मोदी और भाजपा ‘विकास’ के मुद्दे से हटी, खुले सांप्रदायिक अभियान का सहारा लिया

2019 के संसदीय चुनावों की औपचारिक शुरूआत करते हुए वर्धा में एक भाषण के दौरान प्रधान मंत्री नरेंद्र मोदी ने खुल्लमखुल्ला विभाजनकारी सांप्रदायिक जुगाली भरी और प्रतिद्वंद्वी पार्टियों पर हिंदू-विरोधी एजेंडा अपनाने का आरोप लगाया. भाषण की शैली और सारवस्तु में मोदी की उलझन और हताशा झलक रही थी. रोजगार और किसानों से जुड़े सवालों पर मजबूती से मतदाताओं का सामना करने में असमर्थ और बहुतेरे भ्रष्टाचार घोटालों से घिरे मोदी और भाजपा अब अपनी अंतिम संभव तिकड़म का सहारा ले रहे हैं.

वे इस चुनाव को भाजपा बनाम विपक्ष से भटका कर हिंदू बनाम मुस्लिम का चुनाव बना देना चाहते हैं. इसके पूर्व, मोदी और भाजपा ने अन्य मुहावरों और मुद्दों को आजमाया था, लेकिन वे सब निष्फल ही साबित हुए. अपने हालिया भाषण में मोदी ने पूछा कि वायु सेना के पायलट अभिनंदन, जिन्हें पाकिस्तान में बंदी बनाया गया था, की सकुशल वापसी के लिए विपक्ष क्यों इतनी चिंता जता रहा था. मोदी ने अप्रसन्नता जाहिर की कि अभिनंदन की भलाई के लिए इस चिंता ने पाकिस्तान पर सरकारी हमले के लिए उसकी एकतरफा ठकुरसुहाती से लोगों का ध्यान हटा दिया. अब यह बात सामने आ रही है कि जम्मू कश्मीर के बडगाम में क्रैश हुए भारतीय वायु सेना का जेट विमान संभवतः ‘फ्रेंडली फायर’ का शिकार बना होगा - अर्थात् भारतीय वायु सेना ने ही भूल से उसे निशाना बना लिया होगा. अगर किसी जांच में यह सही पाया गया तो यह न केवल काफी परेशान करने वाली और गैर-पेशेवराना बात होगी, बल्कि यह त्रासद भी होगी क्योंकि इसमें नाहक वायु सेना के एक पायलट की जान चली गई है.

मोदी का ‘चौकीदार’ मुहावरा भी सवाल खड़े करता है कि उनकी सरकार धनिकों और शक्तिशालियों की ही चौकीदारी क्यों करती है, जबकि असल चौकीदार की जिंदगी बिताने वाले लोगों को न्यूनतम मजदूरी तक नसीब नहीं होती है.

जब अन्य तमाम मुद्दे बेनतीजा हो गए तो मोदी भोंड़ी सांप्रदायिक नफरत-बयानी का अपना पसंदीदा राग अलापने लगे. वर्धा में उन्होंने ‘समझौता’ बम धमाके का हवाला दिया जिसमें स्वामी असीमानंद और दो अन्य लोगों को आरोपमुक्त किया गया है. उन्होंने कांग्रेस पर आरोप लगाया कि वह हिंदुओं पर आतंकवाद का दोष मढ़कर उनका अपमान कर रही है. मोदी ने कहा कि कोई भी हिंदू कभी आतंकवादी नहीं रहा है. यह भी कहा कि हिंदुओं के आक्रोश से डरकर कांग्रेस ने राहुल गांधी को वायनाड सीट से उम्मीदवार बनाया है, जहां हिंदुओं की बजाय मुस्लिमों की आबादी ज्यादा है.

मोदी के भाषण से कई सवाल खड़े होते हैं. सर्वप्रथम, तथ्य तो यह है कि वायनाड में हिंदू मतदाताओं की संख्या ही अधिक है, इसीलिए मोदी ने जानबूझ कर झूठा बयान दिया है. दूसरा सवाल यह है कि क्या किसी खास समुदाय के चंद सदस्यों पर आतंकवाद के आरोप लगने का मतलब उस पूरे समुदाय को आतंकवादी बना देना होता है ? यह कहकर कि हिंदू समुदाय कभी भी आतंकवादी नहीं हो सकता, क्या मोदी यह कह रहे हैं कि पूरा मुस्लिम समुदाय आतंकवादी है, क्योंकि कुछ मुस्लिम लोग आतंकवाद के आरोपी हैं ? इस तथ्य पर मोदी क्यों खामोश हैं कि कई न्यायालयों ने अनेक मुस्लिमों को आतंक के आरोपों से बरी कर दिया है और यह पाया है कि पुलिस ने उनपर मनगढ़ंत आरोप लगाए थे ?

