पंजाब सरकार का पुतला दहन

मुक्तसर में एक महिला की पिटाई तथा संगरूर जिले के मिमासा गांव में कांग्रेस-समर्थित सरपंच और उसके गुंडों के द्वारा पंचायती जमीन के लिए संघर्ष करने वाले दलित नेताओं पर हमले के खिलाफ 19 जून 2019 को भाकपा(माले) ने पंजाब सरकार का पुतला दहन किया.

ऐक्टू ने हरियाणा में भट्ठा मजदूरों को आजाद कराया

किथना (हरियाणा) में संडल रोड पर ओम शांति ईंट भट्ठा कंपनी में अनेक मजदूरों को पिछले 10 दिनों से बंधुआ बनाकर उनसे काम करवाया जा रहा था. ऐक्टू से संबद्ध हरियाणा राज्य लाल झंडा भट्ठा मजदूर यूनियन की पहलकदमी से 27 जून 2019 को उन मजदूरों को आजाद करवाया गया.

गाजीपुर में पुलिस के खिलाफ प्रतिवाद

23 जून को सेवराई तहसील क्षेत्र के करवनिया डेरा पर भारी पुलिस बल की मौजूदगी में एसडीएम ने भाकपा(माले) के प्रखंड कमेटी सदस्य का. रोहित बिंद का मकान तोड़वा दिया. जबकि न्यायालय ने 2014 में ही उनके पक्ष में निर्णय दिया था. प्रशासन ने यह गुण्डागर्दी भाजपा विधायक और सपा सरकार के पूर्व मंत्राी के इशारे पर की है.

पुणे हादसे के मृतकों के परिजनों के लिए मुआवजे की मांग

भाकपा-माले विधायक दल के नेता महबूब आलम ने महराष्ट्र के पुणे में अत्यधिक बारिश के कारण बलरामपुर विधानसभा के 12 मजूदरों सहित कुल 15 मजदूरों की दर्दनाक मौत पर गहरा दुख व्यक्त किया है और बिहार सरकार से मृतक परिजनों को 10 लाख रुपये तथा घायलों को बेहतर इलाज सहित 4 लाख रुपये तत्काल उपलब्ध करवाने की मांग की है. बलरामपुर के सभी मृतक महिसाल पंचायत के हैं. उन्होंने पटना में पहले से तय अपने कार्यक्रम को बीच में रद्द कर दिया और 30 जून की सुबह अपने विधानसभा पहुंच गए. उन्होंने कहा कि भयानक विपदा व दुख की घड़ी में हमारी पार्टी पीड़ित परिजनों के साथ खड़ी है.

तबरेज अंसारी को न्याय दो

तबरेज अंसारी माॅब लिंचिंग के खिलाफ मुजफ्फरपुर में विगत दिनों इंसाफ मंच के बैनर से कैंडल मार्च निकाला गया. पक्कीसराय चौक से जुब्बा सहनी पार्क तक निकाले गए मार्च में बड़ी संख्या में नागरिक शामिल हुए और तबरेज को श्रद्धांजलि दी. इसके बाद वक्ताओं ने पीड़ित परिवार के एक सदस्य को नौकरी व दस लाख मुआवजा देने की भी मांग की. मार्च में गोरखपुर बीआरडी अस्पताल के डाॅक्टर कफील भी शामिल हुए. आइसा ने विगत 30 जून 2019 को प्रतिवाद मार्च निकाला. आइसा की जिला संयोजक व एमजेके काॅलेज छात्र संघ की पूर्व महासचिव निखिता कुमारी ने इसका नेतृत्व किया.

लापरवाही की वजह से मानसून मौतें

महाराष्ट्र में भारी बारिश की वजह से अब तक 45 लोगों की मौत हो चुकी है. पानी में डूबने, दीवाल व घरों के गिरने तथा करंट लगने से ये मौतें हुई हैं. एक 20-वर्षीया महिला कामगार की सूरत में तब मौत हो गई, जब उसने सड़क पर एक बिजली के खंभे को छू लिया और उसे करंट लग गया.

