संसद पर हमले और पुलवामा हमले की पुनः जांच हो आतंकी दविंदर सिंह को संरक्षण किसने दिया और क्यों?

दविन्दर सिंह आला पुलिस अफसर हैं. आतंकियों को कश्मीर से दिल्ली लाते हुए पकड़े गए. जम्मू-कश्मीर पुलिस ने कहा वे आतंकवादी हैं. अब एनआइए को उनका मसला सौंप दिया गया – सबूत मिटाने, उनके तार कहां जा के जुड़ते हैं, उसे ढंकने?

ऐसी क्या बात है कि दविन्दर की जहां-जहां पोस्टिंग हुई, वहां आतंकी हमले होते गए – 2017 में शोपियां, 2019 में पुलवामा? अफजल गुरु की प्रताड़ना इन्होंने की, ये तो खुद स्वीकार किए हैं. अफजल ने कहा था कि इन्हीं के कहने पर वे एक शख्स को दिल्ली ले गए, गाड़ी और किराए का मकान दिलाए.

ऐतिहासिक अखिल भारतीय हड़ताल पर भाकपा-माले ने देश की जनता को बधाई दी

मोदी सरकार की जन-विरोधी, मजदूर-विरोधाी नीतियों तथा भारत के संविधान व लोकतंत्र पर लगातार हमलों के खिलाफ अत्यंत सफल अखिल भारतीय आम हड़ताल में अपना एकजुट संकल्प प्रदर्शित करने के लिए भाकपा(माले) भारत की जनता, और खासतौर पर मजदूर वर्ग को बधाई देती है. इस आम हड़ताल के जरिए देश के मजदूर तबकों ने मोदी सरकार को चेतावनी दी है कि वह भारतीय जनता के संवैधानिक मौलिक अधिकारों पर हमला करने तथा पिछली सदी में विभिन्न कानूनों के जरिए गारंटी किए गए तमाम किस्म के सामाजिक सुरक्षा प्रावधानों से जनता के अनेक तबकों को वंचित करने से बाज आए.

ईरान पर अमेरिकी युद्ध का विरोध करो

भाकपा(माले) ईरानी जनरल कासिम सुलेमानी की हत्या, जिसके लिए अमेरिकी राष्घ्ट्रपति ट्रम्प ने व्घ्यक्तिगत तौर पर जिम्मेदारी ली है, की कड़ी भर्त्सना करती है. पाॅपुलर मोबिलाइजेशन फोर्सेज (ईरान समर्थित मिलीशिया का एक संगठन) के उपकमाण्डर अबू महदी अल-मुहान्दिस तथा कम से कम छह और लोगों के साथ ईरानी सेना और सरकार के एक महत्वपूर्ण नेता की बेवजह की गई हत्याओं का मकसद ईरान के खिलाफ साम्राज्घ्यवादी युद्ध को बढ़ाना है.

भाकपा(माले) का बयान

भाजपा की करारी हार के लिए भाकपा(माले) झारखंड की जनता को बधाई देती है और यह हम सब की जिम्मेवारी  है कि भाजपा द्वारा थोपी गयी भीड़-हिंसा, भुखमरी, पलायन, बेरोजगारी, गलत स्थानीयता नीति जैसी तबाहियों से राज्य को जल्द से जल्द उबारा जाय. भाकपा(माले) के नवनिर्वाचित विधायक विनोद कुमार सिंह इसके लिए पुरजोर पहलकदमी लेंगे.

अपने वोट और नागरिकता को बचाने के लिए आन्दोलन में उतर जायें

दोस्तो,

नागरिकता संशोधन कानून और एनआरसी के खिलाफ पूरे देश में विरोध प्रदर्शन हो रहे हैं. कई जगहों पर इन्टरनेट बंद कर दिया गया है, सड़कों पर आना जाना तक सरकार रोक रही है, मेट्रो बंद कर दी जा रही है, देश भर में धारा 144 थोपी जा रही है, छात्रों एवं सभी प्रदर्शनकारियों पर बर्बर दमन ढाया जा रहा है, गोलियां चलाई जा रही हैं, कितनों को अंधा और अपंग बना दिया गया है, यहां तक कि बहुत सी जानें जा चुकी हैं.

