सीवान में कैडर कन्वेंशन

देश मे बढ़ती तानाशाही के खिलाफ कोलकाता में भाकपा(माले) द्वारा आयोजित हो रहे जनकन्वेंशन को सफल बनाने के लिए विगत 14 जुलाई को सिवान में एक जिलास्तरीीय कैडर कन्वेंशन आयोजित हुआ. कन्वेंशन को भाकपा(माले) पोलित ब्यूरो के सदस्य का धीरेन्द्र झा, जिला सचिव का. नैमुद्दीन अंसारी, पूर्व विधायक अमरनाथ यादव और विधायक सत्यदेव राम आदि समेत कई नेताओं ने संबोधित किया.

प्रखंड सम्मेलन संपन्न हुआ

12 जुलाई को पटना जिले के दुल्हिन बाजार के सामुदायिक भवन (का. भीम सभागार) में का 13वां प्रखंड सम्मेलन संपन्न हुआ. सम्मेलन की शुरूआत पार्टी के वरिष्ठ नेता का. रामजीवन पासवान के हाथों झंडोतोलन से हुई.

सुबह की लालिमा के साथ बेहतर दिन के लिए जद्दोजहद करता नेपाल

मैंने नेपाल की राजशाही के खिलाफ चले नेपाली जनता के ‘लोकतंत्र बहाली आन्दोलन’ को नजदीक से देखा था. भीषण दमन के उस दौर में नेपाली कम्युनिस्टों के नेतृत्व का एक हिस्सा भूमिगत स्थितियों में भारत में प्रवासी नेपालियों को संगठित कर आन्दोलन चलाता व नए-नए कार्यकर्ता तैयार करता था. मैं उस दौर में अपने संगठन भाकपा(माले) की तरफ से उनके समर्थन में दिल्ली और फरीदाबाद में आयोजित रैलियों में शामिल होता रहा हूं. अब जब मैं 9-13 मार्च 2019 तक नेपाल में किसान संगठनों के अंतर्राष्ट्रीय सम्मलेन में हिस्सा लेने काठामांडू गया, तो आज के नेपाल को जानने-समझने की मुझमें काफी उत्सुकता थी.

काठमांडू में अन्तर्राष्ट्रीय सम्मेलन ‘खाद्य संप्रभुता और किसान अधिकार’

नेपाल के राष्ट्रीय किसान आयोग द्वारा विगत 10-11 मार्च को काठमांडू में दो दिन के अन्तर्राष्ट्रीय सम्मेलन का आयोजन किया गया. सम्मेलन का विषय था - ‘खाद्य संप्रभुता और किसान अधिकार’. नेपाल के प्रधानमंत्री का. केपी ओली सम्मेलन के उद्घाटन सत्रा में मुख्य अतिथि थे. सत्रा की अध्यक्षता राष्ट्रीय किसान आयोग के अध्यक्ष का.  चित्रा बहादुर ने की. सम्मेलन में नेपाल, भारत, पाकिस्तान, बंग्लादेश, श्रीलंका, उत्तर कोरिया, फिलीपींस, मलेशिया, इंडोनेशिया आदि देशों के किसान संगठनों के प्रतिनिधियों ने भाग लिया. भारत से अखिल भारतीय किसान महासभा की ओर से राष्ट्रीय सचिव का.

भारतीय कृषि के सम्मुख चुनौतियां

नेपाल के राष्ट्रीय किसान आयोग द्वारा विगत 10-11 मार्च को काठमांडू में ‘खाद्य संप्रभुता और किसान अधिकार’.विषय पर आयोजित अन्तर्राष्ट्रीय सम्मेलन में अखिल भारतीय किसान महासभा के राष्ट्रीय सचिव का. का. पुरुषोत्तम शर्मा द्वारा प्रस्तुत पर्चा

 जीडीपी में कृषि का हिस्सा

भारत जब 1947 में आजाद हुआ तो उस वक्त हमारी जीडीपी में कृषि का हिस्सा 52 प्रतिशत था. हमारी आबादी का 70 प्रतिशत हिस्सा तब सीधे कृषि से जुड़ा था. जबकि आज भी हमारी आबादी का 55 प्रतिशत हिस्सा कृषि से सीधे जुड़ा है और जीडीपी में कृषि का हिस्सा लगभग 14 प्रतिशत बचा है.