मानसून के मौसम से हर वर्ष होने वाली इस किस्म की मौतें महाराष्ट्र और गुजरात जैसे राज्यों में “विकास” के दावे को बेनकाब कर देती हैं. इससे भारत के शहरों में बुनियादी सुरक्षा की खस्ता हालत और साथ ही, सरकारों की लापरवाही व गैर-जिम्मेदारी की भी पोल खुल जाती है.

‘कावेरी डेल्टा बचाओ’ बैठक में खेग्रामस और किसान महासभा

जब से बहुराष्ट्रीय कंपनी वेदांता और सरकारी कंपनी ओएनजीसी को कावेरी डेल्टा क्षेत्र में हाइड्रोकार्बन उत्सर्जन की संभावना तलाशने की अनुमति दी गई है, वहां के स्थानीय लोग इसके चलते भविष्य में होने वाली भूमि-हड़प, आजीविका के नुकसान तथा पर्यावरण विनाश के खिलाफ प्रतिवाद कर रहे हैं.

माले विधायकों ने चमकी बुखार पर कार्यस्थगन मंजूर करवाया

बरसों बाद बिहार विधानसभा में चमकी बुखार के सवाल पर कार्यस्थगन प्रस्ताव को स्वीकृति मिली और सरकार जवाब देने के लिए बाध्य हुई. विगत 28 जून 2019 से आरंभ विधानमंडल के बजट सत्र के पहले ही दिन से भाकपा-माले विधायक दल ने सदन में चमकी बुखार और बिहार में गिरती कानून व्यवस्था के सवाल पर सरकार की हालत खराब कर दी. हालांकि विधानसभा में राष्ट्रीय जनता दल विपक्ष की सबसे बड़ी पार्टी है, लेकिन उसके तेवर नरम दिखलाई पड़ रहे हैं.

भूमि-हड़प के खिलाफ महाराष्ट्र में आदिवासी किसान आंदोलन की राह पर

पालघर जिले (महाराष्ट्र) के आदिवासी किसान हाइवे परियोजना और बुलेट ट्रेन प्रोजेक्ट की खातिर अपनी जमीन-हड़प के खिलाफ आंदोलन की योजना बना रहे हैं. इन किसानों को 1818 रुपये प्रति वर्गमीटर की दर से अत्यंत तुच्छ मुआवजा देने की बात कही जा रही है, जो उस इलाके में जमीन की बाजार-कीमतों से काफी कम है. बुलेट ट्रेन और हाइवे परियोजनाओं के लिए उन्हें भूमि अधिग्रहण और बेदखली की नोटिस भेजी गई है, लेकिन मुट्ठी भर लोगों को छोड कर शेष तमाम आदिवासियों को वनाधिकार अधिनियम के तहत जमीन व जंगल पर उनके कानूनी अधिकारों से हमेशा वंचित रखा गया है.

मुजफ्फरपुर में मौत के शिकार बच्चों को न्याय के लिए बिहार में नागरिकों का कैडल मार्च

सरकार की आपराधिक लापरवाही के कारण चमकी बुखार से सैकड़ों बच्चों की हो रही मौत के सवाल पर भाकपा-माले, इंसाफ मंच, जन संस्कृति मंच, आइसा, इनौस, ऐपवा ने संयुक्त रूप से 22 जून 2019 को मुजफ्फरपुर में “बच्चों को बचाओ” मार्च निकाला। इस प्रदर्शन के जरिये चमकी बुखार को राज्य आपदा घोषित करने, आपराधिक लापरवाही के लिए बिहार के स्वास्थ्य मंत्री मंगल पांडे को बर्खास्त करने तथा मुख्यमंत्री नीतीश कुमार से बच्चों की मौत की जवाबदेही को स्वीकार करने की मांग की गई और साथ ही उनकी देखरेख में गांव-पंचायत व प्रखंडों तथा अस्पतालों में युद्ध स्तर पर बचाव व इलाज अभियान चलाने की मांग की गई.