प्रेस-विज्ञप्ति

सर्वदलीय बैठक में मोदी का वक्‍तव्‍य भ्रामक व गुमराह करने वाला है – भाकपा(माले) :: 22 जून को शहीद सैनिकों के सम्‍मान में श्रद्धांजलि दिवस के आयोजन का आह्वान

नई दिल्‍ली, 20 जून

19 जून को की गई ‘ऑल पार्टी बैठक’ में नरेन्‍द्र मोदी से जितने सवालों के जवाब मिले उससे ज्‍यादा नये प्रश्‍न खड़े हो गये हैं. उन्‍होंने केवल एक ही तथ्‍य को स्‍वीकारा कि चीनी सैन्‍य टुकडि़यों के साथ आमने सामने की लड़ाई में एक कर्नल समेत बीस भारतीय सैनिकों की जान चली गई. बाद में चीन ने चार अधिकारियों समेत 10 और सैनिकों को छोड़ा है, जबकि भारत की ओर से इस बात को स्‍वीकार ही नहीं किया गया था कि हमारा एक भी सैनिक लापता है अथवा चीनियों द्वारा पकड़ा गया है.

कोविड-19 से लड़ने में भारत को सक्षम बनाने के संदर्भ में भाकपा(माले) का प्रधानमंत्री को प्रेषित ज्ञापन

प्रधानमंत्री महोदय, 22 मार्च को आपके द्वारा घोषित देश व्‍यापी लॉक डाउन की अवधि समाप्‍त होने वाली है। उसके पहले ही कई राज्‍यों में लॉक डाउन बढ़ाने और कोविड-19 हॉट स्‍पॉट चिह्नित किये गये इलाकों को पूरी तरह सील करने की खबरें आने लगी हैं। पिछले तीन हफ्तों के अनुभव से साफ हो चुका है कि कोविड-19 और लॉक डाउन मिलकर ज्‍यादा बड़ी समस्‍या बन गये हैं। इन हालात से निपटने के लिए जरूरी है कि हम पहले इस समस्‍या को स्‍वीकार करें।

दिल्‍ली में तबलीगी जमात की घटना का अपराधीकरण व साम्‍प्रदायिकीकरण करने की कोशिशें निन्‍दनीय व भर्त्‍सना योग्‍य कृत्‍य है

नई दिल्‍ली, 31 मार्च

मार्च महीने के मध्‍य में तबलीगी जमात के दिल्‍ली में हुए एक अंतर्राष्‍ट्रीय समारोह का अपराधीकरण एवं साम्‍प्रदायिकीकरण करने की हो रही कोशिशें बेहद निन्‍दनीय कृत्‍य है जिसकी भर्त्‍सना होनी चाहिए.

जनता के साथ खड़े हों, कोरोना महामारी को रोकें

29 मार्च 2020

दुनिया भर में तबाही फैलाने वाली कोरोना वायरस की महामारी को अपने देश में रोकने के लिए मोदी सरकार ने हताशा में देशव्यापी लॉक डाउन लागू करने का क़दम उठाया है। ठीक समय पर रोकथाम न करने और सार्वजनिक स्वास्थ्य सेवा की तबाह हालत ने हमारे मुल्क को बहुत बड़ी मुश्किल में डाल दिया है। अब इस वायरस के फैलने से रोकने के लिए लॉकडाउन एक अनिवार्य बुराई माना जा रहा है। पर इस लॉकडाउन को लागू करने से पहले सरकार ने एक क्षण के लिए भी नहीं सोचा कि करोड़ों दिहाड़ी मजूर, प्रवासी मजूर व असंगठित क्षेत्र के मजूर, आजीविका ख़त्म होने व अ

मानवाधिकार कार्यकर्ताओं को अंतरिम जमानत से इंकार करना भारतीय लोकतंत्र को एक और बड़ा झटका है

नई दिल्ली, 20 मार्च

सुप्रीम कोर्ट ने भीमा कोरेगांव मामले में मानवाधिकार कार्यकर्ता और जन बुद्धिजीवी गौतम नौलखा और आनंद तेलतुंबडे़ को अंतरिम जमानत देने से इंकार कर दिया है। यह काफी निराशजनक और परेशान करने वाला निर्णय है। इस अपील को खारिज करने का मतलब है कि दोनों को अगले तीन हफ्ते के भीतर पुलिस के सामने आत्‍मसमर्पण करना होगा।