आइसा का 9वां राज्य सम्मेलन सफलतापूर्वक सम्पन्न

ऑल इंडिया स्टूडेंट्स एसोसिएशन (आइसा) का उत्तर प्रदेश 9 वां राज्य सम्मेलन 3 मार्च को इलाहाबाद में सम्पन्न हुआ. सम्मलेन में नवनिर्वाचित 21 सदस्यों की कार्यकारिणी चुनी गई. जिसने सर्वसम्मति से शिव रजवार को राज्य सचिव तथा शैलेश पासवान को राज्य अध्यक्ष चुना गया. अन्य पदाधिकारियों में नितिन राज, शक्ति रजवार को उपाध्यक्ष व शिवानी जायसवाल, विवेक कुमार सिंह को सह-सचिव चुना गया.

आरवाइए का गिरिडीह जिला सम्मेलन

इंकलाबी नौजवान सभा का पहला गिरीडीह जिला सम्मेलन राजधनवार में पूरे उत्साह के साथ संपन्न हुआ. सम्मेलन के पहले जिले के अलग-अलग प्रखण्डों से आये एक हजार से अधिक नौजवानों ने धनवार में ‘जुमला नहीं जवाब दो, पांच साल का हिसाब दो’ और ‘नफरत नहीं अधिकार चाहिए, शिक्षा और रोजगार चाहिए’ तथा ‘छात्रा-नौजवान विरोधी भाजपा की झारखण्ड सरकार गद्दी छोड़ो’ के नारे के साथ रैली निकाली जो बस स्टैंड से शुरू होकर समूचे बाजार में चली. रैली के समापन पर इंकलाबी नौजवान सभा के केंद्रीय नेताओं ने संविधान निर्माता डा. भीमराव अंबेडकर की मूर्ति पर माल्यार्पण किया.

इंसाफ मंच का दूसरा बिहार राज्य सम्मेलन

विगत 2 मार्च को इंसाफ मंच का दूसरा बिहार राज्य सम्मेलन सिवान के डा. भीम राव अम्बेडकर पार्क में संपन्न हुआ. सम्मेलन का उद्घाटन करते हुए भाकपा(माले) महासचिव का. दीपंकर भट्टाचार्य ने कहा कि इंसाफ की लड़ाई में जीत हासिल करने के लिए हर तरह की कुर्बानी देनी पड़ती है. हम कोई भी कुर्बानी देने को तैयार हैं और इंसाफ हासिल करके ही दम लेंगे. हम रोजी-रोटी और तालीम की बात करते हैं, लेकिन यह भी तभी मिल पायेगा जब देश में लोकतंत्र, संविधान और जनता का अधिकार सुरक्षित रहेगा.

भारत की जनता का घोषणा पत्रः हमें 99 प्रतिशत नागरिकों का भारत चाहिये -1 प्रतिशत का हरगिज नहीं

28 फरवरी को एआईपीएफ द्वारा प्रेस क्लब ऑफ इंडिया में आगामी लोकसभा चुनावों में जनता के वास्तविक सवालों को सामने लाने के लिए नागरिक घोषणापत्र जारी किया गया.

हमें सत्ता के समक्ष सच बोलने का जोखिम उठाना होगा

’बिहार प्रोविंशियल किसान सभा 1929-1942, (ए स्टडी ऑफ इंडियन पीजेंट मूवमेंट)’

लोकार्पण समारोह में का. दीपंकर ने कहा

हमें सत्ता के समक्ष सच बोलने का जोखिम उठाना होगा

पार्टी महासचिव का. दीपंकर भट्टाचार्य ने विगत 2 मार्च को पटना के तारामंडल सभागार में वाल्टर हाउजर द्वारा लिखित ‘बिहार प्रोविंशियल किसान सभा 1929-1942, (ए स्टडी ऑफ इंडियन पीजेंट मूवमेंट) नामक किताब के लोकार्पण समारोह को संबोधित किया. यह समारोह चिंताहरण सोशल डेवलपमेंट ट्रस्ट द्वारा आयोजित था. लोकार्पण समारोह में शहर के बुद्धिजीवी बड़ी संख्या में मौजूद थे.