वर्ष - 28
अंक - 38
07-09-2019

नीतीश सरकार की सात निश्चय योजना में हर घर को लगातार बिजली, स्वच्छ पेयजल, पक्की नाली व गली देने की बातें शामिल हैं. लेकिन सरकार की यह योजना उस गांवों में लागू नहीं हुई हैं जिन गांवों को केंद्र कर सरकार ने उक्त योजना का ढिंढोरा पीट रखा है. कुर्था प्रखंड के वैसे गांवों में पक्की नाली व गली व अन्य सरकारी सुविधाएं नगण्य है, जहां इसकी सबसे ज्यादा जरूरत है.

कुर्था प्रखंड के मानिकपुर पंचायत का एक गांव है – पुलंदरपुर/राजेपुर. यहां मुसहर जाति के करीब 40 घर हैं. मुसहर टोला में गली का पक्कीकरण नहीं हुआ है. नाली भी बनी है तो आधी-अधूरी, बरसात में इस टोले पर आना-जाना मुश्किल हो जाता है. इस टोला में जो चार चापाकल गड़े हैं, इनमें महज एक ही चालू है. नल-जल योजना के तहत बने नल का पानी घरों में नहीं पहुंचता. शौचालय निर्माण के मामले में तो हालत और भी बुरी है. मुसहर जाति के एक भी घर में शौचालय निर्माण नहीं हुआ है. विकास के मामले में अन्य जातियों की बहुलता वाले मुहल्लों की स्थिति भी कोई अच्दी नहीं है. गली-नली का पक्कीकरण तो हो गया है. लेकिन शौचालय निर्माण के मामले में हर जाति के टोलों की एक ही दशा है.
 
पुलन्दरपुर और राजेपुर दोनों गांवों के बीच मात्र एक गली का फर्क है. दोनों गांवों में पासी जाति के कुल 105 घरों में 90 घरों में शौचालय निर्माण नहीं हुआ है. यादव जाति के 178 घरों में 163 में शौचालय नहीं से है. उसी प्रकार रविदास, धोबी, नाई, बनिया, चंद्रवंशी, पासवान जातियों के घरों में शौचालय निर्माण की स्थिति तो और बुरी है. लेकिन इस गांव को ओडीएफ घोषित कर दिया गया है. पंचायत के मुखिया से जब इस बारे में पूछा गया तो उन्होंने इस मामले में कोई भूमिका न होने की बात कही. उन्होंने मांझी टोला में नली-गली पक्कीकरण का योजना लिए जाने की बात तो की, लेकिन यह योजना कब बनेगी, उन्होंने इसका कोई निश्चित समय नहीं बताया. इतना ही नहीं, इस गांव में लोगों को राशन भी समय पर और हर माह भी नहीं मिलता.

सालेपुर (लारी) में मुसहर समुदाय के 150 से ज्यादा घर हैं. यहां सिर्फ 4 चापाकल चालू हैं जबकि 5 चापाकल बंद हैं. यह गांव मुख्य सड़क मार्ग से नहीं जुड़ पाया है क्योंकि महज दो सौ गज जमीन किसी की निजी मिल्कियत में है. हर गांव व टोला को मुख्य मार्ग से जोड़ने का कार्यक्रम भी सात निश्चय योजना में शामिल है. इस गांव में नाली निर्माण तो हुआ है लेकिन बेकार. नाली का निकास एक सार्वजनिक पोखर में होना था, लेकिन यहां भी सड़क जैसा ही मामला है. बीच की तीन-चार सौ फीट जमीन किसी की निजी जमीन है. इसलिए नाली का पानी नहीं निकल पा रहा है. लिहाजा, नाली बन जाने के बाद से गली में गंदगी घटने के बजाय बढ़ ही गई  है. गली का ढलाई नहीं हुआ है. इसलिए बरसात में कीचड़ पसर जाता है. अभी नल-जल का पानी भी बंद है. नल-जल योजना के तहत कनेक्शन तो किए गए हैं लेकिन मोटर जल गया है.

का. चंद्रमा मांझी (इनकी दोनों आंखों की रोशनी गायब है), ललन मांझी व टोला सेवक अर्जुन मांझी ने बताया कि दबंग लोग ठेकेदारी को लेकर आपस में तनाव पैदा कर देते हैं. फिर काम रुक जाता है. दरअसल वे लोग गरीबों के गांव-टोलों में नली, गली एवं सड़क का निर्माण करना नहीं चाहते. यह उनकी एक कुटिल चाल है. वे चाहते हैं कि गरीब लोगों को सरकारी सुविधाएं न हासिल न हों. इतना ही नहीं, जब मोटर जल गया तो उसे बनाने के लिए वे हम लोगों पर ही दबाव बनाते हैं कि पैसा देना होगा. वे बताते हैं कि राशन मिलने के मामले में भारी अनियमितता है. साल भर में मात्र 6 महीना ही राशन मिलता है. पैक्स अध्यक्ष जितेंद्र शर्मा जो एक दबंग आदमी हैं हमेशा राशन की कटौती करते रहता है. पदाधिकारी भी उस पर कोई कदम नहीं उठाते.

निघवां पंचायत का एक गांव है – किरपा बिगहा. यह मुसहर जाति के 45 घरों का गांव है. यहां भी नाली-गली का पक्कीकरण नहीं हुआ है और न ही यह गांव सड़क से जुड़ा है. पेयजल का घोर संकट यहां भी है. करपी प्रखंड के झिकटिया के टोला, सर्वाेदय नगर मुसहरी, बद्दोपुर मुसहरी, रामापुर मुसहरी, खजूरी मुसहरी में भी यही हाल है.’ यानी सात निश्चय योजना का कार्यान्वयन इन महादलित टोलों में बिल्कुल नहीं हुआ है. नली व गली का पक्कीकरण भी नहीं हुआ है. दरअसल जिन लोगों को हाथों में इस योजना का काम करने का जिम्मा सौंपा गया है वे सामाजिक स्तर पर दबंग है. ये लोग नहीं चाहते की इन दलित टोलों का उत्थान हो. गरीबों का रहन-सहन एवं जीवन स्तर ऊंचा उठे. वे लोग हमेशा चाहते हैं कि दलित-गरीब जहालत एवं संकट में रहे. यह सुशासन की सरकार की शर्मनाक तस्वीर है. भाकपा(माले) ने इन मुद्दों पर अक्टूबर माह में एक जिलास्तरीय प्रदर्शन की योजना बनाई है.