सबके लिए पीडीएस, बुनियादी अधिकारों और सरकारी राहत की मांग पर दिल्ली में वाम दलों का प्रतिवाद

लगभग ढाई महीने के लाॅकडाउन के बाद केंद्र सरकार ने लाॅकडाउन को खोलने की प्रक्रिया का एलान किया. देश के अधिकांश हिस्सों की तरह दिल्ली में भी सरकारों ने ‘अनलाॅक’ की घोषणा कर दी.

भूमि अधिग्रहण के खिलाफ गाजीपुर में किसानों का प्रदर्शन

गाजीपुर में बन रही मऊ-ताड़ीघाट नई रेल लाइन परियोजना में जबरिया भूमि अधिग्रहण के खिलाफ शुरू से ही किसान आंदोलन कर रहे हैं. लेकिन उत्तर प्रदेश सरकार दमन पर उतारू है. अक्टूबर 2018 से लगातार धरना चल रहा था, लेकिन अब लाॅकडाउन में रुक गया है.

लाॅकडाउन की आड़ में प्रशासन जबरिया काम करना चाह रहा है. प्रशासन लगातार धमकी दे रहा है. इसके खिलाफ किसानों में भी सुगबुगाहट है. 15 जुलाई को किसानों ने अपनी आवाज बुलंद करने और आगे की रणनीति के लिए सुखदेव पुर मंदिर पर इकट्ठा हो कर प्रदर्शन किया और धरना दिया.

सारे देश में गूंजी आवाज: डा. कफील खान को रिहा करो – मोदी-योेगी शर्म करो, लोकतंत्र की हत्या बंद करो

विगत 19 अप्रैल 2020 को भाकपा-माले, आइसा, इनौस व इंसाफ मंच के संयुक्त बैनर बिहार, उत्तर प्रदेश, उत्तराखंड, पंजाब, राजस्थान, हरियाणा, दिल्ली आदि राज्यों में मथुरा जेल में रासुका में बंद डा. कफील खान को रिहा करने तथा फर्जी इल्जाम लगाकर लोकतंत्र की हत्या बंद करने की मांग की. प्रस्तुत है संक्षिप्त रिपोर्ट.

राजस्थान में ऐपवा-ऐक्टू का मुख्यमंत्री को ज्ञापन

विगत 14 जुलाई 2020 को उदयपुर में ऐपवा और ऐक्टू की तरफ से राशन के मुद्दे पर मुख्यमंत्री के नाम उदयपुर में रसद अधिकारी (सप्लाई ऑफिसर) के माध्यम से ज्ञापन दिया गया.

पश्चिम चंपारण में आज भी इस्टेट राज

भाकपा(माले) राज्य सचिव कुणाल व पार्टी की केंद्रीय कमेटी के सदस्य व पश्चिम चंपारण के प्रभारी वीरेन्द्र प्रसाद गुप्ता ने 18 जुलाई को बयान जारी करके कहा है कि भाजपा-जदयू शासन में दलितों-गरीबों पर दमन की घटना में कोई कमी नहीं आ रही है, बल्कि वह निरंतर बढ़ती ही जा रही है. आज भी पश्चिम चंपारण में इस्टेटों का राज चलता है और दलितों का उत्पीड़न बदस्तूर जारी है. इन लोगों को भाजपा-जदयू का खुलेआम संरक्षण हासिल है.

रेलवे के निजीकरण के खिलाफ आइसा-आरवाईए का प्रतिवाद

आइसा और आरवाइए ने 9 जुलाई 2020 को रेल के निजीकरण और पदों में कटौती के खिलाफ राष्ट्रव्यापी प्रतिरोध दिवस मनाया.

इंनौस के राष्ट्रीय अध्यक्ष मनोज मंजिल ने इस मौके पर आरा रेलवे स्टेशन के समक्ष जमा आंदोलनकारियों को संबोधित करते हुए 150 प्राइवेट ट्रेनें चलाने व 50 प्रतिशत पदों को खत्म करने की मंजूरी को देश की रीढ़ पर हमला बताया. इलाहाबाद सहित कई जगह आरपीएफ जवानों ने जबरदस्ती आंदोलनकारियों को हटाने की कोशिश की जिसके चलते आंदोलनकारियों की उनसे झड़प भी हुई.

