वर्ष - 29
अंक - 39
19-09-2020

विगत 14 सितंबर 2020 को, संसद सत्र के पहले दिन, अखिल भारतीय किसान संघर्ष समन्वय समिति (एआइकेएससीसी) के आह्वान पर देश भर में किसानों का जबर्दरस्त आंदोलन रहा. दिल्ली के जंतर मंतर से देश भर के गांवों तक लाखों किसानों ने मोदी सरकार द्वारा देश की खेती-किसानी को कारपोरेट और बहुराष्ट्रीय कंपनियों का गुलाम बनाने की नीतियों का विरोध किया. किसान मोदी सरकार के किसान विरोधी तीन अध्यादेशों को वापस लेने, बिजली सुधार कानून वापस लेने, पेट्रोल-डीजल की कीमतों को कम करने और ‘एक देश, एक एमएसपी’ की मांग कर रहे थे. एआइकेएससीसी से जुड़े 250 किसान संगठनों के अलावा भारतीय किसान यूनियन (टिकैत) ने भी आज इन तीनों अध्यादेशों की वापसी की मांग पर विरोध स्वरूप धरना-प्रदर्शन आयोजित किए. इस आंदोलन में किसानों की देशव्यापी गोलबंदी देखी गई. सबसे ज्यादा 15 हजार किसान बरनाला (पंजाब) में जुटे जहां अखिल भारतीय किसान महासभा से जुड़ी पंजाब किसान यूनियन और भारतीय किसान यूनियन ढकोंदा ने मुख्य रूप से जन गोलबंदी की थी. बरनाला की इस विशाल रैली को किसान महासभा के राष्ट्रीय अध्यक्ष कामरेड रुल्दू सिंह ने संबोधित किया. पंजाब में पांच शहरों में हजारों की संख्या में किसानों ने प्रदर्शन किया. किसान महासभा के राष्ट्रीय महासचिव कामरेड राजाराम सिंह पटना के कार्यक्रम में मौजूद थे.

दिल्ली के जंतर मंतर पर भी अखिल भारतीय किसान संघर्ष समन्वय समिति से जुड़े किसान नेताओं ने प्रदर्शन किया. यहां एआइकेएससीसी के राष्ट्रीय संयोजक वीएम सिंह, स्वराज अभियान के योगेंद्र यादव, किसान महासभा के राष्ट्रीय उपाध्यक्ष का. प्रेमसिंह गहलावत, राष्ट्रीय सचिव पुरुषोत्तम शर्मा, एआइकेकेएमएस के सत्यवान, एआइकेकेएस के कामरेड विमल, एआइकेएस के भगत सिंह, कामरेड धरमपाल (मुरादाबाद) आदि दर्जनों नेता शामिल हुए. जय किसान आंदोलन के राष्ट्रीय संयोजक अभिक शाह और किसान महासभा के राष्ट्रीय उपाध्यक्ष कार्तिक पाल और राष्ट्रीय सचिव जयतु देशमुख कोलकाता में, भारतीय किसान यूनियन के अध्यक्ष राकेश टिकैत दिल्ली आते समय गाजीपुर बार्डर गाजियाबाद में पुलिस द्वारा रोक दिए गए. उन्होंने अपने साथियों के साथ वहीं धरना दिया. किसान महासभा के राष्ट्रीय उपाध्यक्ष फूलचंद ढेवा व राष्ट्रीय सचिव रामचन्द्र कुलहरि राजस्थान में, राष्ट्रीय उपाध्यक्ष जयप्रकाश नारायण राय उत्तर प्रदेश में, राष्ट्रीय सचिव अशोक प्रधान उड़ीसा में, राष्ट्रीय उपाध्यक्ष डी हरिनाथ आंध्र प्रदेश में और राष्ट्रीय सचिव पूरन महतो झारखंड में प्रदर्शनों का नेतृत्व किए.

