विधायक दल नेता महबूब आलम ने उठाया सभी प्रवासियों की घर वापसी का मुद्दा

बिहार के मुख्यमंत्री नीतीश कुमार द्वारा 5 मई की शाम में आहूत सर्वदलीय बैठक में भाकपा(माले) विधायक दल नेता का. महबूब आलम ने सभी प्रवासियों की घर वापसी के मुद्दे को पुरजोर तरीके से उठाते हुए कहा कि सरकार केवल उन्हीं मजदूरों को आने की इजाजत दे रही है, जो अचानक हुए लाॅकडाउन के कारण फंस गए थे. जो मजदूर पहले से कहीं रह रहे हैं, सरकार उन्हें क्यों नहीं लाना चाहती है, जबकि फैक्टरियां बंद हो चुकी हैं, रोजगार के कोई साधन नहीं हैं और वे भुखमरी की कगार पर पहुंच चुके हैं?

5 मई 2020 को कार्ल मार्क्स के 202वें जन्म दिवस पर मजदूरों की सुरक्षित व मुफ्त घर वापसी की मांग पर राज्यव्यापी धरना

बिहार में वाम दलों - भाकपा(माले), भाकपा, माकपा, आरएसपी और फाॅरवर्ड ब्लाॅक ने प्रवासी बिहारी मजदूरों की सुरक्षित व पीएम केयर फंड के खर्चे से घर वापसी की जोरदार मांग करते हुए विगत 5 मई को जो सर्वहारा क्रांति के प्रणेता व दुनिया में समाजवाद की स्थापना के स्वप्नदर्शी कार्ल मार्क्स का 202 वां जन्मदिवस भी था, राज्य भर में लाॅकडाउन की स्थितियों से जूझते व शारीरिक दूरी का पालन करते हुए घरों व सार्वजनिक स्थानों पर तख्तियों, बैनरों व नारों के साथ धरना व प्रदर्शन कार्यक्रम आयोजित किया.

शर्म उनको मगर नहीं आती : बिहार में भूख से मर गई तेजा कुमारी

पूर्वी चंपारण जिले के रक्सौल प्रखंड में गांव है -- सिरिसिया. यह गांव लौकरिया पंचायत में है. विगत 25 अप्रैल को गांव की आठ वर्षीय बच्ची तेजा कुमारी की भूख से मौत हो गई. आधार से राशन कार्ड के लिंक न होने के कारण तेजा और उसके परिवार को राशन नहीं मिल रहा था.

दरभंगा में लगातार जारी है राहत अभियान

4 मई को दरभंगा शहर के वार्ड 20-21 में कोरोना मरीज की पहचान होने के बाद इस इलाके को पिछले कई दिनों से सील कर दिया गया है. इस वजह से दिक्कतों का सामना कर रहे मीर शिकार टोला, खनका चौक आदि मोहल्ले में ब्रेड, चूड़ा, चीनी, दूध, चायपत्ती के 100 पैकेट इंसाफ मंच व भाकपा(माले) की ओर से स्वयंसेवकों के जरिये वितरित किया गया. इस दौरान इंसाफ मंच के प्रदेश उपाध्यक्ष नेयाज अहमद, भाकपा(माले) के राज्य कमेटी सदस्य अभिषेक कुमार, जिला कमेटी सदस्य उमेश प्रसाद साह, इंसाफ मंच के मकसूद आलम उपर्फ पप्पू खां, मो. शमशेर, मो. उमर व नवीन सिन्हा भी मौजूद थे.

ईंट भठ्ठा मालिक के चंगुल में फंसे मजदूर भाकपा(माले) की पहल पर मुक्त हुए

दरभंगा जिले के बहादुरपुर प्रखंड के पिरडी-चक्का स्थित ईंट भठ्ठा पर नवम्बर महीने में प्रतापगढ़ (उत्तर प्रदेश) से मजदूर लाये गए. इन मजदूरों में बबलू राम, ब्रजेश राम, अंकित राम, माले मौर्या, दिलीप कुमार राम, गौतम पासवान और रामनरेश ‘सरोज’ सहित 12 मजदूर थे. लाॅकडाउन में भठ्ठा में काम बंद होने की वजह मजदूर दयनीय स्थिति में पहुंच गए. मजबूरन वे अपने घोड़ा बग्घी से अगल-बगल के किसानों के खेतों में पड़े भूसा को ढोने का काम करने लगे. लेकिन भठ्ठा मालिक को यह नागवार गुजरा और उसने इन मजदूरों का घोड़ा व बग्घी जब्त कर लिया था.