इलाहाबाद में मजदूर नेताओं पर एफआईआर

केंद्रीय ट्रेंड यूनियनों के आह्वान पर 3 जुलाई के राष्ट्रीय प्रतिरोध को योगी सरकार पचा नहीं पाई. इलाहाबाद सिविल लाइंस थाना पुलिस ने तीन जुलाई के कार्यक्रम को आधार बनाकर इंडियन रेलवे इम्प्लाइज फेडरेशन के राष्ट्रीय अध्यक्ष का. मनोज पाण्डेय, ऐक्टू राष्ट्रीय सचिव डा. कमल उसरी, ऐक्टू के जिलाध्यक्ष इलाहाबाद एससी बहादुर, एटक के अन्नू सिंह, जवाहरलाल विश्वकर्मा और सीटू के अविनाश मिश्रा सहित 25 लोगों पर महामारी अधिनियम के साथ ही धारा 188, 269, 270 लगाकर मुकदमा दर्ज किया गया है.

आजमगढ़ में आम रास्ते को जबरन बंद करने के विरुद्ध विरोध प्रदर्शन

आजमगढ़ जिले की सगड़ी तहसील व थाना जीयनपुर स्थित ग्राम जटांव (मालटारी बाजार) में आम रास्ते को जबरन बंद कर देने के विरुद्ध माले कार्यकर्ताओं ने 13 जुलाई को कलेक्टोरेट पर प्रदर्शन कर विरोध जताया. मांगपत्र देकर रास्ते को तत्काल खोलने की मांग की.

पंजाब में वामपंथी पार्टियों का प्रदेशव्यापी प्रदर्शन

पंजाब में 9 वामपंथी पार्टियों के मोर्चे ने आज पूरे प्रदेश में केंद्र सरकार की जन विरोधी नीतियों के खिलाफ संयुक्त प्रदर्शन किए. प्रदर्शनकारियों ने राजनीतिक व जन गोलबंदी पर प्रतिबंध हटाने की मांग की; साथ में, बुद्धिजीवियों पर दर्ज फर्जी केस वापस लेने, उन्हें रिहा करने, सीएए-एनआरसी विरोधी आंदोलन के दौरान गिरफ्तार सभी कार्यकर्ताओं को रिहा करने, खेती से जुड़े तीन नए केंद्रीय अध्यादेश वापस लेने, बिजली कानून 2020 वापस लेने, श्रम कानून में परिवर्तन वापस लेने और यूएपीए और पंजाब सिक्योरिटी एक्ट जैसे काले कानून वापस लेने की मांग उठाई.

कोयला मजदूरों की त्रिदिवसीय (2-4 जुलाई) हड़ताल

विगत 2 जुलाई से 4 जुलाई 2020 तक भारत के कोयला मजदूरों ने देशव्यापी हड़ताल का पालन किया. हड़ताल की संक्षिप्त पृष्ठभूमि यह है कि सरकार एक तरफ वृहत् सार्वजनिक कम्पनी कोल इंडिया लिमिटेड (सीआईएल) का बड़े पैमाने पर विनिवेश कर रही है, कोल ब्लाॅकों का निजी कंपनियों के बीच बड़े पैमाने पर आवंटन कर रही है, उसने कोयला उद्योगों में शत प्रतिशत विदेशी प्रत्यक्ष निवेश (एफडीआई) को कानूनी अनुमति दे दी है, तो दूसरी तरफ वर्षों से चली आ रही सन्डे ओवरटाइम का प्रणाली को खत्म कर रही है. सरकार के इन तमाम जन-विरोधी, मजदूर-विरोधी कदमों ने कोयला मजदूरों के बीच आशंका ओर आक्रोश को जन्म दिया था.