वर्ष - 28
अंक - 15
30-03-2019

चुनावों के ऐन बीचोबीच प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी द्वारा मिशन शक्ति की घोषणा से साफ हो गया है कि सामरिक-रणनीतिक मामलों को हल करने में मोदी सरकार का नजरिया काफी चिंताजनक है. प्रधानमंत्री ने घोषणा की है कि एक एण्टी-सैटेलाइट मिसाइल, ए-सैट, ने ‘लो-अर्थ-ऑरबिट’ में स्थित एक सैटेलाइट को सफलतापूर्वक मार गिराया. और यह कि भारत इस प्रकार की अंतरिक्ष मिसाइल क्षमता रखने वाला दुनिया का चौथा देश बन गया है. भारत के पास ऐसी क्षमता होने की घोषणा करीब 7 साल पहले डी.आर.डी.ओ. कर चुका था. यदि किसी रणनीतिक प्राथमिकता के कारण इस क्षमता का प्रदर्शन करना जरूरी ही था, तो यह सवाल लाजिमी तौर पर बनता है कि क्यों इसी समय को मोदी सरकार ने इस प्रदर्शन, और इतने सनसनीखेज ढंग से इसकी घोषणा के लिए चुना?

जाहिर है, भाजपा अपनी आसन्न चुनावी हार की बढ़ती संभावनाओं से चिंतित है और चुनावी माहौल को युद्ध के उन्मादी बादलों से ढंकने के लिए डी.आर.डी.ओ. की रक्षा क्षमताओं का इस्तेमाल कर रही है. आज टेलिविजन पर की गई घोषणा से नोटबंदी के हादसे की यादें फिर से ताजा हो गईं जिसकी घोषणा भी इसी प्रकार उत्तर प्रदेश के चुनावों से ठीक पहले दो साल पूर्व की गई थी. ऐसी सरकार जो बेहद महत्त्वपूर्ण आर्थिक और रणनीतिक फैसले चुनावी गणित के आधार पर लेती हो, सचमुच जनता के ऊपर एक बोझ है. आज की घोषणा से यह और भी जरूरी हो गया है कि जनता ऐसी निरंकुश सरकार के खिलाफ वोट कर इसे बाहर का रास्ता दिखाये. क्योंकि यह अपना स्वार्थ केन्द्र में रख मनमाने तरीके से हमारे राष्ट्रीय महत्व पर असर डालने वाले फैसले लेती है.

चुनावी मौसम के बीच की गई इस सैटेलाइट स्ट्राइक से भी नौकरियों, किसानों, जन-अधिकारों, लोकतंत्र और साम्प्रदायिक सौहार्द पर की गई ‘स्ट्राइक’ से देश की जनता का ध्यान मोदी सरकार नहीं हटा पायेगी. इस सैटेलाइट स्ट्राइक से क्षेत्र में हथियारों की दौड़ और बढ़ते सैन्यीकरण का खतरा भी बढ़ता है, और हमें इस युद्ध-जाल से बचना चाहिए. हमें आने वाले दिनों में इस बात की गारंटी करनी होगी कि रणनीतिक महत्व के सवाल सत्ता की सनक और राजनीतिक स्वार्थों की भेंट न चढ़ पायें.

दीपंकर भट्टाचार्य, महासचिव, भाकपा(माले)