का. सीडी डिमरी को लाल सलाम

कामरेड सीडी डिमरी का 9 अगस्त को एस्काॅर्ट अस्पताल में निधन हो गया. वे 85 वर्ष के थे और उन्हें सांस लेने में दिक्कत की वजह से उसी सुबह अस्पताल में भर्ती किया गया था. डनहें पिछले कुछ वर्षों से ष्वास संबंधी समस्या हो रही थी, जिस वजह से वे अधिकतर समय अपने घर में ही रहा करते थे.

श्रद्धांजलि : कामरेड सत्यनारायण सिंह

भारतीय कम्युनिस्ट पार्टी के बिहार राज्य सचिव कामरेड सत्यनारायण सिंह का विगत 2 अगस्त 2020 को पटना के एम्स अस्पताल में हो गया. उनके निधन पर शोक व्यक्त करते हुए भाकपा(माले) ने 3 अगस्त को पूर्वघोषित कार्यक्रम कश्मीर एकजुटता दिवस के कार्यक्रम को पूरे बिहार में स्थगित कर दिया और विभिन्न स्थानों पर उन्हें शोक श्रद्धांजलि दी. कामरेड सत्यनाराण सिंह को लाल सलाम!

कामरेड बुद्ध और भाकपा(माले)

10 जुलाई को मैसूर में कामरेड बुद्ध (मरिदंडैया) का ब्रेन ट्यूमर से निधन हो गया. भाकपा(माले) उन्हें सलाम करती है और उनकी स्मृति में अपना लाल झंडा झुकाती है.

कामरेड बुद्ध ने 1990-दशक के अंत में कर्नाटक से लोकसभा चुनाव लड़ा था. वे न केवल कर्नाटक से लोकसभा चुनाव लड़ने वाले भाकपा(माले) के पहले उम्मीदवार थे, बल्कि पहले व्यक्ति थे जिन्होंने पार्टी का लाल शाॅल लेकर पूरा चुनाव लड़ा. उसके बाद, यह लाल शाॅल कुलकों और धनी किसानों के हरे शाॅल के खिलाफ गरीब किसानों और खेत मजदूरों के लाल आन्दोलन की पहचान बन गया.

श्रद्धांजलि

का. गुड्डु पासवान भोजपुर जिले के उदवंतनगर थाना के एड़ौरा गांव के रहने वाले थे. लम्बे समय से उनके परिवार और कमलेश ओझा के परिवार के बीच सीलिंग से फाजिल जमीन को लेकर विवाद चल रहा था, जो 11 जुलाई 2020 को रोपनी को लेकर मारपीट में बदल गया. इसी बीच गुड्डू पासवान को पैर में गोली लग गई. उनको आरा सदर अस्पताल से रेफर कर देने के बाद पीएमसीएच ले जाया गया. अधिक खून बह जाने के कारण उनकी मृत्यु हो गई. इसके खिलाफ 14 जुलाई को पूरे जिले में प्रतिरोध दिवस मनाया जाएगा.

बुंडू (रांची) में शहीद परमेश्वर सिंह मुंडा शहादत दिवस

झारखंड के रांची जिले में पाँचपरगना किसान आंदोलन के नेता शहीद परमेश्वर सिंह मुण्डा के 31वें शहादत दिवस 4 जुलाई 2020 को भाकपा(माले) ने संकल्प दिवस के रूप में मनाया. लाॅकडाउन की वजह से बुण्डू (काॅलेज मोड़) स्थित प्रतिमा में माल्यार्पण व नुक्कड़ सभा ही हो सकी. फिर शहीद कामरेड परमेश्वर सिंह मुंडा के पैतृक गाँव हुमटा में एक संकल्प सभा का आयोजन किया गया. साथ ही राहे प्रखंड के इडिसेरेंग में भी शहीद कामरेड परमेश्वर सिंह मुंडा को याद किया गया. हुमटा में पंचायत स्तरीय गोलबंदी की गयी. शहीद साथी की प्रतिमा पर माल्यार्पण और दो मिनट का मौन धारण कर श्रद्धांजलि दी गई.

