कामरेड संतोष राणा

santoshपश्चिम बंगाल में नक्सलबाड़ी आंदोलन और भाकपा(माले) के एक जाने-माने नेता कामरेड संतोष राणा का निधन गत 29 जून 2019 को 77 वर्ष की उम्र में कोलकाता में हो गया. वे कैंसर से पीड़ित थे. 1960 के दशक में वे कोलकाता विश्वविद्यालय में भौतिक शास्त्र के शोध छात्र थे जब वे नक्सलबाड़ी आंदोलन में कूद पड़े और अपने गृह क्षेत्र मेदिनीपुर जिले के गोपीबल्लभपुर प्रखंड में जाकर किसानों के बीच काम करने लगे. उनके नेतृत्व में चला 1969-71 के बीच डेबरा-गोपीबल्लभपुर का किसान संघर्ष भाकपा(माले) के इतिहास में अविस्मरणीय रूप से दर्ज रहेगा. इसी क्रम में वे गिरफ्तार हुए और इमरजेन्सी हटने के बाद 1977 में हुए पश्चिम बंगाल के विधानसभा चुनाव में उन्होंने जेल से ही स्वतंत्र उम्मीदवार के बतौर गोपीबल्लभपुर से चुनाव लड़ा और विजयी हुए. वे भाकपा(माले) धारा के प्रथम और पश्चिम बंगाल से एकमात्र विधायक थे. भाकपा(माले) के विभाजन के समय वे सत्यनारायण सिंह के नेतृत्व वाली पीसीसी-सीपीआई(एम-एल) में चले गये और बाद में उसके एक धड़े के महासचिव भी बने. भाकपा(माले) उनके निधन पर शोक व्यक्त करती है.

कामरेड संतोष राणा को लाल सलाम!

वर्ष28
अंक29