केंद्र द्वारा कोरोना से मुकाबले के लिए घोषित राहत पैकेज में किसान और ग्रामीण गरीबों की घोर उपेक्षा

अखिल भारतीय किसान महासभा ने केंद्र सरकार द्वारा कोरोना संकट से उबरने के लिए घोषित आर्थिक पैकेज में किसानों और ग्रामीण गरीबों की घोर उपेक्षा किये जाने का आरोप लगाया है. पैकेज में किसानों के लिए कुछ भी नहीं है. वित्तमंत्री द्वारा घोषित 2000 रुपए की तत्काल सहायता किसान सम्मान निधि से जोड़ी गई है जो किसानों के साथ सिर्फ धोखा है.

सीएए, एनपीआर और एनआरसी वापस लो!

गृहमंत्री अमित शाह ने संसद में घोषणा की कि एनपीआर के दौरान किसी भी नागरिक को संदिग्ध नहीं घोषित किया जायेगा. यह घोषणा इस बात का सबूत है कि सीएए, एनआरसी और एनपीआर के खिलाफ चल रहे आंदोलन कितने जरूरी हैं. शाह ने जानबूझ कर लोगों को गुमराह करने की कोशिश की है. लोगों को संदिग्ध घोषित करने की प्रक्रिया एनपीआर के बाद शुरू होती है. एनपीआर के जरिये जुटाये गये आंकड़ों का इस्तेमाल एनआरसी बनाने के लिए किया जाता है. साथ ही संसद में शाह की घोषणा का कोई कानूनी आधार नहीं है.

वामपंथी पार्टियों का संयुक्त आह्वान : आधुनिक समावेशी भारत के लिए सीएए-एनपीआर-एनआरसी का विरोध करें

वामपंथी पार्टियों ने 23 मार्च 2020 को भगत सिंह, राजगुरू और सुखदेव का शहादत दिवस मनाने का फैसला लिया है ताकि सीएए / एनपीआर / एनआरसी प्रक्रिया के विरोध को सुदृढ़ किया जा सके और आधुनिक समावेशी भारत के उस सपने को सामने लाया जा सके जिसके बारे में भगत सिंह ने लिखा, उसके लिए काम किया और अपनी जिंदगी कुर्बान की.

कोरोना मामले में प्रभावी सामाजिक एकजुटता के साथ शारीरिक दूरी की आवश्यकता – दीपंकर भट्टाचार्य

भाकपा(माले) महासचिव काॅ. दीपंकर भट्टाचार्य अपने पूर्व निर्धारित कार्यक्रम के अनुसार आज सुबह पटना पहुंचे, लेकिन कोरोना वायरस के कारण उन्होंने अपने सारे कार्यक्रम स्थगित कर दिए हैं. वे सिवान में पार्टी के एक कार्यक्रम संबोधित करने वाले थे.

कोरोना वायरस से बचाव और सुरक्षा के उपाय भारत के सबसे गरीब लोगों तक पहुंचने चाहिए

14-16 मार्च को कोलकाता में हुई भाकपा(माले) की केन्द्रीय कमेटी की बैठक में यह घोषणा की गई कि कोरोना वायरस की महामारी को फैलने से रोकने के लिए एहतियात के तौर पर जनता की जुटान के सभी कार्यक्रम 31 मार्च तक के लिए स्थगित कर दिये गये हैं.

मानवाधिकार कार्यकर्ताओं को अंतरिम जमानत से इंकार : यह भारतीय लोकतंत्र को एक और बड़ा झटका है

सुप्रीम कोर्ट ने भीमा कोरेगांव मामले में मानवाधिकार कार्यकर्ता और जन बुद्धिजीवी गौतम नवलखा और आनंद तेलतुंबडे़ को अंतरिम जमानत देने से इंकार कर दिया है. यह काफी निराशजनक और परेशान करने वाला निर्णय है. इस अपील को खारिज करने का मतलब है कि दोनों को अगले तीन हफ्ते के भीतर पुलिस के सामने आत्घ्मसमर्पण करना होगा.

मो. शोएब की गिरफ्तारी की निंदा, हाइकोर्ट के फैसले का स्वागत

उत्तर प्रदेश राज्य इकाई ने रिहाई मंच के अध्यक्ष मोहम्मद शोएब की विगत 7 मार्च, शनिवार को लखनऊ स्थित उनके आवास से की गई गिरफ्तारी की निंदा की है. इसके साथ ही, पार्टी ने सीएए-एनआरसी-एनपीआर के खिलाफ गत 19 दिसंबर 2019 के राष्ट्रव्यापी प्रतिवाद में भाग लेने के कारण सदफ जफर, एसआर दारापुरी, मो. शोएब, दीपक कबीर जैसे लखनऊ के प्रतिष्ठित सामाजिक-सांस्कृतिक व मानवाधिकार कार्यकर्ताओं की अपराधियों की तरह राजधानी के चौराहे पर पफोटो लगवा कर वसूली की नोटिसें चिपकाने की उत्तर प्रदेश सरकार की कार्रवाई की भी निंदा करते हुए इसे असंवैधानिक कहा है.

दिल्ली दंगों के पीड़ितों के राहत व पुनर्वास के लिए योगदान करें !

पूरा देश दिल्ली के भयानक दंगे से मर्माहत है. संपूर्ण उत्तर पूर्वी दिल्ली को तीन दिनों तक आग के हवाले कर दिया गया. सैकड़ों घरों और दुकानों को पूरी तरह जला दिया गया. सरकारी आंकड़ों के मुताबिक 50 लोग मारे गए हैं; जबकि सच में यह आंकड़ा 50 से ज्यादा ही होगा. पूर्वोत्तर दिल्ली के लोगों को करोड़ों रुपये का आर्थिक नुकसान हुआ है.

जन एकता-जन अधिकार अभियान

बिहार में आगामी 23 मार्च से 14 अप्रैल 2020 के बीच पूरे राज्य में जन एकता-जन अधिकार अभियान चलाया जाएगा. विगत 5-6 मार्च को महासचिव का. दीपंकर भट्टाचार्य की मौजूदगी में संपन्न हुई भाकपा(माले) की बिहार राज्य कमेटी ने यह निर्णय लिया है. अभियान के दौरान नागरिकता के सवाल समेत जनता के अन्य ज्वलंत मुद्दों को पुरजोर तरीके से सामने लाया जाएगा. आगामी 23 मार्च को शहीदे आजम भगत सिंह के शहादत दिवस से शुरू होकर 14 अप्रैल को डा.

जंतर मंतर एलान

[ 1 मार्च 2020 को दिल्ली के जंतर-मंतर पर लेखकों, कलाकारों, संस्कृतिकर्मियों और वैज्ञानिकों और उनके विभिन्न संगठनों मसलन इंडियन कल्चरल फोरम, जनवादी लेखक संघ, प्रगतिशील लेखक संघ, जन संस्कृति मंच, दलित लेखक संघ, न्यू सोशलिस्ट इनिशिएटिव, जन नाट्य मंच, दिल्ली साइंस फोरम, जनसंस्कृति (मलयालम), विकल्प, सिनेमा ऑफ रेजिस्टेंस, संगवारी तथा आल इंडिया पीपुल्स साइंस नेटवर्क के अखिल भारतीय सम्मेलन में स्वीकृत और घोषित ]

हम लेखक, कलाकार, संस्कृतिकर्मी और वैज्ञानिक सीएए-एनपीआर-एनआरसी के खिलाफ आज के इस अखिल भारतीय लेखक-कलाकार सम्मेलन में दिल