कामरेड प्रमिला लूंबा

भाकपा और एनएफआइडब्लू की वरिष्ठ नेता कामरेड प्रमिला लूंबा का 24 जून 2019 को निधन हो गया. उनका जन्म 1924 में हुआ था और उन्होंने अपने 95 वर्ष के जीवन का अधिकांश समय युवावस्था से ही कम्युनिस्ट आंदोलन और महिला आंदोलन में गुजार दिया था.

अपनी युवावस्था में वे स्वतंत्रता आंदोलन में सक्रिय थीं और फिर वे कम्युनिस्ट आंदोलन में शामिल हो गईं. वे जीवन-पर्यंत कम्युनिस्ट बनी रहीं और अंतिम सांस तक वे सक्रिय रहीं. अपने अंतिम दिनों तक वे दिल्ली में होने वाले तमाम प्रतिवाद कार्यक्रमों में दिखती रही थीं. वे खास तौर पर सांप्रदायिकता-विरोधी आंदोलन और महिला आंदोलन में ज्यादा शामिल रहती थीं.

दिल्ली की स्कूल शिक्षिका और शिक्षाविद पिम्मी जी (उन्हें जानने वाले लोग उन्हें इसी नाम से पुकारते थे) अपने स्कूल के युवा छात्रों के हक में आवाज उठाती थीं, जो 1970-दशक के नक्सलवादी आंदोलन के समर्थक थे. वे छात्रों के विरोध करने के अधिकार की दृढ़ हिमायती थीं. जहां भारत के स्कूलों में कहीं भी छात्रों के इस अधिकार को मान्यता नहीं दी जाती थी, वहीं पिम्मी जी अपने स्कूल में छात्रों के इस हक का पूरा सम्मान करती थीं.

अपने दोस्ताना और जमीनी स्तर पर काम करने के स्वभाव तथा जन संघर्षों के प्रति अपनी शांत प्रतिबद्धता के चलते उन्हें हमेशा तमाम उम्र और जीवन के हर क्षेत्र के लोगों का सम्मान, दोस्ती और स्नेह मिलता रहा.

भाकपा(माले) कामरेड प्रमिला लूंबा को अपना सलाम पेश करती है और उनकी बेटी व परिवार के अन्य सदस्यों और साथ ही, भाकपा व एनएफआइडब्लू के उनके साथियों को अपनी हार्दिक संवेदना संप्रेषित करती है.

वर्ष28
अंक29