लाॅकडाउन में राहत कार्य : जयपुर में लेफ्ट संगठनों की ‘समर्थ हेल्पलाइन’ ने हजारों लोगों को राहत दी

स्वतंत्रता प्राप्ति के बाद यह पहला मौका है जब कोरोना जैसी महामारी की चपेट में पूरा देश आ गया है. राजस्थान भी इससे अछूता नहीं रहा बल्कि यह देश के सबसे प्रभावित राज्यों में चौथे स्थान पर है.

लाॅकडाउन: मुसीबतों के बीच एक और मुसीबत

केंद्र व राज्य सरकार द्वारा इस बीमारी के फैलने से रोकने व पीड़ितों के उपचार हेतु उठाए गए कदम कतई नाकाफी साबित हुए उल्टे संक्रमण को रोकने के प्रशासनिक उपाय के रूप में लगाए गए लाॅकडाउन व अन्य कदमों ने आम जनता की मुसीबतें बढ़ा दी हैं.

कौंरा व सिअरूआं (भोजपुर) की घटनायें

भोजपुर जिले में सांमंती-साम्प्रदायिक ताकतों द्वारा अल्पसंख्यकों के खिलाफ लगातार नफरत का माहौल बनया जा रहा है और उन पर हमला भी किया जा रहा है. जगदीशुपर प्रखंड के कौंरा गांव में 27 अप्रैल की शाम 6 बजे मो. जकी अख्तर (पिता - मो. इसरार) को दबंगों ने बुरी तरह पीट दिया. मो. जकी पुलिस बहाली की तैयारी में गांव के मैदान में दौड़ लगा रहे थे. हमला करनेवालों ने कहा कि ये लोग कोरोना फैलाने वाले हैं. मुख्य हमलावर समर प्रताप सिंह उर्फ भोलू (पिता-जयप्रकाश जिद्दी) खिलाफ एफआईआर हुआ लेकिन अभी भी गिरफ्तारी नहीं हुई है.

कथराईं, चरपोखरी, भोजपुर दलित छात्रा के साथ यौन हिंसा

भोजपुर जिले के चरपोखरी थाना के कथराई गांव में विगत 25 अप्रैल 2020 को गरीब-दलित नाबालिग छात्रा के साथ बलात्कार की घटना हुई. इस घटना को गांव के ही गोलू पाण्डे, शिवशंकर, कृष्णा राय व एक अन्य ने अंजाम दिया. ऐसा तब हुआ जब लड़की गांव में ही अपनी मां का कपड़ा सीलने के लिए देकर लौट रही थी.

लाॅकडाउन में झूठे मुकदमे, पुलिसिया दमन और गिरफ्तारिया

तमिलनाडु की ऐक्टू इकाई ने 18 अप्रैल को विकेंद्रित धरना और 19 अप्रैल को अनशन करने का फैसला लियाहजारों मजदूरों ने लाॅकडाउन के नियमों का पालन करते हुए इन कार्यक्रमों में शिरकत की. 18 जिलों में धरना और अनशन कार्यक्रम आयोजित किए गए. निर्माण, पावरलूम, नागरिक आपूर्ति, कपड़ा उद्योग, बिजली, परिवहन, बीड़ी, स्वास्थ्य, सीमेंट तथा कई अन्य निजी क्षेत्रों की कंपनियों के मजदूरों-कर्मचारियों के साथ-साथ खेत मजदूरों ने भी अच्छी संख्या में इस कार्यक्रम में हिस्सा लिया. कोयंबटूर में प्रिकोल यूनियन के कार्यकर्ताओं की भागीदारी खास तौर पर उल्लेखनीय रही.

मुंबई: बुरे हाल में प्रवासी मजदूर

बंबई, थाणे, ऊल्हासनगर ,कल्याण, नई बंबई, अमरावती, नागपुर के लोकडाऊन मे फंसे कई मजदूरों से बातचीत हुई. इनमें से कई गारमेन्ट वर्कर हैं जिन्हें मालिक मदद नहीं कर रहा. मालिक गांव चला गया है. कोई जरी वर्कर तो कुछ नाका मजदूर. कई सबकोन्ट्रेक्ट पर काम करने वाले कन्सट्रक्शन मजदूर. सब अपने को जिन्दा रखने की कोशिश कर रहे हैं. कुछ समय पहले कुछ जगहों पर कम्युनिटी किचन मे रेडीमेड खाना मिलता था. जो खाना मिलता था खाना लेने जाने पर पुलिस बुरी तरह पीट रही थी. अब वे सब भी बंद हो चुके हैं. ‘राशन नहीं है’ – यह कहते हुए कलक्टर ने हाथ खड़े कर दिये हैं.

