खेग्रामस नेता चक्रवात पीड़ितों से मिले

प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने हाल ही में जापान में भारतीयों की एक सभा में शेखी बघारी: “भारत अभी हाल ही में आए फनी चक्रवात और कई अन्य बाधाओं से निपटने में कामयाब रहा है और इनमें कम-से-कम क्षति हुई है. दुनिया ने हमारे क्षति नियंत्रण प्रयासों की सराहना की है – कैसे हमने सरकारी संसाधनों, मानव संसाधनों और अंतरिक्ष टेक्नोलाॅजी और अन्य चीजों का इस्तेमाल करके दृढ़तापूर्वक काम किया है.”

भुवनेश्वर (ओडिशा) के नागभूषण भवन में राष्ट्रीय कार्यकारिणी की दो-दिवसीय बैठक के बाद खेग्रामस के राष्ट्रीय अध्यक्ष श्रीराम चौधरी, महासचिव धीरेंद्र झा तथा राष्ट्रीय उपाध्यक्ष बालासुंदरम के साथ-साथ किसान महासभा के ओडिशा के नेता अशोक प्रधान ने 28 जून 2019 की शाम में पुरी के फनी चक्रवात प्रभावित गांवों का दौरा किया.

मोटर साइकिल के जरिए ग्राम पंचायत लक्ष्मी नारायणपुर जाने के पूरे रास्ते में इस टीम ने सड़क के दोनों ओर चक्रवात की विनाश लीला देखी. नारियल के अनगिनत पेड़ नष्ट हो गए, दसियों वर्ष पुराने पेड़ उखड़ गए, हजारों एकड़ धान की फसल चौपट हो गई और झोपड़िया व कच्चे घर ध्वस्त हो गए. जिन लोगों के घर नष्ट हुए हैं उन्हें अबतक समुचित आश्रय नहीं मिल पाया है. राज्य सरकार 5 लाख घर बनवाने के लिए 7000 करोड़ रुपये की मांग कर रही है. लेकिन प्रधान मंत्री मोदी ने कोई ‘सरकारी संसाधन’ मुहैया कराने का वादा नहीं किया है.

कई गांवों को मिलाकर बने लक्ष्मी नारायणपुर ग्राम पंचायत के लोगों ने टीम को अपना दुखड़ा सुनाया. पिलिपदा खेग्रामस के पूर्व राज्य अध्यक्ष सत्यवादी बेहरा – जिनका गत वर्ष निधन हो गया है – का जन्मस्थल है. कामरेड सत्यवादी के नेतृत्व में संघर्ष चलाकर वहां के भूमिहीनों ने जमींदारों से हजारों एकड़ जमीन छीनकर अपने बीच वितरित किया है.

पिलिपदा सबसे ज्यादा प्रभावित गांवों में से एक है. इन गांवों के लोगों ने बताया कि राज्य व केंद्र सरकारों के दावों के विपरीत यहां काफी अमानवीय स्थिति है. राहत और पुनर्वास का काम बिलकुल नाकाफी है. नष्ट हुई बिजली लाइनें और ट्रांसफाॅर्मर अभी तक दुरुस्त नहीं हो पाए हैं. दिगरिया बस्ती में रहने वाले करीब 25 दलित खेत मजदूर परिवार भयावह हालात में जी रहे हैं. सरकार और एनजीओ द्वारा वितरित सोलर बिजली ही रोशनी का एकमात्र साधन है.

बहुतेरे ग्रामीणों को अभी तक ढंग का काम नहीं मिल पाया है. ‘मनरेगा’ रोजगार भी मुहैया नहीं कराया गया है. यहां भाकपा(माले) के एक 35-वर्षीय सदस्य की इस चक्रवात में मौत हो गई है. टीम ने उनकी पत्नी और दो बेटियों को ढाढस बंधाया. कामरेड धीरेंद्र ने इस परिवार को 2 लाख रुपये सहायता राशि देने के पार्टी की केंद्रीय कमेटी के फैसले को सुनाया. उन्होंने उनकी बेटियों को भी आश्वस्त किया कि पार्टी उनकी पढ़ाई-लिखाई के लिए सहयोग करेगी.

वर्ष28
अंक29