यह चुनाव तानाशाही बनाम लोकतंत्र का : भाजपा के घमंड को तोड़ेगा बिहार – दीपंकर भट्टाचार्य


दीघा से महागठबंधन समर्थित भाकपा(माले) प्रत्याशी का. शशि यादव के पक्ष में नागरिक सम्मेलन के साथ भाकपा(माले) महासचिव का. दीपंकर भट्टाचार्य ने बिहार में चुनाव प्रचार अभियान की शुरूआत की.

पीड़ित परिवार से मिलने हाथरस (बुलगढ़ी) पहुंची भाकपा(माले) की टीम


विगत 8 अक्टूबर 2020 भाकपा(माले) नेताओं के पांच सदस्यीय दल ने बुलगढ़ी (हाथरस) कांड में मृतका के परिवार से भेंट की. दल ने पीड़ित परिवार को ढांढ़स बंधाया और पूरे प्रकरण की शीर्ष अदालत के न्यायाधीश से जांच कराने व इस मामले में इंसाफ दिलाने की पीड़िता के परिजनों की मांग का समर्थन किया.

पहले चरण के लिए भाकपा(माले) प्रत्याशियों का नामांकन सफलतापूर्वक संपन्न


बिहार विधानसभा चुनाव में पहले चरण की आठ विधानसभा सीटों पर भाकपा(माले) प्रत्याशियों का नामांकन सफलतापूर्वक संपन्न हुआ. चुनाव के इस पहले चरण में तरारी, अगिआंव, डुमरांव, काराकाट, अरवल, घोषी, पालीगंज और आरा – ये सभी भाकपा(माले)के सघन कामकाज, आंदोलन और पहचान की सीटें शामिल हैं.

सीवान में सफाईकर्मियों के आंदोलन को मिली पहली जीत

करीब दो माह तक लगातार किए गए प्रयास से सिवान नगर परिषद में 253 सफाई मजदूरों के बीच ऐक्टू के बैनर से सफाई मजदूर यूनियन का गठन किया गया. अमित  कुमार इस यूनियन के अध्यक्ष बनाये गये हैं.

सिवान नगर परिषद के सभापति सिंधु सिंह और उप सभापति बबलू साह हैं. सिंधु सिंह भाजपा नेता मनोज सिंह के रिश्तेदार भी हैं. भाजपा को इस बात की चिढ़ है कि भाकपा(माले) ने नगर परिषद् में अपनी सफाई मजदूर यूनियन कैसे बना ली?

मजदूरों और रैयतों की एकता के सामने झुका डीवीसी प्रबंधन

बांझेडीह पावर प्लांट कोडरमा के लिए अधिगृहित भूमि के बदले रैयतों को मेंटेनेंस में नौकरी देने के मामले में डीवीसी प्रबंधन हमेशा किसी ना किसी बहाने टालते रही है. रैयतों को कागजी खानापूरी की जाल में और प्लांट में कार्यरत मजदूरों को विभिन्न तरीकों से उलझा रखने की साजिश करती रही है. स्थानीय सांसद और विधायक मजदूरों और रैयतों के बजाय हमेशा प्रबंधन की तरफदारी करते रहे हैं. यह पहला मौका था जब स्थानीय विधायक-सांसद की चुप्पी और असहयोग के बावजूद मजदूर यूनियन और रैयतों की बेमिसाल एकता के सामने डीवीसी प्रबंधन को झुकना पड़ा है.

जनजाति समुदाय के छात्रों के आंदोलन पर दमन की निंदा

राजस्थन के डुंगरपुर जिले में आदिवासी क्षेत्रों में सामान्य श्रेणी के योग्यता धारी अभ्यर्थियों की अनुपलब्धता के कारण विगत दो सालों से रिक्त पड़े शिक्षकों के 1167 पदों को जनजाति समुदाय के योग्यता धारी बेरोजगार युवकों को नियुक्ति देकर भरने की मांग को लेकर 18 दिनों से काकरी-डूंगरी पर जयपुर-मुंबई हाईवे को जाम कर शांति पूर्ण आंदोलन चल रहा था. 25 सितंबर को वहां पहुंची पुलिस द्वारा एक साजिश के तहत हिंसा को उकसावा दिया गया. आंदोलनकारियों व पुलिस के बीच पत्थरबाजी शुरू हो गई. कई लोग, खासकर छात्रा घायल हुए, गिरफ्रतार हुए और उनपर झूठे मुकदमे बनाए गए.

भाकपा(माले) नेता को रिहा करने की मांग, मुख्यमंत्री को पत्र भेजा

का. जनार्दन प्रसाद, भाकपा(माले) के झारखंड राज्य सचिव ने मुख्यमंत्री हेमुत सोरेन को पत्रा भेजकर कई बरसों से मेदिनीनगर जेल में बंद भाकपा(माले) के लोकप्रिय नेता काबीएन सिंह व अन्य साथियों को रिहा करने की मांग की है.

निजीकरण के खिलाफ मशाल जलाया

नेशनल मूवमेंट टू सेव रेलवे द्वारा घोषित कार्यक्रम के अनुसार 9 सितंबर 2020 को प्रयागराज में इंडियन रेलवे इम्प्लाइज फेडरेशन के राष्ट्रीय अध्यक्ष का. मनोज पाण्डेय के नेतृत्व में शान्तिपूर्ण व लोकतांत्रिक तरीके से शारीरिक दूरी बनाकर ठीक रात 9 बजे से 9 मिनट तक मशाल जलाकर रेलवे के निजीकरण, निगमीकरण व एनपीएस के खिलाफ विरोध किया गया. विरोध प्रदर्शन का नेतृत्व करते हुए का. मनोज पांडेय ने कहा कि मोदी सरकार जनता की सवारी को बेचकर देश को पुनः गुलामी की तरफ ले जाना चाहती है.