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महामहिम राष्ट्रपति को ज्ञापन भेजा

14 सितम्बर 2020 को अपने आन्दोलन के माध्यम से किसानों ने देश भर से देश के महामहिम राष्ट्रपति को ज्ञापन प्रेषित किए हैं. जिसमें लिखा है – हम भारत के किसान, अपने संगठन ‘अखिल भारतीय किसान संघर्ष समन्वय समिति, एआईकेएससीसी’, जिसके 250 से अधिक किसान तथा कृषि मजदूर संगठन घटक हैं, आपको यह पत्र लिखकर यह उम्मीद कर रहे हैं कि भारत की सरकार ने कोरोना लाॅकडाउन के दौरान जो तेज हमला देश भर के किसानों पर किया है, उसका विरोध करने में और किसानों को बचाने में आप हमारा साथ देने की कृपा करेंगे.

हम बताना चाहते हैं कि इस बीच जैसे-जैसे कोविड-19 महामारी आगे बढ़ती गयी है. हमने कड़ी मेहनत करके यह सुनिश्चित किया है कि देश के खाद्यान्न भंडार भरे रहें तथा इतना पर्याप्त अनाज देश में मौजूद है कि किसी भी नागरिक को भूखा रहने की जरूरत नहीं पड़ेगी. यही वह आधार है जिस पर हम खड़े होकर उम्मीद करते हैं कि आप सब एक आवाज में सुनिश्चित करेंगे कि देश के कड़ी मेहनत करने वाले किसान व मजदूर, जो देश की कुल श्रमशक्ति का आधा से ज्यादा हिस्सा हैं, इस वजह से संकट का सामना ना करें कि उनकी समस्याओं को किसी ने सुना ही नहीं.

हमें इस बात से बहुत निराशा हुई कि जब केंद्र की मोदी सरकार ने अपने कृषि सुधार पैकेज की घोषणा की, तो उसमें ना केवल हमारी समस्याओं को संबोधित नहीं किया गया, बल्कि उन्हें बढ़ा दिया गया है. सरकार ने एक ओर तीन नये अध्यादेश पारित किये हैं जो ग्रामांचल में तमाम किसानी की व्यवस्था को, खाद्यान्न की खरीद, परिवहन, भंडारण, प्रसंस्करण, बिक्री को, यानी तमाम खाने की श्रंखला को ही बड़ी कम्पनियों के हवाले कर देगी. किसानों के साथ छोटे दुकानदारों तथा छोटे व्यवसायियों को बरबाद कर देगी. इससे विदेशी कम्पनियां व घरेलू कारपोरेट तो मालामाल हो जाएंगे, पर देश के सभी मेहनतकश, विशेषकर किसान नष्ट हो जाएंगे.

अमल किये गए यह तीन किसान विरोधी अध्यादेश 5 जून 2020 को जारी किये गए थे और अब इन्हें संसद में पारित कराकर कानून की सूरत देने की योजना है. इन तीनों अध्यादेशों, (क) कृषि उपज, वाणिज्य एवं व्यापार (संवर्धन और सुविधा) अध्यादेश 2020, (ख) मूल्य आश्वासन पर (बंदोबस्ती और सुरक्षा) समझौता कृषि सेवा अध्यादेश 2020, (ग) आवश्यक वस्तु अधिनियम (संशोधन) 2020 को वापस लिया जाना चाहिए और इन्हें कानून नहीं बनने देना चाहिये. ये अध्यादेश अलोकतांत्रिक हैं और कोविड-19 तथा राष्ट्रीय लाॅकडाउन के आवरण में अमल किये गए हैं. ये किसान विरोधी हैं. इनसे फसल के दाम घट जाएंगे और बीज सुरक्षा समाप्त हो जाएगी. इससे उपभोक्ताओं के खाने के दाम बढ़ जाएंगे. खाद्य सुरक्षा तथा सरकारी हस्तक्षेप की सम्भावना समाप्त हो जाएगी. ये अध्यादेश पूरी तरह भारत में खाने तथा खेती व्यवस्था में काॅरपोरेट नियंत्रण को बढ़ावा देते हैं और उनके जमाखोरी व कालाबाजारी को बढ़ावा देंगे तथा किसानों का शोषण बढ़ाएंगे. किसानों को ‘वन नेशन वन मार्केट’ नहीं ‘वन नेशन वन एमएसपी’ चाहिए.

