वाम दलों का राज्यव्यापी विरोध : आभासी रैली नहीं, राशन और रोजगार चाहिए

मजदूरों, गरीबों, किसानों और समाज के सभी कामकाजी हिस्से को गहरे संकट में डालकर तथा देश की अर्थव्यवस्था को पूरी तरह चौपट करके भाजपा द्वारा बिहार में आभासी रैली के जरिए चुनाव तैयारी आरंभ किए जाने के खिलाफ 7 जून 2020 को वाम दलों के आह्वान पर राजधानी पटना सहित पूरे राज्य में शारीरिक दूरी व कोरोना से बचाव के उपायों के नियमों का पालन करते हुए विरोध दिवस का आयोजन किया गया.

कोविड-19 लाॅकडाउन के दौरान चंडीगढ़ में राहत कार्य

अचानक लाॅकडाउन की घोषणा और उसके बाद कर्फ्यू ने हमको बिल्कुल अनिश्चितता की स्थिति में डाल दिया था. हम समझ गए कि मेहनतकश जनता को किस कदर भुखमरी और कठिन हालात का सामना करना पड़ेगा. चंडीगढ़ में मजदूर वर्ग के बीच हमारा अधिकांश कामकाज निर्माण मजदूरों, ठेका एवं अन्य किस्म के असंगठित मजदूरों के बीच केन्द्रित है. मार्च के अंतिम सप्ताह में हुए इस अचानक लाॅकडाउन से सभी लोगों को अनिवार्य रूप से नकदी और वेतन के नुकसान और काम के अभाव का सामना करना पड़ा. शुरूआत में हमने वालंटियर के पास हासिल करने के लिये प्रशासनिक अधिकारियों से सम्पर्क किया.

कोलकाता के जादवपुर में राहत कार्यकर्ताओं पर हमला

योजना-विहीन लाॅकडाउन के बाद जब बदहाली और भुखमरी फैलने लगी, तो कोलकाता के कामरेडों ने हमारे कामकाज के सभी इलाकों में राहत कार्य में पहलकदमी लेना शुरू किया. जादवपुर की लोकल पार्टी कमेटी ने इस मामले में उल्लेखनीय भूमिका निभाई. प्रगतिशील नागरिकों एवं हमारे पार्टी समर्थकों ने नकद और सामान के रूप में योगदान किया और जिन लोगों को भोजन और अन्य सहायता की सबसे ज्यादा जरूरत थी उनके बीच राहत कूपन बांटे गये. आस-पास के 4-5 म्युनिसिपल वार्डों के अलावा हमारे कामरेडों ने अपनी आजीविका खो बैठे कश्मीरी फेरीवालों एवं अन्य लोगों तक को मदद पहुंचाई.

आंध्र प्रदेश और तेलंगाना में राहत कार्य

23 मार्च को लाॅकडाउन घोषित किये जाने के बाद से राज्य सरकारों एवं अधिकारियों का रवैया गैर-जिम्मेदाराना रहा है. उन्होंने मजदूरों को उनकी दुर्दशा के हवाले और नागरिक समाज की संवेदना के भरोसे छोड़ दिया. आंध्र प्रदेश और तेलंगाना में दुर्दशाग्रस्त मजदूरों तक पहुंचने और उन्हें सहारा देने के लिये जिला सचिवों और नेतृत्वकारी कामरेडों को लेकर स्थानीय स्तर पर ग्रुप बनाये गये हैं.

गोरखपुर में कम्युनिटी किचन के 50 दिन – एक अनुभव

गोरखपुर में गोलघर के अम्बेडकर छात्रावास में चल रहे हमारे कम्युनिटी किचन ने अपना 50वां दिन पूरा कर लिया था. कल से हमें अपना किचन बंद करना था. किचन के मेरे दो महत्वपूर्ण साथी रविन्द्र और सतेंद्र सुबह अपने घर चले गए. लोगों के लिये भोजन बनाना नहीं था, इसलिये हमारे अन्य साथी भी किचन के स्थान पर देर से पहुंचे.