‘समझौता’ मामले में एक अभियोजक रोहिणी सैलियन ने हाल ही में शिकायत की है कि उन्हें इस केस से हटाया जा रहा है क्योंकि उन्होंने इस केस को कमजोर बना देने के सरकारी दबाव के समक्ष घुटने टेकने से इनकार कर दिया. इस केस से जुड़े एक जज ने कहा कि अभियोजन पक्ष ने एक महत्वपूर्ण साक्ष्य पेश ही नहीं किया, ताकि रिहाई की गारंटी हो सके. इसीलिए, असीमानंद - जिसने एकाधिक बार इन धमाकों से जुड़ा होना सार्वजनिक तौर पर स्वीकार किया है - और अन्य लोग इसीलिए निर्दोष नहीं हो जाते, क्योंकि कोर्ट ने उन्हें बरी कर दिया है.

न्यूजीलैंड की एक मस्जिद पर हालिया क्राइस्टचर्च आतंकी हमले ने इस्लामोफोबिक आतंकवाद और धुर-दक्षिणपंथी आतंक की तरफ पूरी दुनिया का ध्यान खींचा है. भारत में इस्लामोफोबिक एवं हिंदुत्ववादी चरम-दक्षिणपंथी आतंक का लंबा इतिहास रहा है. स्वतंत्र भारत में आतंकवाद का पहला दृष्टांत इस्लामोफोबिक हिंदुत्ववादी आतंकी गोडसे द्वारा खुद गांधी की हत्या है, क्योंकि गोडसे हिंदुओं व मुसलमानों के बीच एकता और प्रेम के बारे में गांधी की उसूली स्थिति के चलते उनसे नफरत करता था. और अभी कुछ समय पूर्व भी गोडसे को पूजने और उसका अनुसरण करने वाले गु्रपों ने भारत में कई विवेकपूर्ण शख्सियतों और पत्रकारों की हत्या कर दी है.

मोदी के अपने मंत्री, निवर्तमान सांसद और आरा लोकसभा क्षेत्र से उम्मीदवार आरके सिंह ने यूपीए शासन के अंतर्गत गृह सचिव की हैसियत से कहा था कि आतंकवाद में आरएसएस की संलिप्तता के सबूत मौजूद हैं. खुद आरा और मध्य बिहार भाजपा-समर्थित सामंती भूस्वामी गिरोह रणवीर सेना की आतंकी कार्रवाइयों के गवाह हैं, जिस सेना ने महिलाओं व बच्चों समेत दलितों के जनसंहार किए थे. क्या आरके सिंह और मोदी इस सवाल पर अपनी स्थिति स्पष्ट करेंगे कि रणवीर सेना एक आतंकवादी गिरोह था या नहीं ?

अगले सप्ताह 13 अप्रैल 2019 को जालियांवाला बाग जनसंहार की शतवार्षिकी है. इस जनसंहार का इतिहास दिखाता है कि ब्रिटिश औपनिवेशिक सत्ता हिंदू-मुस्लिम उपनिवेशवाद-विरोधी एकता के नारे और इसकी अभिव्यक्तियों को ‘राजद्रोह’ समझती थी जिसका जवाब बदतरीन किस्म का दमन ही हो सकता था. यही वह बिंदु है जहां आरएसएस और हिंदुत्व का धुर-दक्षिणपंथी एजेंडा उस औपनिवेशिक एजेंडा से एकाकार हो जाता है. यह गौरतलब है कि गोडसे ने भी हिंदू मुस्लिम एकता के लिए गांधी की तरफदारी को उनकी हत्या का कारण मान लिया. और आज मोदी एवं उनके समर्थक भी सौ साल पूर्व के बरतानवी औपनिवेशिक शासकों की भांति हिंदू-मुस्लिम एकता के उस विचार को गहरे संदेह की नजर से देखते हैं और इस विचार के घोर विरोधी हैं.

मोदी और आरएसएस हमें जो भी यकीन दिलाना चाहें, उसके विपरीत सच तो यह है कि हिंदू-मुस्लिम एकता के प्रति बैर भाव ‘राष्ट्रवाद’ नहीं है, बल्कि यह महज एक औपनिवेशिक आयात है. नफरत-भरे भाषणों के ऐसे खुल्लमखुल्ला दृष्टांतों पर भी जब निर्वाचन आयोग कोई कार्रवाई नहीं कर पा रहा है, तो ऐसी स्थिति में भारत की जनता को ही ब्रिटिश उपनिवेशवादियों के नक्शेकदम पर चलते हुए भारत में फूट डालने और राज करने की कोशिश कर रहे मोदी और भाजपा को सबक सिखाना होगा.

वर्ष28
अंक16