योगी सरकार में हमले बढ़े

योगी सरकार में पुलिस बेलगाम हो गई है जिसके चलते मानवाधिकारों पर हमले बढ़े हैं. झांसी जिले में युवक की एनकाउंटर में हत्या और बदायूं जिले में बिजली बकायेदार की हिरासत में मौत जैसी हाल की घटनाएं इसका गवाह हैं.

उम्भा कांड: योगी का चेहरा उजागर

सोनभद्र के उम्भा कांड में दूसरे पक्ष पर मुकदमा लिखने के स्थानीय अदालत के निर्देश पर निराशाजलक है. इसके लिए योगी सरकार पूर्णतः जिम्मेदार है. यह दिखाता है कि भाजपा और उसकी सरकार वास्तव में किसके साथ खड़ी है. उन्नाव कांड से लेकर चिन्मयानंद प्रकरण और उम्भा कांड तक में वह आतताइयों के साथ खड़ी दिखती है, भले ही दिखावा कुछ और करती हो। गांधी जयंती पर उ.प्र. विधानसभा का विशेष सत्र बुला कर महात्मा गांधी को याद करना भाजपा सरकार का ढकोसला है. उसकी कार्रवाइयां हत्यारों और बलात्कारियों को संरक्षण देने की हैं.

गहराते आर्थिक संकट और जनता की बढ़ती बदहाली के खिलाफ वाम दलों का अखिल भारतीय प्रतिवाद

पांच वामपंथी पार्टियों – भाकपा(माले)-लिबरेशन, सीपीआई(एम), सीपीआई, ऑल इंडिया फारवर्ड ब्लाॅक (एआईएफबी) और रिवोल्यूशनरी सोशलिस्ट पार्टी (आरएसपी) ने दिल्ली में बैठक करके 16 सितम्बर 2019 को निम्नलिखित बयान जारी किया है. बयान पर भाकपा(माले)-लिबरेशन के महासचिव दीपंकर भट्टाचार्य, सीपीआई(एम) के महासचिव सीताराम येचुरी, सीपीआई के महासचिव डी. राजा, एआईएफबी के महासचिव देवब्रत बिश्वास और आरसीपीआई के महासचिव क्षिति गोस्वामी के हस्ताक्षर हैं.

भोजपुर : भाजपा राज-2 में शांतिपूर्ण सभा पर प्रतिबंध की शुरुआत

– कुणाल, राज्य सचिव, भाकपा(माले)

विगत 20 अगस्त 2019 को शहीद का. सतीश यादव की शहादत की चौथी बरसी पर बड़गांव में श्रद्धांजलि सभा रखी गई थी. सभा में व्यवधान डालने या फिर उसे नहीं होने देने की नीयत से बड़गांव निवासी भाजपा नेता और अपराधी रिंकू सिंह ने 20 अगस्त को ही जेपी सिंह की श्रद्धांजलि सभा की घोषणा कर दी. जेपी सिंह की श्रद्धांजलि सभा भी उसने वहीं रखी जहां हम सभा करने वाले थे. एक तथ्य जान लीजिए. जिस दिन का. सतीश यादव की हत्या की गई, उसी दिन से ही बड़गांव निवासी जेपी सिंह लापता है.

यह अघोषित इमरजेंसी नहीं तो क्या है?

मोदी सरकार ने सबसे पहले मानवाधिकार कार्यकर्ताओं को निशाना बनाया. ‘अर्बन नक्सल’ का दुष्प्रचार करके कई लोगों को जेल में बंद कर दिया. उसके बाद जम्मू-कश्मीर की राजनीति के मुख्यधारा के कई नेताओं को घर में नजरबंद कर दिया गया. अब देश की मुख्य विपक्षी पार्टी के मुख्य नेता को टारगेट किया जा रहा है. ये सारे लक्षण बतलाते हैं कि देश आज पूरी तरह से अघोषित आपातकाल के दौर से गुजर रहा है, जो देश के लोकतंत्र व संविधान के लिए बेहद खतरनाक है.

दीपंकर भट्टाचार्य, महासचिव, भाकपा(माले)

मोदी-शाह-योगी शासन बलात्कार पीड़ितों के लिए आपातकाल

मोदी-शाह और योगी राज में, भाजपा शासन में, बलात्कार पीड़ितों के लिए न्याय वैसे ही चकनाचूर पड़ा है, जैसे उन्नाव के बलात्कार पीड़िता की गाड़ी जिसे ट्रक ने मार दिया.

उन्नाव की लड़की, जिसने भाजपा विधायक कुलदीप सिंह सेंगर पर सामूहिक बलात्कार का आरोप लगाया था, आज गम्भीर रूप से घायल है. उल्टे रास्ते से आता हुआ ट्रक, जिसके नंबर प्लेट पर कालिख पोता हुआ था, उसकी गाड़ी से टकराया. इस ‘हादसे’ में पीड़िता के दो रिश्तेदार मारे गए, और वह खुद, और उसके वकील, घायल हैं.

यह घटना हादसा नहीं, हमला मालूम होता है.

उ.प्र. में सामाजिक कार्यकर्ताओं की गिरफ्तारी की निंदा

आल इंडिया पीपुल्स फोरम (एआइपीएफ) उत्तर प्रदेश में अपने संघटक रिहाई मंच के मो. शोएब, राजीव यादव एवं समाजिक कार्यकर्ता संदीप पांडेय, आईआईटी मुंबई के पूर्व प्रोफेसर राम पुनियानी सहित सभी गिरफ्तार साथियों की उ.प्र. पुलिस द्वारा पुनः गिरफ्तारी की कड़ी भर्त्सना करता है और मांग करता है कि तत्काल गिरफ्तार साथियों को रिहा किया जाए.