मोदी शासन के बढ़ते हमले के साथ ही किसान आन्दोलन मजबूत होता जा रहा है!


भारत के गणतंत्र दिवस के मौके पर किसानों के ट्रैक्टर परेड में दिल्ली की सड़कों पर लाखों किसानों की भागीदारी हुई जो कृषि-विरोधी तीनों कानूनों की वापसी की मांग कर रहे थे. दिल्ली निवासियों ने अपनी बाहें खोलकर उनका अभिनंदन किया. बहरहाल, मोदी हुकूमत ने लाल किले में इससे बिल्कुल अलग-थलग हुई एक घटना (ऐसी घटना जिसमें खुद सरकार द्वारा प्रायोजित होने के तमाम निशानियां मिलती हैं) का इस्तेमाल करते हुए किसान आन्दोलन पर चौतरफा दमन शुरू कर दिया.

ट्रंप का असफल तख्तपलट प्रयास और भारत के लिए सबक


अमेरिकी लोग (तत्कालीन) राष्ट्रपति ट्रंप के असफल तख्तपलट प्रयासों के बाद की घटनाओं से अभी तक निपट ही रहे हैं, और इसी के साथ समूची दुनिया के लिए चेतावनी की घंटी बज रही है कि वैश्विक पूंजीवाद के बढ़ते संकट के साथ-साथ संसदीय लोकतंत्र पर खतरा भी सर्वत्र मंडराने लगा है – खासकर तब, जबकि वैश्विक महामारी लगातार दूसरे वर्ष दुनिया को अपनी चपेट में लेने को तैयार है.