यह अस्तित्व बचाने की लड़ाई है

वर्ष - 30
अंक - 7
13-02-2021


एआइपीएफ ने विगत 7 फरवरी 2021 को पटना के शहीद भगत सिंह चौक (गांधी मैदान) पर ‘किसान आंदोलन के साथ हमलोग’ कार्यक्रम आयोजित किया. भाकपा(माले) के पूर्व सांसद व वरिष्ठ वामपंथी नेता का. रामेश्वर प्रसाद ने अपने संबोधन के दौरान तीन कृषि कानूनों की चर्चा करते हुए कहा कि मोदी सरकार देश में लोकतंत्र को समाप्त करने पर अमादा है. किसानों का यह आंदोलन सिर्फ कृषि कानूनों के खिलाफ ही नहीं है, बल्कि लोकतंत्र, संविधान और देश बचाने के साथ ही, लोगों का अस्तित्व बचाने का भी संघर्ष है. आपदा की घड़ी में मोदी सरकार ने देश के सार्वजनिक प्रतिष्ठानों को पूंजीपतियों के हाथों बेचना शुरू कर दिया. हद तो तब हो गई जब रेल, एयरपोर्ट, अस्पताल आदि का निजीकरण करने के बाद खेती-किसानी को भी मोदी सरकार ने अंबानी-अडानी जैसे काॅरपोरेट घरानों को बेचने की तैयारी कर ली. जैसे-तैसे संसद से नया कृषि कानून पारित करवा दिया जिसके खिलाफ देश के किसान जीने-मरने की हद तक आंदोलन कर रहे हैं. जब अनाज उपजाने वाला ही नहीं बचेगा तो देश कैसे बचेगा?

उन्होंने कहा कि बिहार में ही स्वामी सहजानंद सरस्वती ने अंग्रेजों और जमींदारों से व्यापक संघर्ष कर खेती-किसानी को आजादी दिलाई थी. आज मोदी-नीतीश सरकार उसी गुलामी को वापस लाकर हमसे रोजी-रोटी छीन लेने पर अमादा है. अपनी रोजी-रोटी बचाने की खातिर यह जरूरी है कि हम किसान आंदोलन का समर्थन करें.

अखिल भारतीय किसान महासभा के बिहार राज्य अध्यक्ष विश्वेश्वर प्रसाद यादव और राज्य सह सचिव उमेश सिंह ने किसानों को देश की अर्थव्यवस्था की रीढ़ बताते हुए कहा कि लाॅकडाउन के दौरान जहां सारे उद्योग-धंधे बंद थे और सारा कारोबार ठप्प था, वैसे मुश्किल समय में इस देश के किसानों ने अर्थव्यवस्था को संभाले रखा. आज मोदी सरकार इन काले कृषि कानूनों के जरिए देश की जनता को भुखमरी की कगार पर पहुंचाना चाहती है.

कार्यक्रम में अपनी बात रखते हुए पर्यावरण कार्यकर्ता रणजीव, नागेश आनंद व अफजल हुसैन ने किसान आंदोलन को आज के समय में विश्व का सबसे बड़ा आंदोलन बताते हुए दो टूक शब्दों में कहा कि यह लड़ाई खाना देने वालों और खाना लूटने वालों के बीच की लड़ाई है जिसमें हमें अपना पक्ष तय करना है.

भाकपा(माले) के युवा नेता कुमार परवेज़, इंसाफ मंच के मुश्ताक राहत, आस्मां खान व अफ्रशां जबीं ने सीधे शब्दों में कहा कि जनता के द्वारा चुनकर आई यह सरकार जैसी नीतियां ले आई है उससे साफ हो गया है कि यह जनतांत्रिक नहीं, जनविरोधी सरकार है.

कार्यक्रम का संचालन करते हुए एआइपीएफ से जुड़े सामाजिक कार्यकर्ता गालिब ने कहा कि यह हम सबकी लड़ाई है जिसे साथ मिलकर लड़ना होगा. ‘कोरस’ की संयोजक समता राय ने इस दौरान जनगीतों की प्रस्तुति दी. मौके पर डाॅ. अलीम अख्तर, नसीम अंसारी, अनय मेहता, मुर्तजा अली, पन्नालाल सिंह, अशोक कुमार, रामकल्याण सिंह, ऐक्टू के जीतेंद्र कुमार, इंकलाबी नौजवान सभा के विनय कुमार, विजय कुमार, पुनीत, विक्रांत, संजय यादव, रंगकर्मी मृगांक, रिया अंतरा, आदि कई लोग मौजूद थे.