दूसरा बड़ा खतरनाक कदम है बिजली बिल 2020. इस नए कानून में गरीबों, किसानों तथा छोटे लोगों के लिए अब तक दी जा रही बिजली की तमाम सब्सिडी समाप्त हो जाएगी, क्योंकि सरकार का कहना है कि उसे अब बड़ी व विदेशी कम्पनियों को निवेश करने के लिए प्रोहत्साहन देना है और एक कदम उसमें उन्हे सस्ती बिजली देना भी है. इसलिए अब सभी लोगों को एक ही दर पर, बिना स्लेब के लगभग 10 रुपये प्रति यूनिट बिजली दी जाएगी. किसानों की सब्सिडी बाद में नकद हस्तांतरित की जाएगी. केन्द्र सरकार को यह बिल वापस लेना चाहिए, कोरोना दौर का किसानों, छोटे दुकानदारों, छोटे व सूक्ष्म उद्यमियों तथा आमजन का बिजली का बिल माफ करना चाहिए. डीबीटी योजना को अमल में नही लाना चाहिए.

जब भाजपा की सरकार 2014 में बनी थी, उस समय से अब तक डीजल पर एक्साइज डयूटी 28 रुपए प्रति लीटर व पेट्रोल पर 24 रुपये प्रति लीटर बढ़ा दी गयी है, जिसके कारण वैट ड्यूटी भी बढ़ गयी है. हालांकि तब अन्तर्राष्ट्रीय स्तर पर तेल के दाम 106 डालर प्रति बैरल थे और आज 40 डालर प्रति बैरल हैं. इसके बावजूद डीजल-पेट्रोल के दाम केंद्र की सरकार ने बढ़ा रखे हैं. इस परिस्थिति में हम इस उम्मीद के साथ आपको यह पत्र लिख रहे हैं कि आप इन तीनों अध्यादेशों को वापस करायेंगे और बिजली बिल 2020 और डीजल के दाम में टैक्स घटाकर उसका दाम आधा कराएंगे.

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बिहार में किसान महासभा का कार्यक्रम

एआईकेएससीसी के आह्वान पर अखिल भारतीय किसान महासभा की बिहार इकाई ने राज्य में दर्जनों स्थानों पर कार्यक्रम आयोजित किया. किसानों ने संगठित होकर मार्च निकाला तथा विरोध सभा आयोजित की.

राजधानी पटना में ‘खेती लागत खर्च बढ़ाना बंद करो’, ‘डीजल की बढ़ी कीमतें वापस लो’, ‘पेट्रोलियम पदार्थाे को भी जीएसटी में शामिल करो’, ‘बिजली का निजीकरण नहीं चलेगा, बिजली बिल 2020 वापस लो’, ‘किसानों को सम्पूर्ण कर्ज से मुक्त करो’ आदि नारों की तख्तियां लिए व नारे लगाते हुए किसान पटना के धरनास्थल गर्दनीबाग में पहुंचे जहां आमसभा आयोजित हुई.

कार्यक्रम में अखिल भारतीय किसान महासभा के राष्ट्रीय उपाध्यक्ष शिवसागर शर्मा, राज्य सह सचिव उमेश सिंह, राज्य कार्यालय सचिव अविनाश पासवान के साथ दर्जनों किसान नेता कार्यकर्ता शामिल थे.

नेताओं ने कहा कि ये अध्यादेश सरकार द्वारा सरकारी खरीद प्रणाली और इस व्यवस्था से जुड़े लाखों लोगों के रोजगार को खत्म करने का प्रयास हैं. यह मंडी व्यवस्था से जुड़ी लाखों एकड़ जमीन को कम्पनियों को सस्ते दाम पर बेचने की साजिश और सरकारी समर्थन मूल्य घोषित करने से सरकार के भागने की तैयारी हैं. फसलों की लागत का डेढ़ गुणा (सी 2 $ 50 %) देने के वायदे से धोखाधड़ी हैं. ये जन वितरण प्रणाली को खत्म करने, इस प्रणाली से जुड़े करोड़ों लोगों का रोजगार छीनने और गरीबों को भुखमरी की स्थिति में धकेल देने की साजिश है. अरबों की सम्पत्ति, गोदाम व जमीन के घोटाले की तैयारी है. यह किसान उत्पाद के व्यापार और वाणिज्य पर कारपोरेट का पूर्ण आधिपत्य के बाद मंहगे अनाज, तेलहन, दलहन आदि की मनमानी कीमत के जरिए जनता का दोहन व बदहाली का इंतजाम है. किसानों ने कहा कि मोदी सरकार इन आध्यदेशों को अविलंब वापस ले. हमें एक राष्ट्र एक बाजार नहीं चाहिए, हमें एक राष्ट्र, एक एमएसपी चाहिए.