कोरोना वायरस से बचाव के संबंध में आवश्यक कदम उठाने हेतु

कोराना वायरस ने देश के कई राज्यों को अपनी चपेट में ले लिया है और अपने राज्य बिहार में भी कई संदेहास्पद मरीज मिले हैं। मेडिकल इमरजेंसी की स्थिति से देश गुजर रहा है। जनता के बीच भ्रम व भय का माहौल भी बना हुआ है। सरकार की ओर से इस संदर्भ में कई जरूरी कदम उठाए भी गए हैं। बचाव व इलाज के उपायों को और मजबूत करने की दिशा में हम निम्नलिखत बिंदुओं पर आपका ध्यान आकृष्ट करना चाहते हैं.

कोराना वायरस से बचाव और सुरक्षा के उपाय भारत के सबसे गरीब लोगों तक पहुंचने चाहिए

14-16 मार्च को कोलकाता में हुई भाकपा (माले) की केन्‍द्रीय कमेटी की बैठक में यह घोषणा की गई कि कोरोना वायरस की महामारी को फैलने से रोकने के लिए एहतियात के तौर पर जनता की जुटान के सभी कार्यक्रम 31 मार्च तक के लिए स्‍थगित कर दिये गये हैं।

सीएए, एनपीआर और एनआरसी वापस लो!

गृहमंत्री अमित शाह ने संसद में घोषणा की कि एनपीआर के दौरान किसी भी नागरिक को संदिग्‍ध नहीं घोषित किया जायेगा। यह घोषणा की इस बात का सबूत है कि सीएए, एनआरसी और एनपीआर के खिलाफ चल रहे आंदोलन कितने जरूरी हैं। शाह ने जानबूझ कर लोगों को गुमराह करने की कोशिश की है। लोगों को संदिग्‍ध घोषित करने की प्रक्रिया एनपीआर के बाद शुरू होती है। एनपीआर के जरिये जुटाये गये आंकड़ों का इस्‍तेमाल एनआरसी बनाने के लिए किया जाता है। साथ ही संसद में शाह की घोषणा का कोई कानूनी आधार नहीं है। शाह की घोषणा को कानूनी आधार देने के लिए संसद को नागरिकता संशोधन कानून में बदलाव करना चाहिए और एनपीआर

दिल्ली में हो रही भाजपा प्रायोजित हिंसा का प्रतिकार करें

भाकपा माले दिल्ली में भाजपा-आरएसएस के गुंडो द्वारा दिल्ली पुलिस की खुलेआम सरपरस्ती में चल रहे हिंसक अभियान और आगजनी की कड़ी निंदा करता है. भाजपा-आरएसएस के गुंडो द्वारा जारी इस हिंसा में कई जाने जा चुकी हैं, और दर्जानों लोग बुरी तरह घायल हुए हैं, गाड़ियां, दुकाने जलाई जा चुकी हैं, लोगों की जान और आजीविका दोनो ही खतरे में हैं. हम इस जनसंहार दंगे और आगजनी को उकसाने के लिए जिम्मेवाद भाजपा नेता कपिल मिश्रा की तत्काल गिरफ्तारी की मांग करते हैं, हम मांग करते हैं कि दोषियों पर फौरन कार्यवाही की जाए और शांति की बहाली की जाए.

बजट 2020-21: आर्थिक संकट से कोई निजात नहीं

इस साल का बजट मोदी सरकार की तबाही फैलाने वाली नीतियों का ही अगला चरण है। इसमें बेरोजगारी, महँगाई, खेती की बदहाली और घटती मज़दूरी से पहाड़ों तले कराहती आम अवाम के लिए कोई राहत नहीं है।

जैसा कि बजट दस्तावेज ख़ुद कहता है, सम्पूर्ण रोज़गार में केजुअल श्रम का प्रतिशत घट गया है। और भाजपा सरकार श्रमशक्ति का केजुअलाईजेशन कर रही है! रोज़गार के मामले में यह एक ख़ौफ़नाक परिदृश्य है। ‘स्व-रोज़गार’ श्रम अभी भी उतना ही है जितना वह आठ साल पहले 2011 में था- 50 प्रतिशत। यह आँकड़ा भी बढ़ती बेरोजगारी की तरफ़ ही इशारा करता है।