(ऐक्टू के 11 वें राष्ट्रीय सम्मेलन का उद्घाटन वक्तव्य)
जो बिरसा मुंडा ने कहा, ‘अबुआ दिशुम, अबुआ राज’ (अपने देश में अपना हक, अपना राज) वही वह आवाज है, जो 1857 से लेकर 1949 में जब देश में संविधान पारित हुआ और 1950 में जब रिपब्लिक की स्थापना हुई, तब भी गूंजी. आज इस आवाज को और ज्यादा बुलंद करने की जरूरत है, क्योंकि हमारे देश में आज एक ऐसी सरकार है जो इस देश के मजदूर-किसानों – इस देश को बनाने वालों और इस देश को चलाने वालों, इस देश की आम-आवाम – सबके खिलाफ खड़ी है.