उत्तर प्रदेश में योगी आदित्यनाथ की सरकार ने नागरिकता संशोधन कानून-एनआरसी-एनपीआर के खिलाफ चल रहे शांतिपूर्ण लोकतांत्रिक विरोध को दबाने के लिए प्रत्येक लोकतांत्रिक आवाज एवं अल्पसंख्यक समुदाय के विरुद्ध चौतरफा हमला बोल दिया है.
अभी तक 20 से ज्यादा लोग पुलिस की हिंसा में मारे जा चुके हैं. यहां तक कि पुलिस थानों में नाबालिगों को यातनायें देने की चिंताजनक खबरें आ रही हैं. ऐसे वीडियो प्रमाण मिल रहे हैं जिनमें पुलिस मुस्लिमों को भद्दी साम्प्रदायिक गालियां और जान से मारने की धमकियां दे रही है, और उनके घरों में लूटपाट व तोड़फोड़ कर रही है. मुस्लिम समुदाय से बेगुनाहों को झूठे अपराधों में फंसाया जा रहा है. वाम दलों, मानवाधिकार संगठनों और विरोध में शामिल हो रहे आम नागरिकों को गिरफ्तार कर जेलों में डाला जा रहा है. वहां पुलिस जूलूस में शामिल निर्दोष लोगों और कार्यकर्ताओं के फोटो अखबारों में छाप कर ‘वान्टेड’ नोटिस जारी कर रही है. उत्तर प्रदेश के 21 जिलों में इण्टरनेट को बंद कर दिया गया है.
लगता है कि योगी सरकार किसी भी कीमत पर विरोध करने के जनता के संवैधानिक अधिकार को छीनना चाहती है, इसीलिए वह ऐसी दमनात्मक कार्रवाईयां कर रही है कि प्रदर्शन करने वालों को सबक सिखाया जा सके. प्रधानमंत्री मोदी ने लखनऊ में दिये वक्तव्य में उ.प्र. सरकार की इसी कार्यवाही को अपना समर्थन दिया है.
हम मांग करते हैं कि मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ तत्काल अपना पद छोड़ें, और सर्वोच्च न्यायालय उत्तर प्रदेश के हालात पर निष्पक्ष जांच कराने के लिए एक एस.आई.टी. का गठन करे, ताकि दोषी पुलिस कर्मियों व अन्य अधिकारियों को दण्डित किया जा सके.
हमारी सभी लोकतंत्र पसंद संगठनों एवं आम आवाम से अपील है कि उपरोक्त मांगों पर आगामी 30 दिसम्बर को देशव्यापी स्तर पर विरोध प्रदर्शनों को आयोजित करें एवं उनमें भागीदारी करें.
- केन्द्रीय कमेटी, भाकपा-माले