उत्तर प्रदेश: 25 जिलों में आयोजित हुआ मजदूर दिवस

इलाहाबाद में रेलवे जंक्शन स्थित कोरल क्लब में एआईआरईएफ के राष्ट्रीय अध्यक्ष कामरेड मनोज पाण्डेय ने सभा को सम्बोधित किया. पार्टी जिला कार्यालय में जिला प्रभारी डाॅ. कमल उसरी, झूंसी में बिजली संविदा मजदूर यूनियन के अध्यक्ष एससी बहादुर, फूलपुर इफको फर्टिलाइजर कारखाने में ठेका मजदूर संघ अध्यक्ष का. देवानंद भारती, दारागंज मे सफाई कर्मचारी एकता मंच के अध्यक्ष कासंतोष और कोरांव मे का. पंचम लाल के नेतृत्व में मजदूर दिवस मनाया गया.

चाय बगान मजदूरों व स्कीम वर्कर्स ने भी मनाया मांग दिवस

बीती रात हुई लगातार बारिश के बावजूद उत्तरी बंगाल के चाय बगान मजदूरों ने 27 अप्रैल को छोटे-छोटे समूहों में जमा होकर एैक्टू द्वारा आहूत मांग दिवस का पालन किया. उन्होंने हाथ से लिखी तख्तियां लेकर और नारे लगाते हुए मांगपत्र बंद व बीमार पड़े चाय बगानों के मजदूरों की सम्स्याओं और लाॅकडाउन के दौरान बकाया मजदूरी के भुगतान की मांग की. फांसीदेवा के तरीहन्ना चाय बगान में में हमार चाय बगान नेताओं का. मानबहादुर लामा, बुद्धु बेक, दीवान मार्डी के नेतृत्व में चाय बगानों के मजदूरों के मांग पत्रा का पाठ करते हुए प्रदर्शन किए गए. दार्जिलिंग जिले के शचिन्द्र चंद्र टी इस्टेट में का.

देशव्यापी मांग दिवस: 27 अप्रैल 2020: कोरोना काल में देश के मजदूर-किसानों ने अपने अधिकार रक्षा की हुंकार भरी

विगत 27 अप्रैल 2020 को ऑल इण्डिया सेंट्रल कौंसिल ऑफ ट्रेड यूनियंस (ऐक्टू) और ऑल इण्डिया स्कीम वर्कर्स फेडरेशन तथा उनसे जुड़ी चाय बगान मजदूरों, आशा, रसोइया व आंगनबाड़ी कर्मियों समेत कई ट्रेड यूनियनों ने मांग दिवस मनाने की घोषणा करते हुए अपनी मांगों का चार्टर जारी करते हुए मांग दिवस मनाने की घोषणा की थी. अखिल भारतीय खेत ग्रामीण मजदूर सभा (खेग्रामस) व मनरेगा मजदूर संगठन ने जो देश के ग्रामीण इलाकों के मलदूरों के प्रतिनिधि संगठन हैं, पहले से ही 27 अप्रैल को मांग दिवस मनाने की घोषणा थी. आगे चलकर किसान संगठन अखिल भारतीय किसान महासभा भी मांग दिवस में शामिल हो गया.

मुस्लिम समुदाय पर बढ़ा साम्प्रदायिक हमला, महिलाओं पर सामंती हिंसा : राज्व्यापी विरोध दिवस

नूरचक (पटना): दलित-मुस्लिम दोनों शिकार

पटना जिले के सिगोड़ी थाना में नूरचक नाम का गांव है. इस गांव में 100 भांट ब्राह्मण, 30 रविदास, 10 पासवान और 30 मुस्लिम समुदाय के घर हैं. इस गांव में दलित व मुसलमान लंबे समय से एक साथ रहते आए हैं. आज भी इनके बीच एकता कायम है. बीते 28 और 29 अप्रैल को भांट ब्राह्मणों के द्वारा उनके टोले पर कई बार हमला किया गया. इस हमले में कई लोग घायल हुए हैं. गांव में माहौल तनावपूर्ण बना हुआ है. वे लोग यहां दंगा भड़काने की कोशिश में भी लगे हुए हैं. प्रशासन की भूमिका बेहद नकारात्मक है.

गड़हनी में राहत: शाहीनबाग ने समाज को नई प्रेरणा दी है

भोजपुर जिले का गड़हनी बाजार जिले में बीते 5 दशकों से जारी सामाजिक-राजनीतिक बदलाव के संघर्ष, इसकी उपलब्धियों और इसकी कुर्बानियों का केन्द्रबिन्दु रहा है. पार्टी के संस्थापक नेताओं व शहीदों का. रामेश्वर यादव और डा. निर्मल से इसकी पुरानी पहचान जुडी हुई है. पिछले ही दिनों शहीद हुए लोकप्रिय मुखिया व जननेता का. अरूण सिंह ने इस पहचान को एक बार फिर से स्थापित किया हैपिछले दिनों देशव्यापी शाहीनबाग आंदोलनों में एक नाम गड़हनी शाहीनबाग का भी जुड़ा.