वर्ष - 31
अंक - 50
03-12-2022

भाकपा(माले) के पटना महानगर कमिटी के सदस्य और बांकीपुर एरिया सचिव कामरेड अशोक कुमार (55 वर्ष) का विगत 25 नवंबर 2022 की दोपहर कंकड़बाग,पटना के एक निजी अस्पताल में इलाज के दौरान निधन हो गया.

तेज बुखार के इलाज के लिए वे सुबह 11 बजे खुद ही अस्पताल पहुंचे थे और यह दुर्घटना इतनी अचानक हुई कि सब अवाक रह गए. उन्हें पहले से कोई गंभीर बीमारी नहीं थी इसलिए भी यह स्तब्ध कर देने वाली खबर थी.

आखिरी दिनों तक वे आगामी 15-20 फरवरी 2023 को पटना में आयोजित होनेवाले पार्टी महाधिवेशन के लिए घर-घर जाकर प्रचार व कोष संग्रह की योजना को लागू करने में लगे हुए थे और बांकीपुर एरिया में इसके लिए बनी की टीम का संचालन कर रहे थे.

उनका जन्म 16 नवंबर 1967 को सरैया बाजार, मखदुमपुर (जहानाबाद जिला) के एक भूमिहीन परिवार में हुआ था. मगध विश्वविद्यालय से 1991 में रसायनशास्त्र से स्नातक अशोक कुमार की स्कूली शिक्षा कदमकुआं, पटना स्थित स्टूडेंट साइंटिफिक उच्च विद्यालय से 1982 में पूरी हुई. अशोक जी ने पहली बार अरवल जनसंहार की घटना के बाद पटना में विधानसभा के समक्ष 1986 में हुए प्रदर्शन में हिस्सा लिया और एबीएसयू से आइसा बनने के संक्रमणकालीन दौर में अपने रामकृष्ण द्वारिका काॅलेज, कंकड़बाग के एक कार्यक्रम में पार्टी के छात्र संगठन से जुड़े. 1992 में कोलकाता पार्टी महाधिवेशन की तैयारी से पूर्ण रूपेण सक्रिय होते हुए वे पूर्णकालिक कार्यकर्ता बने. कंकड़बाग संगठन से जीवंत रूप से जुड़े कामरेड अशोक ने पना में शहरी गरीब मोर्चा को संगठित करने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई और आगे चल कर बांकीपुर एरिया में एक लोकप्रिय जननेता के बतौर स्थापित हुए.

का. अशोक अपने पीछे अपनी मां, छोटे भाई और दो बहनों के अलावा पत्नी और तीन बेटों को छोड़ गए हैं. पिता राम प्रसाद शर्मा का निधन पिछले साल कोरोना महामारी के दौरान हो गया था. वे सरकारी कर्मी थे और उनका भी जहानाबाद से ही पार्टी से जुड़ाव था.

कामरेड अशोक का पूरा जीवन पटना शहर में शहरी गरीबों, झुग्गी झोपड़ी वासियों को उजाड़ने के अभियान के खिलाफ संघर्ष को समर्पित रहा. राजेंद्र नगर सब्जी मंडी को बसाने और उनके अधिकारों के लिए लंबे संघर्ष की बात हो, लोहानीपुर में बसे मांझी समुदाय के लोगों को उजाड़ने से बचाने का मामला हो या मलाही पकड़ी में पटना मेट्रो के उजाड़ो अभियान के खिलाफ  झुग्गी झोपड़ी वासियों को बसाने का हालिया आंदोलन – सब में कामरेड अशोक की केंद्रीय भूमिका रही.

कंकड़बाग में पार्टी निर्माण के बाद जब सामाजिक दायरा बढ़ाने का दौर आया तब उनका मोहल्ला पूर्वी इंदिरा नगर ही मिसाल रहा. वहां बच्चियों से बलात्कार की कई घटनाओं और दहेज हत्या के खिलाफ दिसंबर 2004 में कंकड़बाग डीएसपी के  घेराव में अशोक व उनकी मां ने मुख्य भूमिका निभाते हुए मोहल्ले से करीब 200 से अधिक महिलाओं की गोलबंदी की. जल जमाव तथा नागरिक सुविधा बहाल करने की मांग के साथ निर्माण मजदूरों का कामकाज भी इसी इलाके से आगे बढ़ा और इन आंदोलनों में अशोक जी की मुख्य भूमिका रही. उनके मोहल्ले के उस वक्त के नौजवान बड़ी तादाद में पार्टी से जुड़े.

पटना में गरीबों के आंदोलनों में और पार्टी संगठन में शांत स्वभाव के गंभीर साथी अशोक कुमार की कमी लंबे समय तक महसूस की जाएगी.