मोदी सरकार को यंग इंडिया की चेतावनी : कोरोना से लड़ो, छात्रों-कार्यकर्ताओं से नहीं!

कोरोना महामारी के कारण चल रहे लाॅकडाउन की आड़ में भाजपा सरकार द्वारा छात्रों-कार्यकर्ताओं को निशाना बनाने के विरोध में 25 अप्रैल को देश भर के छात्रों-युवाओं ने विरोध जताया! इस दौरान लोगों ने लाॅकडाउन के नियमों का पालन करते हुए अपने-अपने घर से ही इस प्रतिरोध में हिस्सा लिया. पूरे दिन सोशल मीडिया के विभिन्न प्लेटफाॅर्म पर #FightCoronaNotActivists के साथ छात्रों-कार्यकर्ताओं पर सरकार द्वारा लगाये गए यूएपीए को वापस लेने की मांग चलती रही!

लाॅकडाउन में राहत अभियान

मुजफ्फरपुर में भाकपा(माले) व इंसाफ मंच के द्वारा कोरोना संकट व लाॅकडाउन के साथ ही राहत अभियान शुरू कर दिया गया। इसकी शुरूआत साथी आफताब आलम व खालिद रहमानी के द्वारा अपने स्तर पर व अन्य साथियों के सहयोग से 2 हजार मास्क शहर व दूरदराज के ग्रामीण क्षेत्रों में भी गरीबों व जरूरतमंदों के बीच तथा रेलवे के कामगारों व कुछ पुलिसकर्मियों के बीच वितरित किया गया. इस दौरान कोरोना महामारी व उससे बचाव के बारे में भी बताया गया. लोगों को समझाया गया कि हमें सामाजिक दूरी नहीं, बल्कि शारीरिक दूरी बरकरार रखना है.

बिहार में भी हुआ उपवास-धरना

यंग इंडिया अगेंस्ट सीएए-एनआरसी-एनपीआर के आह्वान पर 25 अप्रैल 2020 के राष्ट्रीय विरोध दिवस का बिहार में भी छात्र-युवा संगठनों आइसा-इनौस ने पालन किया.

कोरोना राहत अभियान: पश्चिम बंगाल

अन्य राज्यों की भांति पश्चिम बंगाल में कोरोना का कहर जारी है और उससे संक्रमित मरीजों की तादाद दिन पर दिन बढ़ती ही जा रही है. मौजूदा समय में जो राष्ट्रव्यापी योजनाविहीन लाॅकआउट लागू कर दिया गया है, उससे दसियों लाख दिहाड़ी मजदूर, प्रवासी मजदूर, शहरी गरीब, झुग्गी-झोपड़ीवासी, ग्रामीण खेतिहर मजदूर, चाय बागानों/जूट मिलों/बंद कारखानों के मजदूर, आदिवासी और राज्य के हाशिये पर खड़े लोग अपनी आजीविका को मिली सर्वव्यापी चुनौती का सामना कर रहे हैं.

राजस्थान में सरकारी राहत का रेगिस्तान

कोरोना आपदा की वजह से हुए लाॅकडाउन के दौरान पार्टी से जुड़े हुए जनसंगठन उदयपुर शहर और ग्रामीण इलाकों में जरूरतमंद लोगों की सूची बना कर उन तक राशन पहुंचाने की मांग कर रहे हैं. महिला संगठन ऐपवा के माध्यम से उदयपुर शहर की बस्तियों में राशन व अन्य राहत सामग्री का वितरण भी किया गया है. जो राहत लोगों तक पहुंची है वह हालात को देखते हुए पर्याप्त नहीं है और शहर में गरीबों, निर्माण मजदूरों व दिहाड़ी मजदूरों का बड़ा हिस्सा जो खाद्य सुरक्षा से बाहर है, उसकी स्थिति चिंतनीय है.

