केंद्रीय ट्रेड यूनियनों का देशव्यापी धरना प्रदर्शन

श्रमिक अधिकारों को रौंदने वाली चार श्रम संहिताओं, विनाशकारी तीन कृषि कानूनों, बिजली की दरों में बेतहाशा वृद्धि तथा कर्मचारियों के हितों पर कुठाराघात करने वाला बिजली सुधार अधिनियम 2020, एलआईसी, रेलवे, कोयला खदानों के निजीकरण, केंद्र-राज्य तथा पेंशनरों के महंगाई भत्ते की वृद्धि पर रोक, अर्थव्यवस्था का सर्वनाश, अब तक की सबसे बड़ी बेरोजगारी, डीजल-पेट्रोल के दामों में बेतहाशा वृद्धि, विकराल महंगाई, असंगठित क्षेत्र तथा प्रवासी श्रमिकों की तबाही आदि के विरुद्ध 23 सितंबर 2020 को देश की 10 केंद्रीय ट्रेड यूनियनों तथा स्वतंत्र फेडरेशनों ने धरना-प्रदर्शन का देशव्यापी कार्यक्र

प्रधानमंत्री के जन्म दिवस को राष्ट्रीय बेरोजगार दिवस के रूप में मनाया

17 सितंबर 2020, प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी के जन्मदिन को देश के छात्र-नौजानों ने राष्ट्रीय बेरोजगार दिवस के रूप में मनाया.

बिहार में आशा का दो दिवसीय राज्यव्यापी प्रदर्शन

बिहार राज्य आशा कार्यकर्ता संघ (ऐक्टू-गोप गुट) के बैनर तले कोरोना वारियर्स और घर-घर की स्वास्थ्य कार्यकर्ता आशाओं ने विगत 22-23 सितंबर, 2020 को दोदिवसीय राज्यव्यापी विरोध दिवस मनाया और 200 से अधिक सीएचसी व पीएचसी तथा सिविल सर्जन कार्यालयों पर आक्रोशपूर्ण प्रदर्शन व धरना कार्यक्रम आयोजित कर सरकार से 1000 रु. प्रति माह मासिक मानदेय देने, पूर्व के समझौते का क्रियान्वयन, कोरोना भत्ता देने और बकाया भुगतान की मांग की. हजारों आशा कर्मियों ने इसमें उत्साहपूर्ण भागीदारी की.

ऐक्टू ने मजदूर विरोधी श्रम कोड की प्रतियां जलाईं

मोदी के नेतृत्व वाली केंद्र सरकार ने 44 महत्वपूर्ण श्रम कानूनों को रद्द करके श्रमिकों के अधिकारों को छीनने के अपने प्रयासों को तेज कर दिया है. संसद का मानसून सत्र, जो एक लंबे अंतराल के बाद हो रहा है, उसे इस तरह सूत्रबद्ध किया गया है कि लाखों श्रमिकों और किसानों से जुड़े महत्वपूर्ण मसलों पर चर्चा ही ना हो. जिस तरह से व्यापक विरोध के बावजूद मोदी सरकार तमाम मजदूर व किसान विरोधी कानून बना रही है, वह साफ तौर पर सरकार के मजदूर विरोधी और कारपोरेट समर्थक रुख को दर्शाता है.

देशव्यापी प्रदर्शनों के साथ खेग्रामस के अभियान का समापन : भारी तादाद में शामिल हुईं स्वयं सहायता समूह से जुड़ी महिलाएं

अखिल भारतीय खेत व ग्रामीण मजदूर सभा के बैनर तले विगत 16 अगस्त से 15 सितंबर 2020 तक एक विशेष अभियान चलाया गया. बिना किसी योजना के क्रूरतापूर्व किए गए लाॅकडाउन के कारण दिन ब दिन भुखमरी-अर्ध भुखमरी तथा रोजगार की कमी से बुरी तरह प्रभावित ग्रामीण आबादी – गरीबों और विभिन्न मेहनतकश वर्गों की मांगों को जानना, उनके पक्ष में मजबूती से खड़ा होना और सरकार पर यह दबाव बनाना कि वह युद्ध स्तर पर राहत अभियान चलाकर उनके जीवन, जीविका व मान-सम्मान की रक्षा करे – इस अभियान का लक्ष्य था.

