प्रेस-विज्ञप्ति

संविधान विरोधी, गरीब विरोधी व साम्प्रदायिक नागरिकता संशोधन बिल और अखिल भारतीय एनआरसी का विरोध करें.

मानवाधिकार दिवस, १० दिसंबर को नागरिकता संशोधन बिल और  अखिल भारतीय एनआरसी, एवं विश्वविद्यालयों, छात्रों व अध्यापकों के उपर हो रहे हमलों के खिलाफ प्रतिरोध दिवस के रूप में आयोजित करें

नागरिकता संशोधन बिल केन्द्रीय केबिनेट ने पास कर दिया है, और संसद में जल्द ही पेश किया जायेगा. इसके माध्यम से आरएसएस के हिन्दू राष्ट्र के एजेण्डा को पिछले दरवाजे से लागू कराने की कोशिश की जा रही है.

अयोध्‍या में विवादित भूमि के मालिकाने के मुकदमे में सर्वोच्‍च न्‍यायालय के फैसले पर भाकपा(माले) का बयान

नई दिल्‍ली 9 नवम्‍बर.

यह महत्‍वपूर्ण है कि अयोध्‍या में विवादित स्‍थल पर सर्वोच्‍च न्‍यायालय का फैसला किसी भी तरह से 6 दिसम्‍बर 1992 को बाबरी मस्जिद के विध्‍वंस की कायरतापूर्ण और आपराधिक घटना को सही नहीं ठहराता है. लेकिन यह निर्णय विवाद का युक्तिसंगत समाधान करने में भी असफल रहा है. स्‍वयं न्‍यायालय द्वारा बताए गए आधार और निकाले गये निष्‍कर्ष के बीच की ढेर सारी असंगतियों के चलते यह फैसला न तो तर्कसंगत है और न समझ में आने लायक।

एन आर सी की फाइनल सूची पर भाकपा(माले) का बयान

नई दिल्‍ली 31 अगस्‍त

असम में नेशनल रजिस्‍टर ऑफ सिटीजन्‍स (एनआरसी) की फाइनल सूची प्रकाशित हो चुकी है. 19 लाख से ज्‍यादा लोग (कुल 19,06,657) इस सूची से बाहर हैं. चिन्‍ता की बात है कि इतनी बड़ी संख्‍या में बहिष्‍करण भारी मानवीय संकट का कारण बन सकता है. जो लोग एनआरसी से बहिष्‍कृत हुए हैं उन्‍हें 120 दिनों के भीतर फॉरेनर्स ट्रिब्‍यूनल में आवेदन करना होगा.

संदीप पांडेय की नजरबंदी का विरोध

नई दिल्ली 11 अगस्त

भाकपा माले ने सामाजिक कार्यकर्ता संदीप पांडेय और एनएपीएम की सचिव अरुंधति धुरु की आज लखनऊ में कुछ देर के लिए की गई नजरबंदी की कड़ी भर्त्सना की है. वे आज शाम लखनऊ में होने वाले कश्मीर एकता कार्यक्रम में भाग लेने वाले थे. उन्हें उनके घर में पुलिस घेराबंदी के बीच नजरबन्द किया गया था, और बाद में पुलिस प्रशासन ऐसी किसी कार्यवाही से इंकार भी कर रहा है जब कि ऐसा खुलेआम किया गया. यह उत्तर प्रदेश प्रशासन द्वारा खुद ही कानून को हाथ में लेने की गैर क़ानूनी कार्यवाही है.

धारा 370 और धारा 35A को बहाल करो ! कश्‍मीर में सभी विपक्षी नेताओं को रिहा करो ! कश्‍मीर और देश के संविधान से खिलवाड़ मत करो !

नई दिल्‍ली, 5 अगस्‍त 2019.

राष्‍ट्रपति के आदेश द्वारा धारा 370 को रद्द करना और जम्‍मू एवं कश्‍मीर राज्‍य को दो केन्‍द्र शासित क्षेत्रों -लद्दाख और जम्‍मू एवं कश्‍मीर- में विभाजित करना भारतीय संविधान के विरुद्ध तख्‍तापलट जैसी कार्यवाही से कम नहीं है. मोदी सरकार अपने लुके-छिपे, साजिशाना और गैर-कानूनी तौर तरीकों से संविधान को और कश्‍मीर को बाकी भारत से जोड़ने वाले महत्‍वपूर्ण ऐतिहासिक पुल को, जलाने का काम कर रही है.

