वर्ष - 29
अंक - 38
12-09-2020

बिहार राज्य स्थानीय निकाय कर्मचारी महासंघ (ऐक्टू से संबद्ध) द्वारा विगत 11 सितंबर 2020 को केंद्र व राज्य सरकार के सफाई कर्मी व मजदूर विरोधी नीति के खिलाफ राज्य के शहरी निकायों पर प्रधानमंत्री व मुख्यमंत्री का पुतला दहन किया गया.

रक्सौल नगर परिषद के कर्मचारियों द्वारा नगर सरकार भवन के सामने प्रधानमंत्री एवं बिहार के मुख्यमंत्री का पुतला दहन किया गया. पुतला दहन कार्यक्रम में सैकड़ों कर्मचारियों ने भाग लिया. पुतला दहन में राज्य सचिव चंद्रशेखर कुमार, सुनील कुमार, सुभाष राऊत, महेंद्र प्रसाद, सुबोध महतो, शिवमति देवी, गायत्री देवी, प्रमिला देवी, सुदमिया देवी, आद्या देवी, यशोदा देवी, सुनयना देवी आदि सैकड़ो कर्मचारी मौजूद थे. कर्मचारियों ने सरकार विरोधी जोशीले नारे लगाए.

कर्मचारियों के मांगों में सभी अनुबंध, मानदेय संविदा, दैनिक कर्मचारियों की सेवा नियमित करने, काम के घंटे को पूर्ववत की 8 घंटे करने, श्रम कानून 44 के बदले 4 लेबर कोड समाप्त कर श्रम अधिकारों की सुरक्षा बनाये रखने, पुरानी पेंशन योजना को बहाल करने, कर्मचारियों को 50 वर्षों की सेवा के बाद जबरन सेवानिवृत्त करने के आदेश को रद्द करने, सभी कर्मचारियों का 50 लाख का बीमा कराने, करोना से सुरक्षा के लिए मास्क, ग्लोब्स, पीपी किट आदि अबिलम्ब उपलब्ध कराने, सभी कर्मचारियों का ईपीएफ कटौती कराने, कर्मचारियों की उपस्थिति वार्ड आयुक्त के अंतर्गत नहीं बल्कि जमादार की जिम्मेदारी में सौंपने, सभी कर्मचारी अधिकारी, वार्ड आयुक्त, मुख्य पार्षद, उप मुख्य संचेतक, निरीक्षक अपने अपने अधिकार का पालन करें और किसी के अधिकार का अतिक्रमण नहीं करें इसकी गारंटी करने, सभी गाड़ियों को कार्यशाला में लगाने तथा लाॅग बुक पर जमादार हस्ताक्षर नहीं करें इसे सुनिश्चित करने की मांग प्रमुख थी.

बिहार शरीफ नगर निगम गेट के समक्ष निकाय कर्मचारी विरोधी नीति के खिलाफ नरेंद्र मोदी और नीतीश कुमार का पुतला दहन किया गया. राज्यव्यापी कार्यक्रम के तहत सफाई कर्मियों ने शारीरिक दूरी का पालन करते हुए सभी निकाय कर्मचारियों को स्थाई करने, निजीकरण की नीति व ठेका प्रथा वापस लेने, 21000 मासिक न्यूनतम मजदूरी लागू करने, कोरोना संक्रमण महामारी में सफाई कर्मचारियों को एक माह का अतिरिक्त वेतन का शीघ्र भुगतान करने, ईपीएफ कटौती की सूची जारी करने, हर माह की 7 तारीख तक वेतन भुगतान की गारंटी करने तथा सफाई कर्मचारियों को काम से हटाने और रखने का गोरखधंधा बंद करने आदि मांगों को लेकर नारे लगाए.

नगर कामगार यूनियन के अध्यक्ष विक्की कुमार व सचिव मनोज रविदास ने कहा कि डबल इंजन वाली सरकार सफाई मजदूर विरोधी है. भाकपा(माले) नेता रामप्रीत केवट ने कहा कि देश में मजदूरों व कर्मचारियों के अधिकार को खत्म कर सरकार मजदूरों को गुलामी का जीवन जीने पर मजबूर कर रही है. कार्यक्रम में ऐक्टू नेता मकसूदन शर्मा, महेश रविदास, संटू रविदास, संजय कुमार, धर्मेंद्र रविदास, विशाल डोम, बब्लू दास, रामेश्वर दास आदि शामिल रहे.

मोतिहारी नगर परिषद के कर्मचारियों ने सरदार पटेल चैक पर प्रधानमंत्री एवं बिहार के मुख्यमंत्री का पुतला दहन किया. इसमें भाग्य नारायण चौधरी, भूपेंद्र कुमार लाल, भरत राम, वीर बहादुर सिंह, संजीव कुमार सिंह, विकास पासवान, त्रिलोकी प्रसाद, सोनू कुमार, संदीप कुमार, सुनील कुमार, फिरोज खान, विष्णुदेव प्रसाद यादव आदि शामिल थे.

सिवान में सफाई कर्मियों का संगठन बना
सिवान नगर परिषद में कुल 253 सफाई मजदूर काम करते हैं. वे जो गली-गली में कचरा उठाते हैं. ये लोग स्थायी नौकरी में नहीं हैं बल्कि संविदा पर काम करते हैं. इनका वेतन मात्र 8 हजार रु. है. वहीं स्थायी नौकरी वालों का वेतन 18 हजार रु. है. ऐसे लोगों की संख्या 10 से भी कम है.

विगत 2 सितम्बर को अस्थायी नौकरी करनेवाले लोगों की समय सीमा समाप्त हो गई तथा इन लोगों की जगह दूसरे मजदूरों को रख कर नगर परिषद ने काम करवाने की कोशिश की. इसी दौरान मजदूरों का पार्टी से संपर्क हुआ. फिर एक बैठक आयोजित की गई जिसमें में 243 सफाई कर्मी शामिल हुए और इन सबने अमित कुमार को अपना अध्यक्ष चुना. भाजपा ने भी सफाई कर्मियों के बीच अपनी यूनियन बनाना चाहा, लेकिन वह असफल रही.

सफाई कर्मियों ने जब लगातार दो दिन काम बंद किया तो नगर परिषद ने तुरत उन्हें काम पर बुला लिया. इस जीत का शहर के सफाई मजदूरों पर काफी असर पड़ा. हाल में एक मजदूर को चोरी करने के आरोप में बाहर कर दिया गया है. इस सवाल पर आंदोलन की योजना बनाई जा रही है. नगर परिषद सिवान के सफाई कर्मियों द्वारा भी जेपी चौक पर मुख्यमंत्री और प्रधानमंत्री का पुतला दहन किया गया.

 

saf