बनारस: लाॅकडाउन में मोहल्ला किचन चलाने का एक अनुभव

कोरोना के खिलाफ लागू किये गए लाॅकडाउन ने शहरी और दिहाड़ी मजदूरों के सामने जिंदा रहने की चुनौती पेश कर दी है. काम-धंधा बंद हो जाने की वजह से रोज कमाने-खाने वाले परिवारों के सामने जिंदा रहना एक बड़ी चुनौती बन गयी है. इस परिस्थिति में तमाम स्वयंसेवी संस्थाओं और सरकार द्वारा जरूरतमन्दों के लिए फ़ूड पैकेट का इंतजाम किया गया. जिसमें जरूरतमंदों तक अनाज और पका भोजन पहुंचाया गया.

लाॅकडाउन में राशन के लिए धरना हासिल हुई जीत

एक महीने से जारी लाॅकडाउन ने भोजपुर जिले के खननी खुर्द गांव के भूमिहीन-गरीब दलित परिवारों को भूखों मरने की राह पर धकेल दिया तो वे अनिश्चितकालीन धरना देकर राशन की मांग करने को विवश हो गए.

दल्ली में शासन पूरी तरह विफल

मुस्लिम समुदाय के खिलाफ साम्प्रदायिक हिंसा के संत्रास से छुटकारा मिले, इसके पहले ही केन्द्र सरकार द्वारा बिना किसी योजना के अचानक घोषित किये गये लाॅकडाउन से दिल्ली में रहने वाली गरीब कामगार आबादी के बीच भय और तकलीफ का माहौल पैदा हो गया. अरविंद केजरीवाल की सरकार लाॅकडाउन के चलते उत्पन्न समस्याओं के सामने बुरी तरह विफल साबित हो गई है. उप राज्यपाल और मुख्यमंत्री की दिल्ली सरकार जरूरतमंद लोगों को भोजन कराने में नाकामयाब रही है. भोजन वितरण केन्द्र काफी कम हैं और कामगारों के इलाके से काफी दूर हैं. वहां काफी कम भोजन मिलता है और जो मिलता है वह घटिया स्तर का होता है.

भाकपा(माले) विधायक ने प्रधानमंत्री को ज्ञापन सौंपा

झारखंड की जनता लाॅकडाउन और सरकारी उपेक्षा के चलते बुरी तरह परेशान हैं. यहां वे भाकपा(माले) विधायक विनोद सिंह सरकारी प्रयासों के अभाव में अन्य राज्यों में पफंसे झारखंडी मजदूरों के बीच राहत कार्य चलाने में लगातार लगे हुए हैं. वे खुद से ऐक्टू द्वारा संचालित हेल्पलाइन की देखरेख कर रहे हैं और उन्होंने स्वयं हजारों फोन काॅल रिसीव किये हैं. विधायक के कोटे की अपनी समस्त विकास राशि उन्होंने प्रदान कर दी है और साथ ही उन्होंने राज्य सरकार से भी एक राहत पैकेज की मांग की है.

वी आइ लेनिन की 150वीं जन्मवार्षिकी और भाकपा(माले) का 51वां स्थापना दिवस :

कोरोना को हराने, साम्प्रदायिकता के जहर को मिटाने और समाजवाद के सपने को पूरा करने का संकल्प मजबूत हुआ

पूरे देश में पार्टी कतारों व समर्थकों ने विगत 22 अप्रैल 2020 को भाकपा(माले) का 51वां स्थापना दिवस और सर्वहारा समाजवादी क्रांति के निर्माता कामरेड लेनिन का 150वां जन्म दिवस को संकल्पपूर्वक मनाया. यह कार्यक्रम ऐसे दौर में आयोजित हुआ जब पूरे देश व दूनिया में जानलेवा कोरोना महामारी फैली हुई है और भारत भी कोरोना जनित लाॅकडाउन से गुजर रहा है. देश की एक बड़ी आबादी भुखमरी का संकट झेल रही है.