पटना ग्रामीण के नौबतपुर में राज्य सहसचिव डा. कृपानारायण सिंह और पालीगंज में रविंद्र सिंह, डा. श्यामनंदन शर्मा, संत कुमार, दिलीप ओझा के साथ दर्जनों किसान शामिल हुए. दुल्हिन बाजार में मंगल यादव, विक्रम में रामजन्म यादव, बिहटा में राजेश गुप्ता, मनेर में रामकुमार सिंह, मसौढ़ी में श्री भगवान सिंह व सत्नारायण वर्मा, धनरूआ में निरंजन वर्मा, पुनपुन में मुन्ना चौहान, संपतचक में हृदय नारायण यादव, सुरेश ठाकुर व सत्यानंद प्रसाद, फतुहा में शैलेन्द्र यादव ने प्रतिवाद कार्यक्रमों का नेतृत्व किया. जिले 9 प्रखंडों के दर्जनों गांवों में सफल प्रतिवाद कार्यक्रम हुआ.

पटना सिटी के जेपी चौक पर जल्ला किसान संघर्ष समिति के कार्यकर्ताओं ने प्रदर्शन किया. इसका नेतृत्व अखिल भारतीय किसान महासभा राज्य के उपाध्यक्ष शंभू नाथ मेहता, जल्ला किसान संघर्ष समिति के अध्यक्ष मनोहर लाल,  जगरनाथ महतो, श्रवण मेहता व चंद्रभूषण शर्मा ने किया. वाल्मिकी प्रसाद, आत्माराम, रंजन मेहता, राजेश कुमार, रामेश्वर महतो, बद्री सिंह आदि ने प्रदर्शन में भाग लिया.

बेगूसराय में अखिल भारतीय किसान महासभा और बिहार राज्य किसान सभा ने ट्रैफिक चैक से अम्बेदकर चौक तक मार्च निकाला, प्रतिवाद सभा की और प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी का पुतला दहन किया. कार्यक्रम में अखिल भारतीय किसान महासभा के नेता बैजू सिंह, बिहार राज्य किसान सभा के दिनेश सिंह अरविंद सिंह, नवल किशोर, चन्द्रदेव वर्मा, राजेश श्रीवास्तव, अंजनी महतो, रानी सिन्हा, सुरेश यादव और सीटू नेता सुरेश प्रसाद सिंह शामिल थे.

भोजपुर जिला के 9 प्रखंडों में कार्यक्रम आयोजित हुआ. राज्य उपाध्यक्ष चंद्रदीप सिंह ने अगियांव बाजार में कार्यक्रम में हिस्सा लिया. नवादा में किसान नेता किशोरी प्रसाद के नेतृत्व में जिला समाहरणालय पर प्रदर्शन किया गया. शेखपुरा में राज्य परिषद सदस्य कमलेश कुमार मानव की अगुआई में कार्यक्रम आयोजित किया गया. नालंदा जिला के थरथरी प्रखंड अंतर्गत धर्मपुर गांव में राज्य कमेटी सदस्य मुनीलाल यादव सहित दर्जनों लोगों ने प्रतिवाद कार्यक्रम में हिस्सेदारी की. अरवल के निघवां गांव में राज्य सचिव डा. रामाधार सिंह दर्जनों किसानों के साथ प्रतिवाद कार्यक्रम में शामिल रहे. समस्तीपुर के ताजपुर में भी किसानों ने प्रदर्शन किया. वैशाली जिला के राजापाकर प्रखंड के रंदहा गांव में राज्य अध्यक्ष विशेश्वर यादव तथा बहुआरा गांव में रामनाथ सिंह ने अपने साथियों के साथ कार्यक्रम में भाग लिया.

