भारी संख्या में प्रवासी मजदूरों के आने के बाद अरवल (बिहार) में करीब-करीब अब सभी पंचायतों में मुखिया द्वारा क्वारंटाइन सेंटर चल रहे हैं.
जिला प्रशासन द्वारा फंड नहीं दिया जाने के कारण शुरू काफी लचर व्यवस्था थी. मुखिया को खर्च करने के लिए कहा जाता था, लेकिन लिखित तौर पर इसका कोई आदेश नहीं था. इस वजह से मुखिया अनमने ढंग से क्वारंटाइन केंद्र संचालित कर रहे थे जिससे मजदूरों को बेहतर भोजन एवं अन्य तरह की सुविधाएं नहीं मिल पा रही थीं.