कामरेड गणेश पासवान


कर्मठ मजदूर नेता कामरेड गणेश पासवान (उम्र-65 वर्ष) ने भागलपुर (बिहार) के भीखनपुर स्थित अपने किराए के कमरे में विगत 29 दिसंबर 2020 की सुबह करीब 6 बजे अतिम सांस ली. उनके निधन की खबर से मजदूर कतारों में शोक की गहरी लहर दौड़ गई. सैकड़ों मजदूरों ने उनके निवास स्थान पर पहुंच कर अपना दुख जताया.

का. आरती देवी


नालंदा ज़िला की कर्मठ, प्रतिबद्ध और जुझारू महिला नेत्री का. आरती देवी का इलाज के लिए पीएमसीएच पटना ले जाने के क्रम में 27 दिसंबर 2020 की शाम 5 बजे निधन हो गया. वे पिछले कुछ महीनों से बीमार थीं. अगले दिन 11 बजे बांस घाट, पटना में उन्हें अंतिम विदाई दी गई.

पूर्व कर्मचारी नेता कामरेड अनिल लकड़ा की याद में शोक सभा


बिहार राज्य अराजपत्रित कर्मचारी महासंघ (गोपगुट) के पूर्व नेता कामरेड अनिल लकड़ा (काडा विभाग के सेवानिवृत्त कर्मचारी) का असामयिक निधन बीते 12 दिसम्बर 2020 को हो गया. कर्मचारी महासंघ (गोप गुट) और एक्टू द्वारा स्थानीय संयुक्त भवन परिसर में उनकी श्रद्धांजलि सभा आयोजित गई. उनके तस्वीर पर पुष्पांजलि देकर दो मिनट के मौन का पालन किया गया और उनके संघर्ष को और अधिक मजबूत करने का संकल्प लिया गया.

शहीद किसानों को श्रद्धांजलि दी : आंदोलन को तेज करने का संकल्प दुहराया


भाकपा(माले) और अखिल भारतीय किसान महासभा ने विगत 20 दिसंबर 2020 को तीन कृषि कानूनों के खिलाफ दिल्ली सीमा पर चल रहे किसान आंदोलन में शहीद हो चुके लगभग तीन दर्जन किसानों की स्मृति में पूरे देश में श्रद्धांजलि सभाओं का आयोजन किया. यह कार्यक्रम अखिल भारतीय किसान संघर्ष समन्वय समिति (एआईकेएससीसी) के देशव्यापी आह्वान पर किया गया.

देश भर में हुए संकल्प दिवस आयोजन


18 दिसंबर 2020 को भाकपा(माले) के पूर्व महासचिव कामरेड विनोद मिश्र की 22वीं बरसी ‘संकल्प दिवस’ के रूप में उत्तर प्रदेश के विभिन्न जिलों में मनाई गई. इस मौके पर हाल के बिहार विधान सभा चुनाव में पार्टी को मिली शानदार उपलब्धियों को आगे बढ़ाने, दिल्ली के गिर्द जारी किसान आंदोलन के संदेश को यूपी के गांवों तक पहुंचाने और मोदी सरकार के फासीवादी खतरे का डटकर मुकाबला करने का संकल्प लिया गया.

कामरेड त्रिदिव घोष: एक सतत योद्धा को सलाम!


कामरेड त्रिदिव घोष (82 वर्ष) का विगत 15 दिसंबर 2020 को रांची के बरियातु स्थित रामप्यारी अस्पताल में निधन हो गया. कोरोना से संक्रमित होने के कारण वे अपनी पत्नी व महिला नेत्री मालंच घोष के साथ ही पिछले कुछ दिनों से यहां भर्ती थे. वे इससे पूरी तरह ठीक भी हो चुके थे लेकिन अस्पताल से विदा होने के एक दिन पहले शाम 4.30 बजे अचानक पड़े दिल के दौरे ने उनकी जान ले ली.

मंगलेश डबराल : राजनीतिक चेतना और मानवीय आभा से दीप्त कवि का जाना


– प्रियदर्शन   

‘पहाड़ों की यातनाएं हमारे पीछे हैं, मैदानों की हमारे आगे.’ जर्मन कवि बर्ताल्त ब्रेख्त की यह काव्य पंक्ति मंगलेश डबराल को बहुत प्रिय थी और अक्सर वे इसे दोहराया करते थे. ऐसा लगता था जैसे पहाड़ों पर न रह पाने और मैदानों को न सह पाने का जो अनकहा दुख है, उसमें ये पंक्तियां उन्हें कोई दिलासा देती हों.

मंगलेश डबराल की कविताएं


संगतकार

मुख्य गायक के चट्टान जैसे भारी स्वर का साथ देती
वह आवाज सुंदर कमजोर कांपती हुई थी
वह मुख्य गायक का छोटा भाई है
या उसका शिष्य
या पैदल चलकर सीखने आने वाला दूर का कोई रिश्तेदार
मुख्य गायक की गरज में
वह अपनी गूंज मिलाता आया है प्राचीन काल से
गायक जब अंतरे की जटिल तानों के जंगल में
खो चुका होता है
या अपने ही सरगम को लांघकर
चला जाता है भटकता हुआ एक अनहद में
तब संगतकार ही स्थाई को संभाले रहता है
जैसे समेटता हो मुख्य गायक का पीछे छूटा हुआ सामान
जैसे उसे याद दिलाता हो उसका बचपन