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उत्तर प्रदेश: धरना-प्रदर्शन कर ज्ञापन सौंपा

मोदी सरकार द्वारा लाये गये कृषि संबंधी तीन अध्यादेशों, बिजली बिल 2020, हरियाणा के कुरूक्षेत्र में भाजपा सरकार द्वारा किसानों पर किये गये लाठीचार्ज आदि के खिलाफ अखिल भारतीय किसान महासभा (एआईकेएमएस) ने उत्तर प्रदेश के विभिन्न जिलों में प्रदर्शन कर केंद्र सरकार को संबोधित ज्ञापन प्रशासनिक अधिकारियों को सौंपा.

आजमगढ़ में किसान महासभा के प्रदेश अध्यक्ष कामरेड जयप्रकाश नारायण के नेतृत्व में जिलाधिकारी कार्यालय पर प्रदर्शन कर ज्ञापन दिया गया. प्रर्दशन में मुख्य रूप से भाकपा(माले) राज्य स्थायी समिति के सदस्य का. ओमप्रकाश सिंह और किसान महासभा के जिला संयोजक विनोद सिंह शामिल रहे. इस अवसर पर का जयप्रकाश नारायण ने कहा कि सरकार द्वारा प्रस्तावित अध्यादेश भारतीय कृषि को कारपोरेटीकरण की तरफ ले जायेगा. पहले से ही संकटग्रस्त खेती और बदहाल हो जायगी.

रायबरेली में प्रदर्शन के बाद राष्ट्रपति को सम्बोधित ज्ञापन जिला प्रशासन को सौंपा गया. इस मौके पर अखिल भारतीय किसान महासभा के जिलाध्यक्ष फूलचंद मौर्य ने कहा कि किसानों को बर्बाद करने वाले तीनों अध्यादेशों को लाकर मोदी सरकार ने किसानों व कृषि व्यापार को पूरी तरह से बड़ी कम्पनियों के हवाले करने कर रही है. प्रदर्शन मे जिला उपाध्यक्ष अंसार अहमद, सचिव सुरेश चंद शर्मा, रामधनी पासी, देशराज यादव, रामनरेश यादव, रामसजीवन चौधरी, ब्रजेश चौधरी, राजमोहन विश्वकर्मा आदि शामिल थे.

मथुरा में किसान महासभा ने जिलाधिकारी कार्यालय के समक्ष धरना दिया. धरने को भाकपा(माले) राज्य कमेटी सदस्य नसीर शाह एडवोकेट, महासभा के राज्य उपाध्यक्ष नत्थीलाल पाठक, किसान सभा के राज्य उपाध्यक्ष छतर सिंह एडवोकेट, जिला सचिव रामवीर सिंह, अध्यक्ष लियाकत खान ने संबोधित किया. धरना स्थल पर ही आकर जिलाधिकारी मथुरा के प्रतिनिधि एसडीएम ने राष्ट्रपति के नाम संबोधित ज्ञापन लिया. कार्यक्रम में नईम शाह एडवोकेट, विष्णु पाठक, अमर सिंह,  सुधीर चौधरी, देवेंद्रसिंह, हुसैन शाह, पप्पू, डीके गोयल, रमजानी सहित बड़ी संख्या में किसान व महिलाएं शामिल थीं.

गोरखपुर की बांसगांव तहसील में किसान महासभा की राज्य कमेटी के सदस्य डा. प्रभुनाथ सिंह के नेतृत्व में जुलूस निकाल कर ज्ञापन दिया गया और एक राष्ट्र एक एमएसपी की मांग की गई. प्रर्दशन में मुख्य रूप से विशुनदेव, श्यामाचरन, नन्हें, बृजलाल आदि शामिल रहे. लखीमपुर खीरी की पलिया तहसील में प्रर्दशन कर उपजिलाधिकारी के माध्यम से राष्ट्रपति को संबोधित ज्ञापन दिया गया. एक अन्य ज्ञापन में आजादी के समय से तराई में सरकारी विभागों वनभूमि पर बसे परिवारों को उस भूमि पर मालिकाना हक देने की सरकार से मांग की गई. प्रर्दशन में मुख्य रूप से कमलेश राय, रामसेवक सिंह, सुरेन्द्र, अनिल कुमार, राजाराम आदि शामिल थे.

