इनौस की राज्यस्तरीय कार्यशाला

सिवान जिले के मैरवा में विगत 21-22 दिसम्बर को इंकलाबी नौजवान सभा की बिहार राज्य स्तरीय कार्यशाला आयोजित की गई. भाकपा(माले) पोलित ब्यूरो के सदस्य का. धीरेन्द्र झा ने कार्यशाला को शिक्षक के बतौर संबोधित किया. इनौस के राष्ट्रीय अध्यक्ष का. मनोज मंजिल और राष्ट्रीय महासचिव का. नीरज भी इसमें मौजूद थे. कार्यशाला में नागरिकता संशोधन कानून, एनआरसी, आर्थिक मंदी और बढ़ती बेरोजगरी पर गहन विचार विमर्श हुआ.

दिल्ली में आम हड़ताल का जोरदार प्रचार

8 जनवरी 2010 को सभी केन्द्रीय टेड्र यूनियनों (संघ-भाजपा संचालित भारतीय मजदूर संघ, बीएमएस को छोड़कर) तथा बैंक व बीमा समेत सार्वजनिक क्षेत्र की कई यूनियनें/फेडरेशनों द्वारा आहूत राष्ट्रीय आम की हड़ताल की देश के विभिन्न हिस्सों में पुरजोर तैयारी चल रही है.

भूमि के सवाल पर प्रदर्शन

23 दिसंबर 2019 को उदयपुर कलेक्टर कार्यालय पर प्रदर्शन कर प्रशासन के द्वारा भू-माफियाओं को संरक्षण देने और वन विभाग द्वारा लम्बे समय से काबिज आदिवासियों को सलुम्बर तहसील मे प्रताड़ित करने के मामलों में ज्ञापन देकर एक पखवारे के अंदर कार्यवाई करने की मांग की गई.

फुलवारी में दंगे की साजिश

विगत 21 दिसंबर 2019 को सीएए व एनआरसी के खिलाफ राजद द्वारा आहूत बिहार बंद के दौरान पटना शहर के फुलवारीशरीफ में बंद समर्थकों पर पथराव व फायरिंग की गई. आरएसएस व बजरंग दल के लोगों ने जो सीएए व एनआरसी के खिलाफ उठ खड़े हुए आंदोलन से बौखलाए हुए थे और इसको सांप्रदायिक रंग देने की लगातार कोशिश कर रहे थे, इस घटना को अंजाम दिया. बंद का जुलूस जैसे ही टमटम पड़ाव के पास से पूरब की ओर मुड़ा, बगल के मुहल्ले (जो आरएसएस समर्थित लोगों का मुहल्ला है) से पथराव आरंभ हो गया और फिर फायरिंग शुरू हो गई. इससे भगदड़ की स्थिति मच गई.

संविधान की प्रस्तावना पढ़ी

छात्र संगठन आइसा ने 25 दिसंबर 2019 को पटना के बारी पथ स्थित नूरी मस्जिद के बाहर सड़क पर आम नागरिकों व छात्रों की एक सभा आयोजित की. सभा में भारत के संविधान की प्रस्तावना का पाठ किया गया तथा देश के धर्मनिरपेक्ष ढांचे को बचाने तथा सीएए-एनआरसी-एनपीआर की पूर्णतः वापसी तक आंदोलन जारी रखने का संकल्प दुहराया.

मनरेगा मजदूरों का धरना

बटाला (पंजाब) में बीते 25 दिसंबर को सैकड़ों मनरेगा मजदूरों ने मजदूर मुक्ति मोर्चा और भाकपा(माले) की अगुआई में बीडीपीओ कार्यालय के समक्ष धरना दिया. धरना को संबोधित करते हुए एक्टू के साझा जोन के सचिव का. मनजीत राज ने कहा कि गांव शेखपुरा, नवा पिंड, सैद मुबारक घसीटपुरा, भुल्लर, काला आदि गांवों के मजदूर लगातार दो महीने से अमृतसर-पठानकोट रेलवे लाइन पर काम कर रहे थे, लेकिन बीडीपीओ कार्यालय द्वारा इन मनरेगा मजदूरों को एक भी पैसा नहीं मिला. गांव कोटला बजा सिंह में मजदूरों से आठ महीने काम लिया गया, लेकिन उनके खाते में मात्र 15 सौ रू. आए हैं.

80 से अधिक छात्र संगठनों और छात्र यूनियनों ने मिलकर बनाया ‘यंग इंडिया अगेंस्ट सीएए, एनआरसी और एनपीआर’

मोदी सरकार ने खतरनाक और विभाजक, सांप्रदायिक और असंवैधानिक ‘नागरिकता संशोधन अधिनियम-2019’ को पार्लियामेंट के रास्ते पास करवा लिया. फिर पूरे देश में एनआरसी कराने का प्रस्ताव किया. पूरे देश में लोग इस विभाजक सीएए और एनआरसी का विरोध कर रहे हैं और बहादुरी के साथ सरकारी दमन का सामना कर रहे हैं.

एआइपीएफ द्वारा सत्याग्रह

हरियाणा के फतेहाबाद जिला अवस्थित टोहाना शहर के लकड़ बाजार में  आॅल इंडिया पीपुल्स फोरम, हरियाणा द्वारा ‘संविधान बचाओ, देश बचाओ’ तथा ‘सीएए व एनआर सी वापस लो’ के नारे के साथ एक दिवसीय सत्याग्रह आयोजित किया गया.

सत्याग्रह में बैठे लोगों को डराने के लिए भाजपा और आरएसएस से जुड़ेे समाज विरोधी ताकतों ने सीएए व एनआरसी के पक्ष में मार्च निकाला और सत्याग्रह-स्थल के पास पहुंच कर हुड़दंग मचाया और माहौल को बिगाड़ने की पूरी कोशिश की. उनके साथ चल रही पुलिस की गाड़ी भी चुपचाप तमाशा देख रही थी. लेकिन स्थानीय लोगों की वजह से शांति बनी रही.

सीएए की प्रतियां जलाई

24 दिसंबर 2019 को भाकपा(माले) ने नागरिकता संशोधन कानून और राष्ट्रीय नागरिकता रजिस्टर के खिलाफ सुखा सिंह-मेहताब सिंह पार्क में रैली करने के बाद प्रदर्शन किया और गांधी चौक पर कानून की प्रतियां जलाई.

इस मौके पर भाकपा(माले) के राज्य सचिव का. गुरमीत सिंह बखतपुरा, मनजीत राज बटाला, साहित्यकार डा. अनूप सिंह व विजय कुमार सोहल ने कहा कि एनआरसी और सीएए जो आपस में जुड़े हुए भी हैं स्पष्ट तौर पर भारतीय संविधान में निहित धर्मनिरपेक्षता के खिलाफ हैं.

फैक्टरी की आग में मजदूरों की मौत के खिलाफ ऐक्टू का प्रतिवाद

हाल ही में दिल्ली के अनाज मंडी इलाके में हाल में अगलगी से हुई मजदूरों की मौत के खिलाफ ऐक्टू ने प्रतिवाद किया है. यह हाल के अरसे में हुई सबसे बड़ी औद्योगिक दुर्घटना है. मगर राज्य एवं केन्द्र की सरकारें इस स्थिति से निपटने में दयनीय रूप से नाकाम रही हैं और उन्होंने भारत की राष्ट्रीय राजधानी में कार्यस्थल की बदहाल दशा को दूर करने के लिये कोई कदम नहीं उठाये हैं.