मोदी राज के छः साल नागरिक स्वतंत्रता, भारत के संविधान और लोकतंत्र पर अनवरत हमले के साल रहे हैं. प्रधानमंत्री मोदी ने 8 फरवरी को संसद में बोलते हुए प्रदर्शनकारियों और विरोधियों को ‘परजीवी’ बताकर अपनी असल मंशा को स्पष्ट कर दिया है.
विरोध करने वाली जनता को अमानवीय और खलनायक बताने वाली भाषा दुनिया भर के निरंकुश तानाशाहों की भाषा रही है. यह जनसंहार की ओर ले जाने वाली भड़काऊ भाषा है.