प्रवासी मजदूरों की घर वापसी व अन्य सवालों पर देशव्यापी दो दिवसीय भूख हड़ताल

देश के विभिन्न हिस्सों में अब तक फंसे प्रवासी मजदूरों की सुरक्षित घर वापसी की मांग पर 18-19 अप्रैल को राष्ट्रव्यापी आह्वान के तहत विगत 18-19 अप्रैल को पूरे देश में कोरोना से बचाव के नियमों का सख्ती से पालन करते हुए भूख हड़ताल का कार्यक्रम आरम्भ हो गया है. इसका आयोजन ऐक्टू, खेग्रामस व भाकपा(माले) ने संयुक्त रूप से किया. हड़ताल से पहले एक प्रवासी श्रमिक चार्टर जारी कर मांगों को प्रचारित किया गया और 18 अप्रैल को एक ‘ट्विटर स्टार्म’ भी आयोजित हुआ.

देश भर में आयोजित हुए डा. अंबेदकर जयंती कार्यक्रम

[डा. भीम राव अंबेदकर की 129 जयंती के मौके पर देश के विभिन्न हिस्सों में उन्हें याद करते हुए देश के संविधान की रक्षा करने, सामाजिक भेदभाव व छूआछूत का विरोध करने, अंधविश्वास और पूर्वाग्रहों के खिलाफ लोगों को शिक्षित करने, कोरोना महामारी व लाॅकडाउन की वजह से भारी मुसीबतें झेल रहे गरीब व जरूरतमंद लोगों को हर संभव मदद पहुंचाने तथा सरकार से इसकी पुरजोर मांग करने और संकट की इस घड़ी में भी संघ-भाजपा द्वारा फैलाये जा रहे सांप्रदायिक-फासीवादी जहर जो कोरोना वायरस से जरा भी कम खतरनाक नहीं है, का मुकाबला करते हुए जनता के अधिकारों की हर कीमत पर हिफाजत करने का संकल्प लिया गया.

बिहार में लाॅकडाउन के दौरान सामंती-अपराधियों का मनोबल और पुलिस दमन बढ़ा

माकपा नेता का. जगदीश चंद्र बसु की हत्या

लाकडाउन के उपरांत पूरे बिहार में सामंती-अपराधियों का मनोबल सर चढ़कर बोल रहा है. कहीं वे दलितों पर हमले कर रहे हैं, कहीं मुसलमानों पर और अब वे अपने राजनीतिक विरोधियों को निशाना बना रहे हैं. 11 अप्रैल को सामंती-अपराधियों ने खगड़िया में माकपा जिला कमिटी के सदस्य व मैघौना पंचायत के पूर्व मुखिया कामरेड जगदीश चंद्र बसु की हत्या कर दी.  उनकी हत्या उस वक्त की गई जब वे कोरोना महामारी से निपटने के लिए जनजागरूकता अभियान चलाकर घर लौट रहे थे.

लाॅक डाउन से जूझते बिहार में हमारी पहलकदमिया

भोजपुर: संकट से उबरने की कोशिशें

20 मार्च से जिले में कोरोना रोको-जनसंकल्प अभियान चलाने की योजना बनाई गई. सभी प्रखंडों में बड़े- बड़े बैनर टांगे गये तथा सभी गरीबों के मुहल्ले में साबुन वितरण करने और जागरूकता अभियान चलाने का निर्णय लिया गया. सभी प्रखंडों में यह अभियान शुरू हो गया था. कुछ पंचायतों में साबुन का वितरण भी किया गया. तब तक पुरे देश में लाॅक डाउन हो गया.

लाॅक डाउन में भूख के विरुद्ध भात के लिए अभियान

भाकपा(माले) के आह्वान पर विगत 12 अप्रैल 2020 को पूरे देश में थाली बजा कर और उपवास रख कर मोदी सरकार से सभी को सम्मान के साथ भोजन देने की मांग उठाई गई. देश के लगभग सभी राज्यों में, बड़े महानगरों से लेकर छोटे-छोटे कस्बों और सूदूर गांवों के सैकड़ों गरीब टोलों में हजारों लोगों ने कोरोना महामारी जनित लाॅक डाउन का पालन करते हुए उन सवालों को मजबूती से सामने लाया जो देश व जनता के लिए बेहद जरूरी सवाल हैं.