बथानी टोला – ख्वाब कभी मरते नहीं

आज (11 जुलाई 2020 को) बथानी टोला जनसंहार के चौबीस साल हो गये.

1996 में उस नृशंस कत्लेआम के लगभग एक माह बाद मैं बथानी टोला गया था और वहां से लेखकों और संस्कृतिकर्मियों के नाम बथानी टोला की गरीब-मेहनतकश जनता द्वारा हस्ताक्षरित एक अपील लेकर आया था. लेकिन कई बड़े लेखकों ने जिस तरह जनता का साथ देने के बजाय सम्मान और पुरस्कार का पक्ष लिया था और उसके पक्ष में तर्क दिया था, उसे मैं कभी नहीं भूल पाया. जिन कुतर्कों के साथ सारे गुनाहगार रिहा कर दिये गये, उन्हें भी भूल पाना संभव नहीं है.

श्रद्धांजलि: रंगकर्मी उषा गांगुली, कवि महेन्द्र भटनागर, अभिनेता इरफान और ऋषि कपूर

कोविड-19 महामारी से जूझ रहे देश में महज आठ दिनों के भीतर कला जगत की चार हस्तियों का निधन भारत की प्रगतिशील-यथार्थवादी और जनप्रिय सांस्कृतिक धारा के लिए अपूरणीय क्षति है. ये चारों जनता के पक्षधर थे, सांप्रदायिक कट्टरता के विरोधी थे, इस देश के सामाजिक ताने-बाने को नष्ट करने वाली शक्तियों के विरोधी थे.

श्रद्धांजलि: कामरेड अखिलानंद पांडेय

उत्तर प्रदेश में भाकपा(माले) के वरिष्ठतम कार्यकर्ताओं में से एक मऊ जनपद के कामरेड अखिलानंद पांडेय का 23 अप्रैल को निधन हो गया. वह लगभग 87 वर्ष के थे. कामरेड अखिलानंद पांडेय सन 1952 से ही कम्युनिस्ट आंदोलन से जुड़ गए थे. बाद में नौकरी में गये किन्तु सरकारी नौकरी में रहते हुए भी कम्युनिस्ट पार्टी और आंदोलन में सक्रिय रहे. 90 के दशक में जब मऊ जनपद में भाकपा(माले) के कामकाज की शुरुआत हुई तो उन्होंने सोचने में एक पल भी नहीं लगाया और पार्टी से जुड़ गए. तब से लेकर आज अंतिम सांस लेने तक वे न केवल पार्टी के सदस्य रहे बल्कि हर गतिविधि में सक्रिय तौर पर शामिल रहे.

साथी राजकुमार को लाल सलाम!

रोहतक (हरियाणा) में अस्थमा की गंभीर बिमारी के ईलाज के लिए अपनी बेटी यहां पहुंचे का. राजकुमार प्रसाद (72 वर्ष) का 19 अप्रैल 2020 की सुबह निधन हो गया. बिहार में लखीसराय निवासी का. राजकुमार पुराने मुंगेर जिले में भाकपा(माले) के संस्थापक नेताओं में एक थे.

डाक्टर श्याम बिहारी राय

10 मार्च 2020 को हिंदी प्रकाशन की दुनिया में सामाजिक विज्ञान के अनन्य प्रकाशन ग्रंथशिल्पी के संचालक डा. श्याम बिहारी राय की सक्रियता पर विराम लग गया. उनका समूचा जीवन सादगी और संकल्प का साक्षात उदाहरण था. सोवियत संघ के पतन के बाद के दौर में, जब चारों ओर ‘इतिहास के अंत’ और ‘मार्क्सवाद की असफता’ का बाजार गर्म था, श्याम बिहारी राय ने हिंदी में मार्क्सवादी चिंतन की सैद्धांतिक किताबों के अनुवाद छापने का जोखिम भरा काम अपने जिम्मे लिया जिसे उन्होंने आजीवन जारी रखा.