हल्द्वानी में वाम जनवादी शक्तियों का संयुक्त धरना

क्वारन्टीन सेंटरों की दुर्दशा, स्वास्थ्य व्यवस्था की बदहाली और प्रवासियों को लेकर बनाये जा रहे भय के माहौल के खिलाफ उत्तराखंड में वामपंथी व जनवादी संगठनों, व्यक्तियों की ओर से संयुक्त धरने का आह्वान किया गया था. इसके तहत बुद्ध पार्क में लाॅकडाउन के नियमों का पालन करते हुए धरना आयोजित किया गया. इस धरने में भाकपा(माले), क्रांतिकारी लोक अधिकार संगठन, अम्बेडकर मिशन एन्ड फाउंडेशन, ‘पछास’ आदि संगठन शामिल रहे.

रूपनचक जनसंहार के खिलाफ माले का राज्यव्यापी प्रतिवाद

गोपालगंज में घटित रूपनचक जनसंहार के मुख्य साजिशकर्ता जदयू के बाहुबली विधायक अमरेन्द्र पांडेय की विधानसभा सदस्यता अविलंब खारिज करने, उनको अविलंब गिरफ्तार करने, जनसंहार पीड़ितों को एक करोड़ रुपए का मुआवजा देने व गांव में पुलिस कैंप की व्यवस्था करने की मांग पर 31 मई 2020 को भाकपा(माले) कार्यकर्ताओं ने पूरे राज्य में विरोध दिवस का आयोजन किया.

प्रवासी मजदूरों व रसोइया की मौत के खिलाफ ऐक्टू ने मनाया विरोध दिवस

मोतिहारी में क्वारंटाइन सेन्टर पताही के देवापुर, कल्याणपुर के शीतलपुर और पकड़ीदयाल के सुन्दरपट्टी में प्रवासी मजदूरों व रसोइया की मृत्यु के खिलाफ 30 मई 2020 को ऐक्टू ने पूरे जिले में विरोध दिवस मनाया.

ललित भवन, पटना के पास हुई दुर्घटना तीन बच्चों की मौत – भाकपा(माले) की जांच रिपोट

ललित भवन, बेली रोड, पटना के पास 27 मई की संध्या हुई दुर्घटना में तीन मासूमों – साहिल (10 वर्ष), करन (7 वर्ष) और केशव (9 वर्ष) की जान चली गई. तीनों बच्चे अत्यंत गरीब मजदूर परिवार के थे और बगल में ही झुग्गी-झोपड़ी में रहते थे.

योगी सरकार द्वारा श्रम कानूनों का स्थगन पूंजीपतियों द्वारा मजदूरों को गुलाम बनाने का लाइसेंस है : उत्तर प्रदेश में भाकपा(माले) और ऐक्टू का प्रदेशव्यापी धरना-प्रदर्शन

देश के संविधान निर्माता डा. बीआर अंबेडकर साहब ने दिसंबर 1945 में श्रम सचिव की बैठक को संबोधित करते हुए स्पष्ट रूप से कहा था कि औद्योगिक विवाद तब नहीं होंगे, जब मजदूरों को उनका समुचित संगठन बनाने का अधिकार होगा और उनका अपना संगठन होगा; मजदूरों को सम्मानजनक न्यूनतम वेतन दिया जाएगा और मजदूरों-कर्मचारियों के हित में कानूनों में बदलाव किए जाएंगे. योगी सरकार ठीक उसके उलट मजदूरों-कर्मचारियों के शोषण के लिए श्रम कानूनों को खत्म करते हुए मजदूरों को उद्योगपतियों का गुलाम बनाने का लाइसेंस दे रही है.

7 मई 2020: सफूरा जरगर के साथ हुईं देश की महिलायें : हम जब्र का निजाम गिरानेवाली हैं

सफूरा जरगर के बारे में अभद्र टिप्पणी और दुष्प्रचार करने वालों पर कार्रवाई और सफूरा समेत सीएए विरोधी आंदोलन में सक्रिय रही छात्रा नेताओं की रिहाई की मांग पर 7 मई को सभी महिला संगठनों ने सफूरा जरगर के साथ जबरदस्त एकजुटता दिखाई.

