रसोइया संघ का कटिहार जिला सम्मेलन संपन्न

बिहार राज्य विद्यालय रसोइया संघ (संबद्ध, ऐक्टू व ऑल इंडिया स्कीम वर्कर्स फेडरेशनद्ध का राज्य सम्मेलन आगामी 20 अक्टूबर 2019 को पटना में आयोजित होगा. इसकी तैयारी के सिलसिले में विभिन्न जिलों में बैठकें व सदस्यता अभियान जारी है. इसी दौरान कुछ जिलों व प्रखंडों में सम्मेलन भी आयोजित हुए हैं. विगत 15 सितंबर को रसोइया संघ का पहला कटिहार जिला सम्मेलन बारसोई के पीडब्ल्यूडी मैदान में आयोजित किया गया. सम्मेलन से पूर्व सघन अभियान चलाया गया और 148 सदस्य बनाए गए.

सीतापुर में विद्यालय रसोइयों का प्रतिवाद

ऐपवा के नेतृत्व में 300 से ज्यादा विद्यालय रसोइयों ने 16 सितंबर 2019 को सीतापुर जिला मुख्यालय पर धरना दिया और जिलाधीश के मार्फत मुख्यमंत्री को एक ज्ञापन सौंपा.

लखनऊ में निर्माण मजदूरों की जनसभा

ऐक्टू से सम्बद्ध निर्माण मजदूर यूनियन ने लखनऊ के मड़ियांव क्षेत्र में 17 सितंबर 2019 को मजदूरों की एक जनसभा का आयोजन किया. सभा को संबोधित करते हुए लखनऊ के पार्टी जिला प्रभारी का. रमेश सेंगर ने कहा कि मोदी-योगी की सरकार किसानों, मजदूरों व गरीबों को सामाजिक सुरक्षा के नाम पर मिलने वाली योजनाओं व बजट को खत्म कर रही है और मालिकों के पक्ष में मजदूरों के अधिकारों को समाप्त कर रही है. कारपोरेट-परस्त मोदी सरकार देश की अर्थव्यवस्था को बर्बादी के कगार पर ले आई है. नोटबंदी-जीएसटी से देश का कारोबार व रोजगार चौपट हो गया.

छात्रसंघों के चुनाव में आइसा

पिछले दिनों दिल्ली विश्वविद्यालय और जेएनयू में छात्र संघ के चुनाव हुए. इन चुनावों के नतीजे वामपंथ के लिये उत्साहवर्धक हैं और दिखलाते हैं कि राष्ट्रीय राजधानी दिल्ली में भी नौजवान छात्रों की अच्छी-खासी तादाद साम्प्रदायिक फासीवादी साजिश का प्रतिरोध कर रही है और वामपंथ के प्रति अपना समर्थन व्यक्त कर रही है. हिंसा, फर्जी डिग्री, मनी, मसल की राजनीति को कड़ी टक्कर देते हुए आइसा दिल्ली विश्वविद्यालय में छात्र हितों की मजबूत आवाज बनकर उभरा है.

राजभवन पर वाम दलों का धरना

संवैधानिक व लोकतांत्रिक अधिकारों के जबर्दस्त हनन, पुलिस हिरासत में मौत, माॅब लिंचिंग की लगातार बढ़ती घटनाओं तथा उसका शिकार हुए तबरेज अंसारी के हत्यारों को कानूनन बरी कर देना, कुख्यात मोटर यान अधिनियम 2019 के द्वारा पैदा किए जा रहे  ट्रैफिक आतंक, भारी मंदी से प्रभावित सैकड़ों कल-कारखानों की बंदी और हजारों लाखों लोगोें की बेरोजगारी आदि मुद्दों पर वाम दलों द्वारा 14 सितंबर 2019 को रांची में राजभवन पर धरना कार्यक्रम किया गया.

मोटर व्हीकल ऐक्ट के विरोध में धरना

मोटर व्हीकल ऐक्ट-2019 के खिलाफ आठ सूत्राी मांगों को लेकर विगत 16 सितंबर 2019 को इंकलाबी नौजवान सभा ने बगोदर-सरिया अनुमंडल कार्यालय के समक्ष एकदिवसीय धरना प्रदर्शन किया और अनुमंडल पदाधिकारी को 8 सूत्री मांगों का ज्ञापन सौंपा. इसकी अध्यक्षता इनौस के जिला उपाध्यक्ष सोनू पांडेय और संचालन जिला सह-सचिव पूरन कुमार महतो ने किया. कार्यक्रम में  पूर्व विधाायक विनोद कुमार सिंह एवं इनौस के राष्ट्रीय सचिव संदीप जायसवाल उपस्थित रहे.

सीवान में शहीद मेला

16 सितंबर 2019 को का. राजू और शम्भू की 21वें शहादत दिवस के अवसर पर के सीवान जिले के शेखपुरा रौजा पोखरा पर मेला का आयोजन किया गया. इन दोनों साथियों की हत्या 1999 में 16 सितंबर तब कर दी गई, जब वे 25 सितंबर को होने वाले लोकसभा चुनाव में पार्टी प्रत्याशी का. अमरनाथ यादव के लिए प्रचार करके लौट रहे थे. का. राजू पार्टी की सीवान जिला कमेटी के सदस्य और का. शम्भू गांव स्तर के कार्यकर्ता थे. वे दोनों सिसवन प्रखंड में पार्टी का कामकाज करते हुए वहां आतंक का राज कायम कर चुके अपराधी अजय सिंह के खिलाफ संघर्षों की अगुवाई कर रहे थे.

गन्ना किसान आंदोलन में उतरे

लखनऊ में गन्ना संस्थान पर प्रदर्शनअखिल भारतीय किसान महासभा के नेतृत्व में कुशीनगर से लखनऊ आये गन्ना किसानों ने 16 सितंबर को गन्ना आयुक्त के कार्यालय ‘गन्ना संस्थान’ के समक्ष प्रर्दशन कर उन्हें अपनी मांगों का ज्ञापन सौंपा.

पटरी वालों के पुनर्वास के लिए प्रदर्शन

शहर के अंदर अतिक्रमण के नाम पर उजाड़े गए पटरी दुकानदारों ने 17 सितम्बर 2019 को रायबरेली के विकास भवन प्रांगण में शहरी गरीब मोर्चा के बैनर तले बड़ी संख्या में इकट्ठा होकर जोरदार प्रदर्शन किया. प्रदार्शनकारियों ने ‘पटरी दुकानदारी अतिक्रमण नहीं रोजगार का साधन है’, ‘रोजगार का साधन छीनना बंद करो’ के जोरदार नारे लगाए.

राजभवन के सामने ग्रेफाइट मजदूरों का धरना

सुप्रीम कोर्ट के आदेश के बावजूद काम में वापस नहीं लिए जाने के खिलाफ ग्रेफाइट माइंस के सैकड़ों मजदूर राजभवन के सामने विगत 5 सितंबर से अनिश्चितकालीन धरने पर बैठे हैं. सरकारी अधिकारियों द्वारा अब तक कोई कार्रवाई नहीं करने पर माइंस मजदूरों ने आक्रोशित होकर इच्छामृत्यु के अधिकार की मांग की है. सोकड़ा ग्रेफाइट के मजदूर लंबे समय से आंदोलनरत हैं. 1984 में 455 मजदूरों को माइंस मालिक ने कम्पनी को दिवालिया बताकर छंटनी कर दिया था.