जालौन जिले में एक्टू तथा किसान महासभा के नेतृत्व में प्रदर्शन कर राष्ट्रपति को संबोधित ज्ञापन दिया गया. गाजीपुर जिले में दो और चंदौली में तीन केंद्रों पर प्रतिवाद कार्यक्रम किया गया. बनारस में पिंडरा तहसील पर वाम संगठनों ने संयुक्त प्रर्दशन कर ज्ञापन दिया. सोनभद्र और सीतापुर में भी जिलाधिकारी कार्यालय पर प्रदर्शन कर ज्ञापन दिया गया.

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अन्य राज्यों में भी प्रतिवाद कार्यक्रम हुए

नैनीताल (उत्तराखंड) के लालकुआं में किसानों को गुलामी की ओर धकेलने वाले तीन अध्यादेशों तथा हरियाणा की भाजपा सरकार द्वारा किसानों पर हुए लाठीचार्ज के विरोध में अखिल भारतीय किसान महासभा और भाकपा(माले) कार्यकर्ताओं द्वारा संयुक्त रूप से प्रदर्शन किया गया और हरियाणा की खट्टर सरकार का पुतला दहन किया गया.

पुतला दहन के बाद होनेवाली सभा को किसान महासभा के बिन्दुखत्ता सचिव पुष्कर दुबड़िया, भाकपा(माले) जिला सचिव डा. कैलाश पांडेय व बिन्दुखत्ता सचिव ललित मटियाली ने संबोधित किया. कार्यक्रम में विमला रौथाण, नैन सिंह कोरंगा, स्वरूप सिंह दानू, हरीश भंडारी, राजेंद्र शाह, विनोद कुमार, कमल जोशी, नारायणनाथ गोस्वामी, पनी राम, हरीश राम, पान सिंह कोरंगा, गोविंद कोरंगा, कुंवर सिंह चैहान, मोहन सिंह थापा, गोपाल बोरा, विनोद टम्टा, हरीश टम्टा, आनंद सिंह दानू, सुरेंद्र खडाई, नैन सिंह, नारायण सिंह आदि मौजूद थे. अल्मोड़ा में भी प्रतिवाद कार्यक्रम आयोजित हुआ.

झारखंड के रामगढ़, गिरीडीह आदि जिलों में, उड़ीसा के भुवनेश्वर, रायगढ़ा, पूरी आदि जिलों में, राजस्थान के झुंझुनू जिले के ठिन्चोली, चारावास, झारोड़ा, घरडाना आदि में धरना दिया गया. आंध्र प्रदेश, पान्डूचेरी, पश्चिम बंगाल, मध्य प्रदेश, छत्तीसगढ़, हरियाणा में भी अखिल भारतीय किसान महासभा ने कार्यक्रम आयोजित किए. तमिलनाडु में किसान महासभा की यूनिट ने किसानों की मांगपत्र पर 30 हजार किसानों के हस्ताक्षर कराए हैं.

अभी भी विरोध प्रदर्शनों का सिलसिला जारी है. 5000 से अधिक स्थानों पर 10 लाख से अधिक किसान शामिल हुए हैं. भारत के 20 राज्यों में विरोध प्रदर्शन हुए हैं. इन विरोध प्रदर्शनों के आकार और संख्या से यह स्पष्ट है कि किसान इन कानूनों को पारित करने के पक्ष में नहीं हैं और अगर इन प्रतिगामी समर्थक काॅरपोरेट और किसान विरोधी कानूनों को पारित करने का प्रयास किया जाता है तो पूरे देश में लगातार बड़े पैमाने पर विरोध प्रदर्शन होंगे.
   

– पुरुषोत्तम शर्मा    

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