9 मई 2020: विशाखापत्तनम व महाराष्ट्र की घटनाओं पर देशव्यापी शोक व धिक्कार यह हादसा नहीं, लाॅकडाउन जनसंहार है

विशाखापत्तनम में जहरीली गैस से रिसाव के कारण लगभग 11 लोगों की मौत और 800 लोगों के अस्पताल में भर्ती होने के बाद महाराष्ट्र के औरंगाबाद में कम से कम 16 प्रवासी मजदूरों को ट्रेन द्वारा रौंद कर मार दिए जाने की वीभत्स घटना को लाॅकडाउन जनसंहार कहते हुए भाकपा(माले) और ऐक्टू, खेग्रामस, एआकेएम, ऐपवा, आइसा, इनौस समेत कई संगठनों ने 9 मई को देशव्यापी शोक व धिक्कार दिवस मनाने का आह्वान किया.

मजदूर चूल्हा से खाना पा रहे हैं मजदूर

लाॅकडाउन बढ़ाये जाने पर मजदूरों की परेशानी और ज्यादा गहराती जा रही है. रोजगार-विहीन भूख से पीड़ित मजदूरों के लिए ऐक्टू ने मई दिवस से हेहेल पहाड़ टोली के वृन्दावन नगर में मजदूर चूल्हा शुरू किया है. आज छठे दिन भी पहाड़ टोली, वृन्दावन नगर, जमुना नगर के सैंकड़ों मजदूरों और गरीबों ने खाना खाया. ऐक्टू द्वारा संचालित मजदूर चूल्हा से अबतक दो हजार से ज्यादा मजदूरों ने भोजन किया. मजदूरों की टीम ही हर रोज निःशुल्क खाना पकाने का काम कर रही है.

बिहार के कोरेंटाइन सेंटर : गरीबों के प्रति सामंती व सरकारी नफरत के नये नमूने

जहानाबाद जिले में कोटा से बड़ी संख्या में संपन्न घरों के बच्चे लाॅकडाउन के बाद घर आए हैं. उन्हें प्रखंड या पंचायत स्तरीय क्वारेंटाइन सेंटरों में नहीं रखा गया है. इसके बजाय तुरंत ही उनके परिजनों को सूचित करके उन्हें घर में ही अलग रहने (होम क्वारेंटाइन) की सलाह देकर घर भेज दिया गया. लेकिन, जो गरीब पुरुष, महिला और उनके बच्चे आए हैं, उन्हें सरकारी क्वारेंटाइन सेंटर में नारकीय हालत में ठूंस दिया गया है. इन सेंटरों में रहने-खाने की कोई उचित व्यवस्था नहीं है. जहानाबाद के रामलखन सिंह यादव काॅलेज में बनाया गया नौरू प्रखंड स्तरीय क्वारेंटाइन सेंटर इसका एक उदाहरण है.

मुस्लिम सब्जी वालों के बहिष्कार को रोका

दरभंगा जिले के देकुली गांव के बगल में चंदनपट्टी गांव है. वहां कुंजड़ा मुस्लिम समुदाय के सब्जी उगाने व फेरी लगा कर बेचने वाले लोगों की अच्छी आबादी है. लाॅकडाउन के दौरान कुछ भाजपाई-संघी लोगों के बहकावे व दुष्प्रचार में आकर कई लोग उन्हें हेय दृष्टि से देखने लगे और गांव-मोहल्ले में आने व पफेरी लगाने से रोकने लगे. भाकपा(माले) कार्यकर्ताओं ने लोगों को समझाने-बुझाने और बहस चलाने के जरिए इस माहौल को बदला. उन्होंने खुद ही पहल लेकर जगह-जगह इस समुदाय के लोगों से सब्जी खरीदना शुरू किया. इस तरह फिर सब्जी खरीद शुरू करवायी गयी.