बिजली के सवाल पर वाम दलों का धरना

उदयपुर में विगत 10 सितंबर को वाम दलों ने बिजली की बढ़ी हुई दरों को वापस लेने, लाॅकडाउन के दौर का बिजली बिल माफ करने और बिजली बिलों में त्रुटियों और मीटर से जुड़ी हुई शिकायतों को लेकर जिला कलेक्टर कार्यालय पर सयुंक्त धरना दिया. धरना को भाकपा(माले) के जिला सचिव चंद्रदेव ओला, माकपा के जिला सचिव प्रताप सिंह देवड़ा, भाकपा के जिला सचिव सुभाष श्रीमाली, ऐक्टू के राज्य सचिव सौरभ नरुका और माकपा के शहर सचिव राजेश सिंघवी संबोधित किया. धरना में प्रो. आरएन व्यास, पार्षद राजेश वसीठा, हीरा साल्वी, घनश्याम तावड, शंकरलाल चौधरी, रिंकू परिहार, फरीदा, आदि उपस्थित थे.

संसद से लेकर गांवों तक सड़कों पर उतरे लाखों किसान

विगत 14 सितंबर 2020 को, संसद सत्र के पहले दिन, अखिल भारतीय किसान संघर्ष समन्वय समिति (एआइकेएससीसी) के आह्वान पर देश भर में किसानों का जबर्दरस्त आंदोलन रहा. दिल्ली के जंतर मंतर से देश भर के गांवों तक लाखों किसानों ने मोदी सरकार द्वारा देश की खेती-किसानी को कारपोरेट और बहुराष्ट्रीय कंपनियों का गुलाम बनाने की नीतियों का विरोध किया. किसान मोदी सरकार के किसान विरोधी तीन अध्यादेशों को वापस लेने, बिजली सुधार कानून वापस लेने, पेट्रोल-डीजल की कीमतों को कम करने और ‘एक देश, एक एमएसपी’ की मांग कर रहे थे.

लोकतांत्रिक अधिकारों पर हमले के खिलाफ नागरिकों ने किया विरोध प्रदर्शन

यूएपीए जैसे काले कानून के तहत दिल्ली दंगों में कथित षड्यंत्र रचने के आरोप में उमर खालिद की गिरफ्तारी और माकपा महासचिव सीताराम येचुरी, भाकपा(माले) पोलित ब्यूरो की सदस्य कविता कृष्णन, स्वराज अभियान के योगेन्द्र यादव, सीपीआई की एनी राजा, जेएनयू की प्रोफेसर जयति घोष, डीयू के प्रोफेसर अपूर्वानंद, वृत्त चित्र निर्माता राजीव राय समेत कई विख्यात नागरिकों को दिल्ली पुलिस द्वारा झूठे आपराधिक मुकदमे मे फंसाये जाने की कार्रवाई का रांची के नागरिकों ने कड़ा विरोध किया है.

छात्रा से गैंगरेप के खिलाफ राज्यव्यापी प्रतिवाद : आंदोलन के दबाव में सभी आरोपी गिरफ्तार हुए

भोजपुर गैंगरेप की घटना के खिलाफ ऐपवा और छात्र-युवा संगठनों आइसा-इनौस ने विगत 8 सितंबर 2020 को राज्यव्यापी प्रतिवाद कार्यक्रम आयोजित किए. इस कार्यक्रम में राज्य के विभिन्न हिस्सों में महिलाओं, छात्रों व युवाओं ने सड़कों पर उतर कर या घरों के अंदर ही बैनर-तख्तियां लेकर प्रतिवाद किया.

9 सितंबर को छात्र-युवाओं ने प्रधानमंत्री मोदी से मांगा रोजगार

आरा में गोला मोहल्ला मोड़ पर भाकपा(माले) के युवा नेता व अधिवक्ता अमित कुमार गुप्ता उर्फ बंटी के नेतृत्व में छात्र-युवाओं ने रोषपूर्ण नारा लगाते हुए कैंडल सभा आयोजित किया. सभा को संबोधित करते हुए नेताओं ने कहा कि मोदी सरकार ने हर साल 20 लाख नौजवानों को रोजगार देने का वादा किया था और आज हर साल करोड़ों लोगों की छंटनी कर रही है. रेलवे, एसएससी, यूडीसी बैंक की नियुक्तियों का आवेदन लेकर भी परीक्षा नहीं ले रही है और जो छात्र-युवा सफल हुए हैं उनकी नियुक्ति नहीं करा रही है.