिंह और  ठाकुर देवेंद्र सिंह, रामलोचन सिंह, नवल किशोर सिंह, जगरनाथ पासवान, रंजीत सिंह, अशोक कुमार, ललित राय, पतशुराम राय, मनोज कुमार यादव समेत कई नेताओं ने भाग लिया.

इस विरोध प्रदर्शन के दौरान न केवल बागमती तटबंध बल्कि सिकरहना और महानंदा नदी पर प्रस्तावित तटबंध निर्माण की योजना पर भी तत्काल रोक लगाने की मांग की गई. प्रदर्शनकारियों का कहना था कि यह तटबंध निर्माण योजनाएं न केवल बेमानी हैं, बल्कि इनसे क्षेत्र के किसान-मजदूरों व अन्य लोगों की आजीविका पर भी गंभीर असर पड़ेगा. सिकरहना नदी पर बांध बनाने के लिए जमीन अधिग्रहण का काम लगभग पूरा हो चुका है. इससे 250 से अधिक गांव जलमग्न हो सकते हैं. आंदोलन के दबाव में इस योजना को फिलहाल रोक दिया गया है. इसके अलावा, महानंदा नदी पर फेज 2 के तहत प्रस्तावित तटबंध बनने से पूर्णिया, कटिहार और किशनगंज जिलों के लगभग 200 गांवों में तबाही मच सकती है. इससे नदी के पारिस्थितिकी तंत्र को भी गंभीर नुकसान हो सकता है.

कहा कि तटबंधों का निर्माण इस क्षेत्र के प्राकृतिक संसाधनों और जीवन-यापन के तरीके पर गंभीर प्रभाव डालेगा. तटबंध बनाने के बजाय इस पैसे का उपयोग कटाव निरोधक कार्यों में किया जाना चाहिए, ताकि नदियों के कटाव से बचाव हो सके और बाढ़ की समस्या को भी नियंत्रित किया जा सके. सरकार को रिव्यू कमिटी की रिपोर्ट को आधार बनाते हुए ही तटबंध निर्माण पर कोई भी निर्णय लेना चाहिए. उन्होंने यह आरोप भी लगाया कि यह तटबंध परियोजनाएं न तो स्थानीय जनता की आवश्यकता को ध्यान में रखती हैं, न ही उनके हितों की रक्षा करती हैं. इसके पीछे इंजीनियरों, ठेकेदारों और कुछ नेताओं-अधिकारियों के व्यक्तिगत स्वार्थ हो सकते हैं, जो इस निर्माण कार्य से लाभ उठाना चाहते हैं.