अन्य राज्यों की भांति पश्चिम बंगाल में कोरोना का कहर जारी है और उससे संक्रमित मरीजों की तादाद दिन पर दिन बढ़ती ही जा रही है. मौजूदा समय में जो राष्ट्रव्यापी योजनाविहीन लाॅकआउट लागू कर दिया गया है, उससे दसियों लाख दिहाड़ी मजदूर, प्रवासी मजदूर, शहरी गरीब, झुग्गी-झोपड़ीवासी, ग्रामीण खेतिहर मजदूर, चाय बागानों/जूट मिलों/बंद कारखानों के मजदूर, आदिवासी और राज्य के हाशिये पर खड़े लोग अपनी आजीविका को मिली सर्वव्यापी चुनौती का सामना कर रहे हैं.