लोकसभा चुनाव 2019 के परिणामों पर भाकपा(माले) का बयान

नई दिल्‍ली, 23 मई 2019

भाजपा नेतृत्‍व वाले एन.डी.ए. की भारी जीत के साथ मोदी सरकार की फिर से वापसी हुई है. लेकिन जिस तरह से यह जीत हासिल की गई है उसके भारतीय लोकतंत्र के भविष्‍य के लिए चिन्‍ताजनक परिणाम होंगे. 2014 के चुनावों के उलट इस बार मोदी ने विकास के नाम पर तो दिखावे के लिए भी वोट नहीं मांगा. इस बार बिना किसी शर्म के सीधे साम्‍प्रदायिक घृणा अभियान और युद्धोन्‍माद के नाम पर वोट मांगे गये. यहां तक कि आतंकवाद की आ‍रोपित प्रज्ञा सिंह ठाकुर को न सिर्फ प्रत्‍याशी बनाया गया बल्कि भाजपा के चेहरे के रूप में पेश किया गया.

पार्टी पोलित ब्यूरो का बयान

पुलवामा हमले और उसके बाद भारत-पाकिस्तान के बीच तनाव को आगामी चुनाव में वोटों के लिए भुनाने की भाजपा व मोदी सरकार की कोशिशों की भाकपा-माले की पोलित ब्यूरो आलोचना करती है. पुलवामा हमले और बालाकोट हवाई हमले पर उठने वाले सवालों को लोगों को देशद्रोही कह कर दबाया नहीं जा सकता. यह मोदी सरकार की जबरदस्त विफलता का उदाहरण है. मोदी सरकार बेरोजगारी, खेती-किसानी की तबाही, आर्थिक तबाही, सांप्रदायिक हिंसा और संविधान पर हमले के मामलों में भी अव्वल रही है.

प्रकाशनार्थ -- पोलित ब्यूरो

भाकपा-माले की पोलित ब्यूरो पुलवामा हमले और उसके बाद भारत-पाकिस्तान के बीच तनाव को आगामी चुनाव में वोटों के लिए भुनाने की भाजपा व मोदी सरकार की कोशिशों की आलोचना करती है। पुलवामा हमले और बालाकोट हवाई हमले पर उठने वाले सवालों को लोगों को देशद्रोही कह कर दबाया नहीं जा सकता। यह मोदी सरकार की जबर्दस्त विफलता का उदाहरण है। साथ ही मोदी सरकार बेरोजगारी, खेती-किसानी की तबाही, आर्थिक तबाही, सांप्रदायिक हिंसा और संविधान पर हमले के मामलों में भी अव्वल रही है।

पुलवामा और नहीं ! भारत और पाकिस्तान के बीच युद्ध और नहीं !

14 फरवरी को पुलवामा में जम्मू-श्रीनगर राजमार्ग पर सीआरपीएफ के काफिले पर हुए हमले, जिसकी जिम्मेदारी पाकिस्तान आधारित आतंकवादी संगठन जैश-ए-मोहम्मद ने ली थी, और भारतीय वायुसेना द्वारा कल ( 26 फरवरी) पाकिस्तान के भीतर किये गये जवाबी हमले से भारत और पाकिस्तान के बीच के संबंध लगभग युद्ध के कगार पर पहुंच गए हैं। भारत सरकार के विदेश सचिव ने भारतीय प्रतिक्रिया को आतंकवादी हमले के जवाब में की गई 'प्रि-एम्प्टिव' (बचाव के लिए) कार्यवाही बताया है । दूसरी तरफ पाकिस्तान ने आकस्मिक हमला कर बदले की कार्यवाही करने की घोषणा की है। तमाम संकेतों से जाहिर होता है कि भारत और पाकिस्तान एक बार फिर एक और युद्ध के कग

पुलवामा में हुए हमले की निंदा करें

भाकपा(माले) ने पुलवामा में सीआरपीएफ के जवानों पर हुए हमले की कड़ी निंदा की है. इस नुकसान और शोक की घड़ी में हम हमले के शिकार जवानों के शोकाकुल परिवारों के साथ खड़े हैं और कामना करते हैं कि घायल सिपाही जल्द से जल्द स्वस्थ हो उठें.

इस हमले ने एक बार फिर मोदी सरकार की कश्मीर नीति की चरम विफलता का भंडाफोड़ कर दिया है. कश्मीर के हालात और पाकिस्तान से सम्बन्ध, दोनों मामलों में सुधार के लिये किसी भी गंभीर प्रयास के अभाव में यह अनिवार्य है कि बस सर्जिकल स्ट्राइक का सैन्यवादी गुणगान करना और आक्रामक भावभंगी अपनाना केवल खोखला ही साबित होगा.

- केन्द्रीय कमेटी, भाकपा(माले)