अमेरिकी लोग (तत्कालीन) राष्ट्रपति ट्रंप के असफल तख्तपलट प्रयासों के बाद की घटनाओं से अभी तक निपट ही रहे हैं, और इसी के साथ समूची दुनिया के लिए चेतावनी की घंटी बज रही है कि वैश्विक पूंजीवाद के बढ़ते संकट के साथ-साथ संसदीय लोकतंत्र पर खतरा भी सर्वत्र मंडराने लगा है – खासकर तब, जबकि वैश्विक महामारी लगातार दूसरे वर्ष दुनिया को अपनी चपेट में लेने को तैयार है.