वर्ष - 29
अंक - 41
03-10-2020

राजस्थन के डुंगरपुर जिले में आदिवासी क्षेत्रों में सामान्य श्रेणी के योग्यता धारी अभ्यर्थियों की अनुपलब्धता के कारण विगत दो सालों से रिक्त पड़े शिक्षकों के 1167 पदों को जनजाति समुदाय के योग्यता धारी बेरोजगार युवकों को नियुक्ति देकर भरने की मांग को लेकर 18 दिनों से काकरी-डूंगरी पर जयपुर-मुंबई हाईवे को जाम कर शांति पूर्ण आंदोलन चल रहा था. 25 सितंबर को वहां पहुंची पुलिस द्वारा एक साजिश के तहत हिंसा को उकसावा दिया गया. आंदोलनकारियों व पुलिस के बीच पत्थरबाजी शुरू हो गई. कई लोग, खासकर छात्रा घायल हुए, गिरफ्रतार हुए और उनपर झूठे मुकदमे बनाए गए.

भाकपा(माले) ने इसे दुर्भाग्यपूर्ण करार देते हुए इसके लिए राज्य सरकार की ढुलमुल रवैए और आदिवासी समाज के युवाओं के प्रति मुख्यमंत्री अशोक गहलोत की असंवेदनशीलता को जिम्मेदार करार दिया है. भाकपा(माले) के नेता का. गोतम लाल डामोर ने कहा कि आदिवासी समाज के बेरोजगार युवक पिछले दो साल से इन पदों को जनजाति के योग्य अभ्यर्थियों से भरने की मांग कर रहे थे. जब रिजर्व कैटेगरी में पदों के रिक्त पदों को सामान्य श्रेणी के योग्य अभ्यर्थियों से भरे जाने का आम नियम है तब सामान्य श्रेणी के रिक्त पदों को जनजाति समुदाय के योग्य अभ्यर्थियों से क्यों नहीं भरा जाना चाहिए? कांग्रेस और भाजपा नेतृत्व स्वर्ण समाज के दवाब में काम करता है. इस वजह से ही इनकी सरकारों का जनजाति समुदाय के प्रति यह भेदभावपूर्ण रवैया रहता आया है.

उदयपुर के जिला सचिव डा. चद्रदेव ओला ने कहा कि भाकपा(माले) आंदोलन में शुरू से ही शामिल रही है और जनजाति समुदाय के बेरोजगार छात्रों के साथ है. सरकार दमन बंद करे और छात्रों पर लगाये गये झूठे मुकदमे वापस ले.