जबरन सेवानिवृत्ति का विरोध


बिहार सरकार द्वारा सरकारी सेवकों को 50 वर्ष की आयु पूरी होने पर कार्यदक्षता की समीक्षा के नाम पर जबरन सेवानिवृत्त करने के बिल्कुल ही अनुचित और मनमाने पूर्ण आदेश का विरोध बढ़ता ही जा रहा है.

प्रखंड कार्यालय पर प्रदर्शन


बिहार के मधुबनी जिलान्तर्गत बिस्फी में भाकपा(माले) की प्रखंड कमिटी के बैनर तले सैकड़ों ग्रामीण गरीबों और मजदूरों ने विगत 5 फरवरी 2021 को बिस्फी प्रखंड कार्यालय के समक्ष प्रदर्शन किया.

किसान संघर्षों के समर्थन में दिल्ली में नागरिक मार्च


पिछले दो महीने से अधिक से दिल्ली की सीमाओं पर किसान प्रदर्शन कर हैं. विगत 3 फरवरी 2021 को दिल्ली के नागरिक समाज ने भी सड़क पर उतरकर उनके आंदोलन के प्रति अपना समर्थन में जताया. सैकड़ों छात्र, नौजवान, मजदूर और आम लोग किसान संघर्षों के समर्थन में निकाले गए इस नागरिक मार्च में शामिल हुए.

तानाशाही फरमान वापस ले सरकार


आंदोलनकारियों को सरकारी नौकरी नही देने की नीतीश सरकार के फरमान के खिलाफ छात्र संगठन आइसा ने अपने राज्यव्यापी प्रतिरोध दिवस के तहत बेगूसराय में आक्रोश मार्च निकाला और मुख्यमंत्री नीतीश कुमार का पुतला जलाया.

छात्रों का जत्था जिला सचिव अभिषेक आनंद व नगर अध्यक्ष सोनू फर्नाज के नेतृत्व में अंबेडकर चौक स्थित जिला कार्यालय से निकल कर कचहरी रोड, नगर थाना चौक, नगरपालिका चौक होते हुए समाहरणालय के उत्तरी द्वार पर पहुंचा जहां मुख्यमंत्री नीतीश कुमार का पुतला फूंकने के बाद प्रदर्शन किया गया.

बिहार में तेज हुआ किसान आंदोलन


[भाकपा(माले) की पहल पर पहले सभी वाम दलों और फिर राजद व कांग्रेस को किसान आंदोलन के समर्थन में एकजुट कर 30 जनवरी को महात्मा गांधी के शहादत दिवस पर पूरे राज्य में मानव श्रृंखला बनाने की तैयारी चल रही है. इस बीच किसान आंदोलन को व्यापक बनाने और उसे गति देने के लिए कई कार्यक्रम आयोजित किए गए हैं.]

टीईटी अभ्यर्थियों पर लाठीचार्ज की निंदा


20 जनवरी 2021, भाकपा(माले) के राज्य सचिव कामरेड कुणाल ने गर्दनीबाग धरनास्थल पर शांतिपूर्ण प्रदर्शन कर रहे टीईटी अभ्यर्थियों पर भाजपा-जदयू सरकार द्वारा बर्बर लाठीचार्ज की घटना की कड़ी निंदा की है. उन्होंने कहा कि अभ्यर्थियों को नियुक्ति पत्र देकर स्कूलों में योगदान की गारंटी करवाने की बजाए सरकार लाठी-गोली की भाषा बोल रही है. हम सबको याद है कि विगत विधानसभा चुनाव में जब एनडीए गठबंधन को अपनी हार सुनिश्चित दिखलाई पड़ने लगी थी, तो उसने 19 लाख रोजगार देने का वादा किया था. लेकिन सत्ता पाते ही उस वादे को भुला कर पहले की ही तरह दमन का रूख अख्तियार कर लिया है.

राजभवन पर धारावाहिक धरना शुरू


काले कृषि कानूनों की वापसी, एमएसपी कानून की गारंटी तथा प्रदेश के गरीबों को दी गयी कुल वनभूमि को खतियानी बनाने इत्यादि मांगों को लेकर झारखंड के सभी वामपंथी दलों और किसान संगठनों द्वारा 21 से 30 जनवरी तक राजभवन के समक्ष धारावाहिक धरना कार्यक्रम शुरू किया गया. पहले दिन का मोर्चा भाकपा(माले) की झारखंड ईकाई ने संभाला .  

इसके पूर्व ज़िला स्कूल परिसर से ‘किसान एकता मार्च’ निकाला गया जो राजभवन पहुंचकर प्रतिवाद जन सभा और धरने में तब्दील हो गया.