वर्ष - 29
अंक - 38
12-09-2020

भाकपा(माले) के वरिष्ठ नेता गौतम लाल मोरीला और शंकरलाल मीणा ने भाजपा के वरिष्ठ नेता और पूर्व ग्रहमंत्री गुलाबचंद कटारिया के उस वक्तव्य की आलोचना की है जिसमें उन्होंने आदिवासी समाज के लोगों द्वारा ‘जय जोहार’ कहकर अभिवादन किये जाने को आपत्तिजनक व खतरनाक बताया है. हाल ही में स्थानीय इलेक्ट्राॅनिक मीडिया में पूर्व गृहमंत्री गुलाबचंद कटारिया का एक आये वीडियो फुटेज सामने आया है जिसमें वे जिला कलेक्टर, उदयपुर से ‘जय जोहार’ के संबोधन पर अपने विचार साझा कर रहे हैं.

नेताओं ने कहा कि समस्त देश का आदिवासी समाज एक ही है और झारखंड की तरह ही दक्षिण राजस्थान का आदिवासी समाज भी ‘जय जोहार’ के संबोधन का इस्तेमाल करे तो इसमें समस्या क्या है? क्या कटारिया व उनकी पार्टी भाजपा देश में आदिवासी समाज के बीच या अन्य समाजों के साथ आपस में सांस्कृतिक आदान-प्रदान के खिलाफ हैं?

उन्होंने कहा कि ‘जय जोहार’ का संबोधन न केवल आदिवासी अस्मिता तथा गौरव की बल्कि जल-जंगल-जमीन पर उनके अधिकार और स्वायतता की उनकी आकांक्षा की भी अभिव्यक्ति है. आज यह समस्त आदिवासी समाज को संविधान की छठी सूची में शामिल करने, पेसा ऐक्ट जैसे कानूनों में लक्षित सीमित स्वायतता और आरक्षण जैसे सवालों पर चल रहे देशव्यापी आदिवासी आंदोलन की पहचान बनकर उभरा है. कटारिया का कथन आदिवासी समाज के सम्मान पर चोट है जिसको कत्तई बर्दाश्त नहीं किया जायेगा.

अभी हाल ही में राजस्थान के उदयपुर जिले के सलूम्बर में आदिवासी समुदाय के दायमा गोत्र की कुलदेवी सोनार माता के देवरे पर नेजा चढ़ाने की घटना को लेकर श्री कटारिया व भाजपा ने एक साजिश के तहत सरासर झूठा प्रचार चलाकर समाज को गुमराह करने की कोशिश की जो आदिवासी समाज की आकांक्षाओं को प्रतिबिंबित करने वाली राजनीतिक पार्टी बीटीपी और वामपंथ को बदनाम करने की बदनियती से प्रेरित है. उन्होंने पुलिस द्वारा सलूम्बर में सोनार माता के देवरे पर नेजा चढ़ाने से रोकने की घटना और इस पर राज्य सरकार की चुप्पी पर भी सवाल उठाया.

भाकपा(माले) ने सलूम्बर की समग्र घटना और उसमें पुलिस की भूमिका की निष्पक्ष न्यायिक जांच और दोषियों पर कठोर कार्रवाई की मांग की है.

– चन्द्रदेव ओला,   
जिला सचिव, भाकपा(माले) उदयपुर