मधुबनी कांड और दलितों-गरीबों पर लगातार बढ़ते हमले के खिलाफ माले का राज्यव्यापी प्रतिवाद

बिहार में दलित-गरीबों पर लगातार बढ़ते हमले, हत्या व सरकारी जमीन से उनकी बेदखली के खिलाफ 5 जून को भाकपा(माले) के राज्यव्यापी आह्नान पर पूरे राज्य में विरोध दिवस मनाया गया. भाकपा(माले) के पोलितब्यूरो सदस्य धीरेन्द्र झा मधुबनी नगर थाना के सुदंरपुर भिट्ठी गांव गए और वहां उन्होंने भाजपा समर्थित सामंती-अपराधी व मुखिया अरुण झा गिरोह के हमले में मारे गए ललन पासवान व अन्य घायल परिवारों से मुलाकात की. भाकपा(माले) ने सरकारी जमीन पर बसे सभी गरीबों की सुरक्षा की गारंटी की मांग सरकार से की है.

आंदोलनकारियों पर से मुकदमा वापसी की मांग पर गृहसचिव व डीजीपी से मिला वाम दलों का प्रतिनिधिमंडल

लाॅकडाउन के दौरान वाम दलों, श्रमिक संगठनों के नेताओं और नागरिक समुदाय के कई लोगों पर कोतवाली थाना प्रशासन द्वारा थोपे मुकदमे के सिलसिले में 11 जून को इन संगठनों से जुड़े नेताओं के एक उच्चस्तरीय प्रतिनिधिमंडल ने बिहार के गृहसचिव व डीजपी से मुलाकात की और मुकदमों को वापस लेने की मांग की.

पटना में केंद्रीय ट्रेड यूनियनों की संयुक्त बैठक

केंद्र व राज्य सरकारों द्वारा मजदूर अधिकारों पर किए जा रहे हमले, सार्वजनिक संपत्तियों की लूट व निजीकरण पर रोक तथा सभी मजदूरों के रोजी-रोजगार व जीवन यापन के अधिकार आदि विषयों पर विभिन्न श्रमिक संगठनों की संयुक्त बैठक 12 जून को पटना स्थित एचएमएस रेलवे यूनियन कार्यालय में संपन्न हुई. बैठक में केंद्रीय ट्रेड यूनियनों के आह्वान पर आगामी 3 जुलाई को देशव्यापी प्रतिरोधा दिवस के तहत राजधाानी पटना समेत राज्य के विभिन्न जिलों में सड़क पर उतर प्रदर्शन करने का निर्णय लिया गया. साथ ही इसे सफल बनाने हेतु पूरे राज्य में पर्चा वितरण व पोस्टर चिपकाने का भी निर्णय लिया गया.

किसान बचाओ-देश बचाओ’ नारे के साथ लाखों किसान उतरे आंदोलन में

27 मई 2020 को ‘किसान बचाओ-देश बचाओ’ नारे के साथ देश के 10,000 से ज्यादा गांवों, टोला, तहसील, ब्लाॅक, कस्बों और जिलों में किसानों का विरोध प्रदर्शन हुआ जिसमें लाखों किसानों ने भागीदारी निभाई. किसान संगठनों ने पूरे देश भर से प्रधानमंत्री के नाम ज्ञापन भेज कर कहा कि सरकार किसानों को कर्ज माफी, लाॅकडाउन में बर्बाद फसलों का मुआवजा और कोरोना विशेष पैकेज किसानों और ग्रामीण गरीबों को मुहैया कराए.

स्वंय सहायता समूह की महिलाओं का देशव्यापी प्रतिवाद

29 मई को ऐपवा से संबद्ध स्वयं सहायता समूह संघर्ष समिति के आह्वान पर देश भर में इन समूहों से जुड़ी हजारों महिलाओं ने अपने गांवों और मुहल्लों में धरना दिया. ये कार्यक्रम बिहार, झारखंड, उत्तर प्रदेश, असम, कार्बी अंग्लौंग, पश्चिम बंगाल, राजस्थान, ओडिशा, उत्तराखंड, पंजाब, आंध्र प्रदेश, तमिलनाडु, कर्नाटक और अन्य कई राज्यों में संपन्न किए गए. इन महिलाओं की मांगें इस प्रकार थीं: