वर्ष - 28
अंक - 13
23-03-2019

8 मार्च को झुमरी तिलैया में श्रमकल्याण विभाग के समीप महिलायें एकजुट हुईं. वहां से  ऐपवा के बैनर तले एक विशाल जुलूस के साथ महिला अधिकार यात्रा की शुरुआत की गई. यह यात्रा रांची-पटना रोड, झंडा चौक, ओवरब्रिज, जवाहर टाकीज होते हुए महाराणा प्रताप चौक पहुंचा जहां डा. भीमराव अंबेडकर के प्रतिमा पर माल्यार्पण कर संविधान व लोकतंत्र को बचाने की शपथ ली गई. यह यात्रा बेलाटांड (सलैया) स्थित कलामंदिर के पास एक सभा आयोजित करने के बाद समाप्त हुई. सभा को संबोधित करते हुए ऐपवा राज्य सचिव का. गीता मंडल ने पूरे कोडरमा लोकसभा क्षेत्र में महिला अधिकार यात्रा निकाल कर केंद्र व राज्य की झूठी व जुमलेबाज भाजपा सरकार का भंडाफोड़ करने की घोषणा की. उन्होंने कहा कि भाजपा सरकार द्वारा झारखंड के महिलाओं का जबरदस्त शोषण किया जा रहा है. स्किम वर्कर महिलाओं से मुफ्त में काम कराया जा रहा है. उन्होंने क्षेत्र के मतदाताओं से आगामी लोकसभा चुनाव में भाजपा को उखाड़ फेंकने का आह्वान भी किया. सभा को जयंती चौधरी, मनीषा सिंह, पूनम महतो, रेखा रवानी, सरिता महतो, किरण पासवान, ललिता देवी, आईती तिर्की, मदीना खातून आदि महिलाओं ने भी संबोधित किया. सभा की अध्यक्षता जिला अध्यक्ष नीलम शाहाबादी और संचालन राज्य अध्यक्ष सबिता सिंह ने की.

8 मार्च को झुमरी तिलैया से शुरू हुई यह महिला अधिकार संघर्ष यात्रा आगे भी जारी रही. 9 मार्च को कोडरमा विधानसभा में चैनपुर, डोमचांच, नीचे टोला, बेहराडीह, जयनगर प्रखंड के पिपराडीह, मरकच्चो प्रखंड के चोपनाडीह व चलकुशा चौबे बाजार तक यात्रा चली. चटकरी में रात्रि विश्राम के बाद 10 मार्च को बरकनगंगा, पचाफेरी,कफकाचोक, अटका, बगोदर मुस्लिम टोला होते हुए यह यात्रा सरिया बाजार पहुंची. वहां बाघा चौक पर आयोजित सभा को ऐपवा की राष्ट्रीय उपाध्यक्ष का. सरोज  चौबे ने भी संबोधित किया. रात्रि विश्राम के बाद 11 मार्च को खैरोन, सखुवाडीह, फेकरापहरी होते हुए यात्रा जमुआ पहुंची और जमुआ चौक पर सभा की गई, यह यात्रा 12 मार्च को गांडेय बाज़ार एवं बेंगाबाद पहुंची जहां सभा आयोजित की गई. जमुआ के मंडरो ग्राम  में रात्रि विश्राम किया गया. 13 मार्च को मंडरो में एक सभा आयोजित करने के बाद यात्रा राजधनवार विधानसभा क्षेत्र के तीसरी, पिहरा और गावां पहुंची. 14 मार्च को राजधनवार में एक बड़ी सभा हुई जिसे अन्य लोगों के अलावा माले विधायक का. राजकुमार यादव ने भी संबोधित किया, यहीं पर इस यात्रा का समापन हुआ. का. गीता मंडल, सबिता सिंह, जयंती चौधुरी, पूनम महतो, कौशल्या दास, मीना दास, सरिता साव व नीलम शाहाबादी ने महिला अधिकार संघर्ष यात्रा का नेतृत्व किया.

गढ़वा ऐपवा के नेतृत्व में अंतर्राष्ट्रीय महिला दिवस के अवसर पर 8 मार्च को गर्ल्स हाई स्कूल मैदान से मार्च निकाला गया जो मेन रोड में सदर अस्पताल होते हुए इंदिरा गांधी पार्क (रंका मोड़) तक गया. इस ‘नारी मुक्ति मार्च’ का नेतृत्व ऐपवा  पलामू प्रमंडल प्रभारी सह राज्य उपाध्यक्ष सुषमा मेहता, शीला कुशवाहा, मंजू मेहता, देवंती मेहता, संगीता कुमारी, बबीता रजक, बरती देवी, रेखा देवी, आदि ने किया. मार्च में शामिल महिलाएं हाथों में झंडा-बैनर लेकर बराबरी और अधिकार के नारे लगा रही थीं.  

रंका मोड़ पर सभा को संबोधित करते हुए सुषमा मेहता ने कहा कि आज महिलाएं पूरे देश में असुरक्षित हैं. वे कहीं बलात्कार, हत्या व यौन शोषण की शिकार हैं तो कहीं मजदूरी लूट का. उन्होंने कहा कि रघुबर सरकार का महिला सशक्तीकरण का नारा खोखला है. कामकाजी महिलाओं को सत्ता और पितृसत्ता की दोहरी मार झेलनी पड़ रही है. हमें आज 8 मार्च को बराबरी हासिल करने के लिए संघर्ष तेज करने का संकल्प लेना चाहिए. इस मौके पर पफुलमतिया देवी, सरस्वती कुंवर, दुर्गा देवी, संध्या देवी, देवंती देवी, तेतरी देवी, सहोदरी देवी, सुषमा देवी कांति देवी, शहनाज, प्रवीण, सुनीता देवी, सुरजी देवी, सतवंती देवी, फूलमती देवी, प्रेमनी देवी, इंद्रावती कुमारी, दुखनी कुँवर सहित काफी संख्या में महिलायें शामिल थीं. सभा की अध्यक्षता व संचालन शीला कुशवाहा ने किया    

गिरीडीह के बेंगाबाद में ऐपवा ने ’महिला अधिकार संघर्ष यात्रा’ निकालकर महिलाओं पर बढ़ते अत्याचार को लेकर भाजपा सरकार पर हल्ला बोला. ऐपवा नेत्रियों ने कहा कि दुपट्टा-शाल उतरवाने और बलात्कारियों को संरक्षण देने समेत भाजपा सरकार से महिलाओं के साथ किए गए हर तरह के अपमान का बदला लेने का समय आ गया है. महिलाओं ने रातेडीह से यात्रा निकाला और बेंगाबाद चौक पर नुक्कड़ सभा करने के बाद प्रखंड कार्यालय परिसर तक गई. वहां भी एक सभा हुई. इस मौके पर ’ऐपवा’ की प्रखंड स्तरीय कमेटी का गठन भी किया गया.

अंतरराष्ट्रीय महिला दिवस के अवसर पर पलामू जिला स्कूल मैदान से कचहरी परिसर तक महिलाओं ने मार्च निकाला. यह कार्यकम झारखंड राज्य विद्यालय रसोइया संघ, ऐपवा, सोसाइटी फार लेबर एंड डेवलपमेंट और महिला अधिकार संघर्ष समिति के संयुक्त बैनर से आयोजित किया गया. महिलाओं को संबोधित करते हुए वक्ताओं ने कहा कि समाज और सरकार चाहे जितना ढिंढोरा पीट ले, महिलाओं पर आज भी बेइंतहा जुल्म और शोषण जारी है. महिलायें घर से लेकर सड़क और संसद तक गैर बराबरी और उत्पीड़न झेल रही हैं. उनके मेहनत और काम की कोई पूछ नहीं हो रही. वक्ताओं ने कहा कि महिला स्कीम वर्करों का शोषण किया जा रहा है और मामूली मानदेय पर करोड़ों महिलाओं को बंधुआ मजदूर की तरह खटाया जा रहा है जो कि बेहद शर्मनाक है. उन्होंने सवाल उठाया कि बेटी पढ़ाओ, बेटी बचाओ का नारा लगाने वाली मोदी सरकार बहन-बेटियों के लिए आखिर 33 प्रतिशत आरक्षण का नियम क्यों नहीं बना रही है? वक्ताओं ने महिलाओं से आगे बढ़ कर अपने हक़-अधिकार का संघर्ष तेज करने की अपील की. कार्यक्रम की अगुआई रसोइया संघ की जिला सचिव अनीता देवी, उपाध्यक्ष संध्या देवी, ललिता देवी, ऐपवा रामगढ़ की अध्यक्ष बसंती देवी, महिला अधिकार संघर्ष समिति की सुषमा तिर्की, पूनम विश्वकर्मा और आइसा के नेत्री दिव्या भगत ने किया .

रांची ऐपवा के नेतृत्व में अल्बर्ट एक्का चौक पर मोदी-रघुबर सरकार के विरोध में प्रतिवाद मार्च निकाला गया. प्रतिवाद मार्च में शामिल महिलायें ‘शहीद सैनिकों के शव पर वोट की खेती करना बंद करो’, ‘महिलाओं की आजादी, सुरक्षा, सम्मान और अधिकार के लिए संघर्ष तेज करो’, ‘पुलवामा की आड़ में समाज में फूट डालने और आतंक, हिंसा और नफरत-उन्माद कायम करने की साजिश पर रोक लगाओ’ आदि नारे लगा रही थीं. सभा को शांति सेन, नौरीन अख्तर आदि ऐपवा नेत्रियों ने संबोधित किया. वक्ताओं ने कहा कि नारी के समान अधिकार की लड़ाई को तेज करने की अपील की. प्रतिवाद मार्च में अल्मा रानी, सीमा कुमारी, रेणु आदि समेत दर्जनों महिलाएं शामिल थीं.

रांची जिला के बुंडू में भी ऐपवा नेत्री लखिमनी मुंडा के नेतृत्व में प्रतिवाद मार्च निकाला गया. रामगढ़ में महिलाओं ने मार्च निकालकर समाज में शांति व भाईचारा कायम रखने की अपील की. गोमिया और धनबाद जिला के निरसा कोयलांचल के सेंट्रल पुल में ऐपवा ने महिलाओं की सभा आयोजित की.

रामगढ़ में ऐपवा की जिला सचिव नीता बेदिया, अध्यक्ष कांति देवी, उपाध्यक्ष झूमा घोषाल, धनमति देवी आदि के नेतृत्व में सैकड़ों महिलाओं ने अंतरराष्ट्रीय महिला दिवस के अवसर पर शहर के मेन रोड पर झंडा-बैनर व तख्तियां हाथों में लिए बैंड-बाजा के साथ प्रदर्शन किया और आजादी, सुरक्षा व समानता के नारे लगाए.

अंत में यह प्रदर्शन सुभाष चौक पहुंच कर नुक्कड़ सभा में बदल गया. सभा को उक्त महिला नेताओं ने संबोधित करते हुए कहा कि देश की आजादी के 72 साल बाद भी महिलाओं को सामाजिक, आर्थिक, राजनीतिक समानता नहीं मिली है. भारत की पितृसत्तात्मक व्यवस्था एवं पूंजीवादी भूमंडलीकरण की परियोजना में महिलाओं को महज उपभोग की वस्तु बना दिया गया है. उन्हें समान मजदूरी नहीं मिलती है और कार्य-स्थलों पर उनके साथ यौन उत्पीड़न किया जाता है. इस मार्च में बड़ी संख्या में महिलाएं शामिल हुईं.