उत्‍तर प्रदेश में दमन और राज्‍य-आतंक के खिलाफ देशव्‍यापी विरोध दिवस का आह्वान : 30 दिसम्‍बर 2019

उत्‍तर प्रदेश में आतंक का राज बंद करो मुख्‍यमंत्री योगी आदित्‍यनाथ गद्दी छोड़ो बेगुनाहों का बर्बर दमन और पुलिस की पुलिस एवं सशस्‍त्र बलों द्वारा हुई हिंसा की घटनाओं एवं मौतों की न्‍यायिक जांच कराओ गिरफ्तार प्रदर्शनकारियों को अविलम्‍ब रिहा करो ...

भाकपा(माले) ने जम्मू बंद का समर्थन किया

भाकपा(माले) के जम्मू-कश्मीर राज्य सचिव निर्दोष उप्पल ने 7 दिसंबर 2019 को एकदिवसीय हड़ताल के आह्वान का समर्थन किया. इस हड़ताल के जरिये इंटरनेट सुविधाओं व मोबाइल डैटा को पुनः बहाल करने, जम्मू-कश्मीर को पुनः राज्य बनाने और उसे विशेष दर्जा देने, जम्मू बार एसोसिएशन की हड़ताल का समर्थन करने और जम्मू क्षेत्र में टाॅल प्लाजा को हटाने की मांग की गई.

एकजुट हुए छात्र संगठन, बनाया साझा मंच : 8 जनवरी को देशव्यापी छात्र हड़ताल

दिल्ली के जेएनयू के छात्र होस्टल की फीस में भारी वृद्धि और नए होस्टल मैन्युअल के खिलाफ पिछले एक महीने से ज्यादा से संघर्ष कर रहे है. लेकिन अब यह फीस वृद्धि का सवाल सिर्फ जेएनयू का नहीं बल्कि देश के तमाम विश्विद्यालयों का सवाल बन गया है. सभी के लिए सरकारी मुफ्त शिक्षा की मांग और उच्च शिक्षा पर हो रहे हमलों के खिलाफ देश भर के छात्र संगठनों ने साझा मंच ‘आल इंडिया नेशनल फोरम टू सेव पब्लिक एजुकेशन’ बनाया है. मंगलवार को दिल्ली के प्रेस क्लब में एसएफआई, आइसा, एनएसयूआई, एआईएसएफ के साथ कई अन्य छात्र संगठनों (आरएसएस से जुड़े छात्र संगठन एबीवीपी को छोड़कर) के नेता इकट्ठा हुए.

हम महिलाओं के नाम पर न हो हिरासत में हत्या: ऐपवा

हैदराबाद बलात्कार और हत्या के मामले के चार संदिग्धों को पुलिस ने अहले सुबह “मुठभेड़” में मार गिराया. इस “मुठभेड़” में  हिरासत में हत्या की सारी विशेषताएं हैं, जिसे “एनकाउंटर” का रूप दिया गया है. चूंकि संदिग्ध पुलिस हिरासत में थे, और इस कारण निहत्थे थे, यह स्पष्ट है कि पुलिस यह दावा करते हुये झूठ बोल रही है कि जब अपराध स्थल पर उक्त हत्या की रात की घटनाओं को ‘पुनर्निर्मित’, करने के लिए उन्हें ले जाया गया था तब उन्होंने “पुलिस पर हमला” किया, जिसकी जवाबी कार्रवाई में वो मारे गए.

प्रस्तावित नागरिकता संशोधन बिल पर बयान

[ सीएबी और एनआरसी के विरोध में केवल राजनीतिक एवं सामाजिक एवं सांस्कृतिक संगठनों ने ही नहीं, भारत के वैज्ञानिकों एवं बुद्धिजीवियों भी उठ खड़े हुए हैं. देश के एक हजार से ज्यादा वैज्ञानिकों एवं बुद्धिजीवियों ने इन विनाशकारी कानूनों के खिलाफ विरोध व्यक्त करते हुए निम्नलिखित बयान जारी किया है.]

हम भारतीय वैज्ञानिकों और बुद्धिजीवियों का एक ग्रुप हैं. सरोकार रखने वाले नागरिकों की हैसियत से अपनी व्यक्तिगत क्षमता में यह बयान जारी कर संसद के पटल पर नागरिकता संशोधन बिल 2019 रखे जाने की कथित योजना पर अपना आश्चर्य प्रकट कर रहे हैं.