गरीबों को उजाड़ने का निर्णय वापस लेना पड़ा

कोई वैकल्पिक व्यव्स्था किए बिना ही रेलवे प्रशासन द्वारा जयनगर में रेलवे के भूमि पर झुग्गी-झोंपड़ी डाल कर जीवन यापन कर रहे लोगों को उजाड़ने की नोटिस जारी करने के विरोध में विगत 12 सितंबर 2019 को प्रतिवाद आयोजित हुआ. इसके तहत झुग्गी झोपड़ी यूनियन के अनुमंडल सचिव का. भूषण सिंह के नेतृत्व में शहर के मुख्य मार्ग से होते हुए मार्च निकाला गया और रेलवे स्टेशन चौक पर सभा आयोजित की गई.

ऐपवा का प्रतिवाद मार्च

13 अगस्त को रामगढ़ में अखिल भारतीय प्रगतिशील महिला एसोसिएशन (ऐपवा) के बैनर तले एक प्रतिवाद मार्च निकालकर माब लिंचिंग की बढ़ती घटनाओं और मोटर व्हीकल एक्ट-2019 का विरोध किया गया. यह मार्च रामगढ़ भाकपा(माले) कार्यालय से निकाला गया जो रामगढ़ 33 उच्च पथ पर मार्च करते हुए सुभाष चौक (बस स्टैंड) तक गया. मार्च में शामिल महिलाएं  ‘रोज होता नारी पर वार - अत्याचारी के साथ है सरकार’, ‘ऐपवा की एक आवाज – बहनो बदलो राज-समाज’, ‘मोटर व्हीकल एक्ट वापस लो’ आदि  नारे लगा रही थीं और अपने हाथों में पोस्टर लिए हुए चल रही थीं.

असम के चाय मजदूर संघर्ष की राह पर

असम के चाय मजदूरों के लिये गुजरे वर्ष 2018 के लिये कैबिनेट कमेटी आॅन पब्लिक एकाउंट (सीसीपीए) द्वारा की गई 8.33 प्रतिशत बोनस की घोषणा ने चाय मजदूरों के बीच तीव्र जन-विक्षोभ को जन्म दिया था. ट्रेड यूनियनों के संयुक्त फोरम ज्वायंट ऐक्शन कमेटी आफ टी वर्कर्स (जेएसीटीडब्लू), जिसमें असम संग्रामी चाह श्रमिक संघ (एएससीएसएस) भी भागीदार है, और सामाजिक संगठनों ने मिलकर 20 प्रतिशत बोनस देने की मांग पर 12 सितम्बर 2019 को राज्यव्यापी प्रतिवाद प्रदर्शन का आह्नान किया.

त्रिपुरा में जन संपर्क अभियान

शासक भाजपा द्वारा बरपा किए जा रहे आतंक का मुकाबला करते हुए त्रिपुरा में भाकपा(माले) ने जन संपर्क अभियान चलाया. उदयपुर के खिलपाड़ा में एक जन सभा आयोजित की. उन्होंने अपने अभियान में 15 मांगें उठाईं. उनमें कुछ प्रमुख मांगें इस प्रकार थीं:

माले जांच दल की रिपोर्टयोगी राज में कुपोषण जनित अकाल मौतें

मोदी-योगी राज में खाद्य सुरक्षा कानून व बहुप्रचारित आयुष्मान योजना गरीबों के लिए मजाक बन गयी है. इसका ज्वलंत उदाहरण यूपी का कुशीनगर जिला है, जहां भुखमरी, कुपोषण व बीमारी से गरीबों की अकाल मौतें हो रही हैं. इनमें से अधिकतर मुसहर समुदाय के हैं. केंद्र में मोदी-एक की सरकार ने गरीबों के लिए संपूर्ण सामाजिक सुरक्षा कानून बनाने के बजाए तथाकथित खाद्य सुरक्षा गारंटी कानून बनाया. इस कानून में, पहले से प्रति परिवार मिल रहे 50 किलो राशन की जगह, पांच किलो प्रति यूनिट कर दिया गया. एक मजदूर के लिए इतना राशन बमुश्किल महीने में केवल पंद्रह दिन के भोजन की गारंटी करता है.

बगोदर में जन संवाद

कोलकाता में सम्पन्न राष्ट्रीय कन्वेंशन के बाद अगस्त और सिंतबर माह के पहले सप्ताह तक गिरिडीह के बगोदर विधानसभा अंतर्गत बगोदर प्रखंड में 42, सरिया प्रखंड में 43, बिरनी प्रखंड में 32 और विष्णुगढ़ प्रखण्ड में 3 पंचायतों में यानी कुल 120 ग्रामसभाएं की गई. जन संवाद के रूप में आयोजित इन अधिकतर ग्राम सभाओं में पूर्व विधायक और भाकपा(माले) केंद्रीय कमिटी के सदस्य का. विनोद कुमार सिंह शामिल रहे.

इंद्रपुरी जलाशय (कदवन डैम) का निर्माण नहीं हुआ तो बेकार हो जाएगी सोन नहर प्रणाली

(प्रस्तावित जलाशय क्षेत्र का दौरा कर लौटे किसान नेताओं के टीम की रिपोर्ट)

बिहार की सोन नहर प्रणाली दुनिया की बहुत ही पुरानी नहर प्रणालियों में से एक है. इसको अंग्रेजों ने किसानों के अंदर अंग्रेजी हुकूमत के खिलाफ लगातार बढ़ रहे आक्रोश व विद्रोह की भावना को दबाने की नीयत से बनाया था. 1850 के बाद से ही अंग्रेजों के खिलाफ किसानों का आंदोलन फूटना शुरू हो चुका था जिसकी परिणति 1857 के प्रथम स्वतंत्रता आंदोलन के रूप में हुआ था. 1853 ई.

दरभंगा में कुलपति के समक्ष प्रदर्शन

फीस वृद्धि वापस लेने, पीजी-यूजी में सीट बढ़ाने, दूरस्थ शिक्षा निदेशालय का स्कूल गुरु से असंवैधानिक समझौता को रद्द करने, दूरस्थ शिक्षा निदेशालय में सहायक कुलसचिव की फर्जी बहाली को रद्द करने, छात्र-छात्राओं के अनुपात में विवि व महाविद्यालय में हाॅस्टल बनाने, छात्रओं से एडमिशन के नाम पर लिए गए पैसे वापस करने सहित 25 सूत्री मांगों को लेकर सोमवार को ऑल इंडिया स्टूडेंट्स एसोसिएशन (आइसा) के द्वारा विगत 9 सितंबर 2019 को ललित नारायण मिथिला विश्वविद्यालय पर आक्रोशपूर्ण प्रदर्शन किया गया.

पलामू में आइसा का जिला सम्मेलन

8 सितंबर को जिला स्कूल डालटनगंज में आइसा का पलामू जिला सम्मेलन संपन्न हुआ. सम्मेलन की शुरूआत में स्वागत भाषण करते हुए पूर्व छात्र नेता अधिवक्ता नंदलाल ने कहा कि शिक्षा की नई नीति ने छात्रों को बाहर ढकेलने का प्रयास किया है. पलामू प्रमंडल में शिक्षा का हाल बेहाल है. सरकारी स्कूलों को मर्ज कर शिक्षको को बाहर निकाला जा रहा है. नई बहाली भी नहीं हो रही है.