गृहविहीन लोगों के लिए आवास के सवाल को लेकर भाकपा(माले) की चकाई प्रखंड कमेटी ने अक्टूबर, 2024 में एक सघन अभियान चलाया था. इस दौरान बोगी, बरमोरिया, चौपला, ठाढ़ि, रामसिंहडीह, माधोपुर घुटवे, पोझा, बामदह, कियाजोरी, डढ़वा, पेटरपहड़ी, कल्याणपुर, दुलमपुर गजही, फरियताडीह, सिल्फरी, परांची व चन्द्रमड़ी सहित अन्य पंचायतो में घर-घर सर्वे किया गया. सर्वे का काम पूरा होने के बाद 6 अक्टूबर 2024 को 796 परिवारों का आवेदन बीडीओ के पास जमा किया गया था और उसी दौरान 892 आवेदन अतिनिर्धन लोगो का 72 हजार से कम के आय प्रमाणपत्र बनाने के लिए सीओ के पास जमा कराया गया था.
बीडीओ ने यह कहा था कि जनवरी माह में प्रधानमंत्री आवास योजना का पोर्टल खुलते ही सभी आवेदनों की जांच पूरी कर सही पाये जाने पर आवास सूची में नाम जोड़ दिया जाएगा. लेकिन, दो महीने से अधिक समय बीत जाने पर भी उन्होंने कोई कदम नहीं उठाया. इन आवेदनों को दरकिनार कर आवास सूची में फर्जी नाम जोड़ते रहे. इस अंधेरगर्दी के खिलाफ गरीब लोगों के भारी गुस्से का गवाह बना 18 मार्च 2025 को चकाई प्रखंड मुख्यालय पर हुआ विशाल प्रदर्शन.
सैकड़ो की संख्या में जुटे लोगां ने बीडीओ के मुंह पर कालिख पोतने के ऐलान के साथ पार्टी कार्यालय से प्रखंड मुख्यालय तक प्रदर्शन निकाला. भाकपा(माले) के जिला सचिव का. शंभूशरण सिंह, चकाई प्रखंड सचिव मनोज कुमार पांडे, बाबू साहब सिंह, वासुदेव राय, कंचन रजक, वासुदेव हांसदा, कल्लू मरांडी, सलीम अंसारी, अजीम अंसारी और राज किशोर किस्कू ने प्रदर्शन का नेतृत्व किया.
झाझा के एसडीपीओ राजेश कुमार के नेतृत्व में प्रखंड कार्यालय पर जुटे भारी पुलिस बल को धत्ता बताते हुए प्रदर्शनकारियों ने कार्यालय को घेर लिया. बीडीओ और आवास पर्यवेक्षक दोनों ही वहां से गायब थे. प्रदर्शनकारी तीन घंटों तक डटकर नारेबाजी करते रहे. अंत में, अनुमंडलीय कार्यपालक दंडाधिकारी सुजीत सुमन ने उनसे वार्ता की और सभी 796 आवेदन को एक सप्ताह के अंदर जियो टैग करने और आवास के नाम पर घूस लेने वाले सहायक और आवास पर्यवेक्षक पर कानूनी कार्रवाई करने का आश्वासन दिया.